खतियानी परिवार की साप्ताहिक बैठक: गैर मजरुआ जमीन की रसीद काटने पर लगी रोक हटाने की उठी मांग, धान का मूल्य 30 से 40 रुपये प्रति किलो करने की वकालत
नरेश सोनी, प्रधान संपादक
हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी):
हजारीबाग के पुराना धरना स्थल के समीप शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को 'खतियानी परिवार' की साप्ताहिक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता अशोक राम ने की। इस दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने राज्य के रैयतों व किसानों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श करते हुए राज्य सरकार से गैर मजरुआ जमीन की मालगुजारी रसीद पुनः काटने और किसानों को धान की उचित कीमत दिलाने की पुरजोर मांग की।
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| Khatiyani Pariwar leaders Mohammad Hakim and members holding weekly meeting near old dharna sthal in Hazaribagh |
'गैर मजरुआ जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक सही, लेकिन रसीद काटना बंद करना रैयतों के साथ अन्याय': मो. हकीम
बैठक को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने कहा कि आजादी से पूर्व राजा-महाराजाओं और जमींदारों द्वारा हुकुमनामा के आधार पर गैर मजरुआ जमीन रैयतों को बंदोबस्त की गई थी। इसके आधार पर तत्कालीन सरकारों द्वारा विधिवत जमाबंदी कायम की गई। वर्तमान में गरीब रैयत कई पीढ़ियों से उस जमीन पर दखल-कब्जा बनाए हुए हैं, मकान बनाकर रह रहे हैं और खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गैर मजरुआ जमीन की अवैध खरीद-बिक्री पर सरकार द्वारा लगाई गई रोक का संगठन पूरी तरह समर्थन करता है, लेकिन जमीन की रसीद काटने पर रोक लगाना सरासर अनुचित और पीड़ादायक है। रसीद बंद होने से गरीब किसान सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, कृषि ऋण और आपदा राहत के लाभ से पूरी तरह वंचित हो गए हैं। उन्होंने झारखंड सरकार से जनहित में मांग की कि दखल-कब्जा वाली गैर मजरुआ जमीन की रसीद पूर्व की भांति निर्गत करने का आदेश दिया जाए।
'महंगाई से लाचार किसान, धान का न्यूनतम मूल्य 30 से 40 रुपये प्रति किलो करे सरकार': सुनीता कश्यप
बैठक में महिला प्रकोष्ठ की उपाध्यक्ष श्रीमती सुनीता कश्यप ने किसानों की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज महंगाई चरम पर है। बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। हाड़-तोड़ मेहनत के बाद जब किसान फसल तैयार करता है, तो उसे अपनी उपज का वाजिब दाम नहीं मिल पाता।
उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि देश का पेट भरने वाले अन्नदाता को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए झारखंड सरकार को धान की सरकारी खरीद दर (समर्थन मूल्य) कम से कम 30 से 40 रुपये प्रति किलो निर्धारित करनी चाहिए। लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिलने से किसान कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं।
बैठक में ये सदस्य रहे उपस्थित
साप्ताहिक बैठक में मुख्य रूप से प्रसनजीत मुखर्जी, मेघनाथ मेहता, मुख्तार अंसारी, महेश विश्वकर्मा, प्रदीप प्रसाद मेहता, मोहम्मद आशिक, तनवीर अहमद, विजय मिश्रा, मोहम्मद फखरुद्दीन, बोधी साहू, शोएब अंसारी सहित कई अन्य सदस्य एवं स्थानीय रैयत उपस्थित थे। सभी ने एक स्वर में किसानों और रैयतों के हक-अधिकार के लिए आंदोलन को तेज करने का संकल्प दोहराया।
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