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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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एएमयू और विभावि के बीच बढ़ेगी शैक्षणिक निकटता: कुलसचिव प्रो. आसीम जफर की शिष्टाचार भेंट

एएमयू और विभावि के बीच बढ़ेगी शैक्षणिक निकटता: कुलसचिव प्रो. आसीम जफर की शिष्टाचार भेंट
हजारीबाग में विनोबा भावे विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. प्रणिता को गुलदस्ता भेंट कर अभिवादन करते एएमयू के कुलसचिव प्रो. आसीम जफर।

हजारीबाग: शिक्षा के क्षेत्र में दो प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच वैचारिक आदान-प्रदान और भविष्य की संभावनाओं को लेकर शनिवार को एक महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कुलसचिव प्रो. आसीम जफर ने विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि), हजारीबाग की कुलसचिव डॉ. प्रणिता से शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान न केवल शिष्टाचार का परिचय दिया गया, बल्कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक सुधारों पर भी गहन चर्चा हुई।

शिक्षा और प्रबंधन पर केंद्रित रही चर्चा

डॉ. प्रणिता ने प्रो. जफर का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें आगामी ईद की अग्रिम शुभकामनाएं दीं। बातचीत के मुख्य अंशों में दोनों विश्वविद्यालयों के बीच 'शैक्षणिक आदान-प्रदान' (Academic Exchange) की संभावनाओं को तलाशना शामिल था। प्रो. आसीम जफर, जो स्वयं एक पुरस्कृत शिक्षक और कुशल प्रशासक रहे हैं, ने अपने अनुभवों को साझा किया। डॉ. प्रणिता ने बताया कि प्रो. जफर से शिक्षण और प्रशासन की बारीकियों पर संवाद करना एक सुखद अनुभव रहा।

केंद्रीय बनाम राज्य विश्वविद्यालय: एक तुलनात्मक अध्ययन

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना 1920 में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में हुई थी, जिसे आज NAAC 'A+' ग्रेड प्राप्त है। लगभग 39,367 विद्यार्थियों की क्षमता वाला यह संस्थान देश के क्रीम टैलेंट को आकर्षित करता है। दूसरी ओर, 1992 में स्थापित विनोबा भावे विश्वविद्यालय झारखंड के पिछड़े क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगा रहा है। विभावि में स्नातक स्तर पर ही प्रति वर्ष 50,000 से अधिक छात्र नामांकित होते हैं, जो इसकी व्यापक पहुंच को दर्शाता है।

हजारीबाग की मिट्टी से एएमयू के शिखर तक

प्रो. आसीम जफर का यह दौरा भावनात्मक रूप से भी खास है, क्योंकि वे मूल रूप से हजारीबाग के चिश्तिया मोहल्ला के निवासी हैं। 11 सितंबर 2025 को भारत के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक (AMU) के कुलसचिव के पद पर उनकी नियुक्ति हजारीबाग के लिए गौरव का विषय है। एक स्थानीय प्रतिभा का राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा नेतृत्व संभालना क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

भविष्य की राह आपसी सहयोग से विकास

मुलाकात के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे एएमयू जैसी पुरानी संस्था के अनुभव का लाभ विभावि जैसे उभरते विश्वविद्यालय को मिल सकता है। शोध (Research), फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम और छात्रों के लिए नई तकनीकों के इस्तेमाल पर दोनों अधिकारियों ने सकारात्मक रुख दिखाया। इस तरह की मुलाकातें भविष्य में एमओयू (MoU) का आधार बन सकती हैं, जिससे झारखंड के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर का एक्सपोजर मिल सकेगा।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक भारत।

​KVS का कड़ा फैसला: रील्स और वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म-लोगो के इस्तेमाल पर रोक, होगी कानूनी कार्रवाई

KVS का कड़ा फैसला: रील्स और वीडियो में स्कूल यूनिफॉर्म-लोगो के इस्तेमाल पर रोक, होगी कानूनी कार्रवाई

बिना अनुमति यूनिफॉर्म और लोगो का प्रयोग अब दंडनीय अपराध।

नई दिल्ली: केन्द्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, फिल्म मेकर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक बेहद सख्त 'पब्लिक नोटिस' जारी किया है। संगठन के संज्ञान में आया है कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर KVS की यूनिफॉर्म, नाम और लोगो का इस्तेमाल आपत्तिजनक और भ्रामक तरीके से किया जा रहा है।

अब बिना अनुमति नहीं बनेगी रील

जारी नोटिस के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति या प्रोडक्शन हाउस बिना लिखित अनुमति के निम्नलिखित चीजों का उपयोग नहीं कर पाएगा:

केन्द्रीय विद्यालय की आधिकारिक यूनिफॉर्म या उससे मिलती-जुलती ड्रेस।

KVS का आधिकारिक लोगो, नाम और चिन्ह।

संस्थान से जुड़ी कोई भी पहचान।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

KVS ने स्पष्ट किया है कि छात्रों या संस्थान की छवि को खराब करने वाले, 'वल्गर' या 'रोमांटिक' तरीके से फिल्माए गए वीडियो को गंभीर अपराध माना जाएगा। इसे मानहानि (Defamation) और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) का उल्लंघन मानते हुए सिविल और क्रिमिनल केस दर्ज किए जाएंगे।

कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अपील

अतिरिक्त आयुक्त (प्रशासन) दीपेश गहलोत द्वारा हस्ताक्षरित इस नोटिस में सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और क्रिएटर्स से अपील की गई है कि वे शिक्षण संस्थानों की गरिमा बनाए रखें। नियमों का उल्लंघन करने वाले कंटेंट को हटाने के साथ-साथ उन पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

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