अंबा प्रसाद का सत्ता और सिस्टम पर तीखा प्रहार,
बड़कागांव में लूट और चट्टी बरियातू में दमन पर जताया गहरा क्षोभ
हजारीबाग/बड़कागांव: बड़कागांव के पावन धरा पर व्याप्त अराजकता और प्रशासनिक संवेदनहीनता ने जनमानस को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर बड़कागांव मुख्य चौक स्थित डेली मार्केट में दुस्साहसी अपराधियों ने दिनदहाड़े अंधाधुंध पांच-छह राउंड फायरिंग कर आतंक का पर्याय रचा और लगभग तीस से चालीस लाख मूल्य के आभूषण लूटकर सुगमता से चंपत हो गए, वहीं दूसरी ओर केरेडारी के चट्टी बरियातू में अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की गुहार लगा रही महिला रैयतों पर पुलिसिया दमन का क्रूर चेहरा सामने आया है। इन विचलित करने वाली घटनाओं पर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने अत्यंत मर्माहत होते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े किए हैं।
अंबा प्रसाद ने सत्ता के गलियारों और खाकी के रसूख को आईना दिखाते हुए प्रश्न किया कि क्या जल, जंगल और जमीन की अस्मिता हेतु आजीवन संघर्ष करने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सपनों का झारखंड इसी विभिषिका के लिए निर्मित हुआ था। उन्होंने अत्यंत व्यथित स्वर में कहा कि आज के परिवेश में आदिवासी, पिछड़े और मूलवासी स्वयं को असुरक्षित और असहाय महसूस कर रहे हैं क्योंकि वर्तमान तंत्र उनकी रक्षा करने के बजाय कॉरपोरेट घरानों और कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करने में अपनी संपूर्ण ऊर्जा व्यय कर रहा है।
पूर्व विधायक ने पुलिस प्रशासन की भूमिका को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब जनता की गाढ़ी कमाई और संपत्ति लूटी जाती है, तब कानून के रखवाले मूकदर्शक बने रहते हैं, किंतु जैसे ही कोई वंचित व्यक्ति अपनी भूमि के उचित मुआवजे या पुनर्वास के लिए स्वर मुखर करता है, तो उसे पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा बर्बरतापूर्वक पीटा और गिरफ्तार किया जाता है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज गुरुजी के महान आदर्शों की आड़ में कुछ निहित स्वार्थी तत्व झारखंड की अस्मिता का व्यापार कर रहे हैं। उनके अनुसार, यदि गुरुजी इस समय सक्रिय होते तो अपनी आंखों से झारखंड की यह दुर्दशा देखकर अत्यंत पीड़ा का अनुभव करते। बड़कागांव की यह भयावह स्थिति अब जन-आक्रोश का रूप ले रही है, जहाँ सामान्य नागरिक न्याय और सुरक्षा की बाट जोह रहा है।

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