हजारीबाग: सदन में गूंजी कटकमदाग और दारू की समस्याएं, विधायक प्रदीप प्रसाद ने अस्पताल और जमीन विवाद पर सरकार को घेरा
रांची/हजारीबाग:
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान हजारीबाग के सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जनहित के मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद की। विधायक ने विशेष रूप से कटकमदाग और दारू प्रखंड में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और पूरे क्षेत्र में 'गैरमजरूआ' भूमि की जटिलताओं को लेकर सरकार से तीखे सवाल किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक शिथिलता के कारण जनता को बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर उठाए सवाल
विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन को अवगत कराया कि कटकमदाग और दारू प्रखंड में एक सर्वसुविधायुक्त अस्पताल का अभाव है। वर्तमान में, इन क्षेत्रों के मरीजों को सामान्य उपचार के लिए भी हजारीबाग सदर अस्पताल या शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज की दौड़ लगानी पड़ती है।
आपातकालीन स्थिति: दूरदराज के ग्रामीणों के लिए आपात स्थिति में समय पर इलाज न मिलना जानलेवा साबित हो रहा है।
विधायक की मांग: सरकार इन दोनों प्रखंडों में चरणबद्ध तरीके से संसाधनों से लैस अस्पतालों की स्थापना करे ताकि स्थानीय स्तर पर ही बेहतर चिकित्सा मिल सके।
जमीन रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज की बाधाएं
भूमि विवादों पर चर्चा करते हुए विधायक ने "गैरमजरूआ आम" और "गैरमजरूआ खास" जमीन से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से रखा। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में विसंगतियों (Mismatch) के कारण आम रैयतों का जीवन कठिन हो गया है।
रुका हुआ विकास: म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) लंबित होने और एलपीसी (LPC) निर्गत न होने के कारण जमीन की खरीद-बिक्री ठप है।
राजस्व का नुकसान: इन तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियों के कारण न केवल जनता परेशान है, बल्कि सरकार के राजस्व संग्रहण पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
"सदन जनता की आवाज उठाने का सबसे बड़ा मंच है। स्वास्थ्य और भूमि सीधे तौर पर आम आदमी के जीवन से जुड़े विषय हैं। जब तक कटकमदाग और दारू को उनका हक नहीं मिल जाता, संघर्ष जारी रहेगा।" - प्रदीप प्रसाद, विधायक (हजारीबाग सदर)
विधायक ने सरकार से मांग की कि भूमि संबंधी लंबित मामलों के लिए एक पारदर्शी और सरल नीति बनाई जाए ताकि आम नागरिकों को बिचौलियों और कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें।

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