हजारीबाग के इचाक में 'शहीद मेला' की गूँज! देशभक्ति और मनोरंजन का अनूठा संगम
इचाक (हजारीबाग)
: झारखंड की माटी हमेशा से वीरों और शहीदों की जननी रही है। इसी गौरवशाली परंपरा को जीवंत रखने और नई पीढ़ी में देशभक्ति का संचार करने के लिए हजारीबाग के इचाक में तीसरे भव्य 'शहीद मेले' का आयोजन किया जा रहा है।
मेला समिति के मुख्य संरक्षक बटेश्वर प्रसाद मेहता ने स्थानीय निवासियों और मीडिया को संबोधित करते हुए इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारे उन अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
खबर के मुख्य बिंदु:
- शहीदों को नमन: मेले के माध्यम से जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों सहित स्थानीय वीरों जैसे मोतीराम ठाकुर, रामाधीन गिरी, रामाधीन कसेरा, रुद्रनारायण महतो, नूनू महतो और बॉर्डर पर शहीद हुए राजेश मिंज व रघुवीर प्रसाद मेहता को याद किया जाएगा।
- विकास का सफर: बटेश्वर प्रसाद मेहता ने मेले की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा, "शुरुआत में यह एक शिशु की तरह था, लेकिन आज तीसरे वर्ष में यह एक विशाल और ऐतिहासिक स्वरूप ले चुका है।"
- सांस्कृतिक महाकुंभ: 10 दिनों तक चलने वाले इस मेले के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्थानीय और बाहरी कलाकारों को 'प्रशस्ति पत्र' देकर सम्मानित किया जाएगा।
- जन-जन की भागीदारी: इस मेले की सफलता के लिए समाज के हर वर्ग—छात्र, नौजवान, किसान और मजदूरों—से सहयोग की अपील की गई है। आयोजकों का मानना है कि सामूहिक प्रयास से ही इसे राज्य का सबसे बड़ा शहीद मेला बनाया जा सकता है।
क्यों है यह मेला खास?
झारखंड में यह अपनी तरह का पहला ऐसा आयोजन है जो पूरी तरह से शहीदों की स्मृति को समर्पित है। मेले में बड़े-बड़े झूले, व्यापारिक स्टॉल और देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
"यह वीरों की धरती है और हमारा प्रयास है कि मेले के माध्यम से हम युवाओं को देश सेवा के प्रति प्रेरित कर सकें।"
— बटेश्वर प्रसाद मेहता, मुख्य संरक्षक
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