गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: रमजान, रामनवमी और सरहुल के संगम पर खतियानी परिवार ने दी बधाई
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| झारखंड में आपसी भाईचारे और त्योहारों के संगम पर संदेश देते खतियानी परिवार के सदस्य। |
हजारीबाग/झारखंड: भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती उसके पर्व-त्योहारों और आपसी सद्भाव में निहित है। वर्तमान समय में झारखंड का सामाजिक परिवेश भक्ति, उल्लास और लोकतांत्रिक जीत के अद्भुत संगम का गवाह बन रहा है। इसी कड़ी में 'खतियानी परिवार' के महासचिव मोहम्मद हकीम और जिला अध्यक्ष अशोक राम ने प्रदेशवासियों को आगामी त्योहारों और नगर निगम चुनाव के सुखद परिणामों पर बधाई संदेश प्रेषित किया है।
लोकतंत्र की मजबूती और नगर विकास की नई उम्मीद
हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम चुनाव के परिणामों पर हर्ष व्यक्त करते हुए मोहम्मद हकीम ने कहा कि जनता का फैसला लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करता है। नए महापौर (मेयर) और निर्वाचित पार्षदों से शहर के चहुंमुखी विकास और बेहतर भविष्य की उम्मीदें जगी हैं। खतियानी परिवार ने सभी नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को उनके उज्ज्वल कार्यकाल के लिए कोटि-कोटि शुभकामनाएं दी हैं।
इबादत, आस्था और रंगों का संगम
यह महीना आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक ओर जहां इस्लाम धर्मावलंबियों का पवित्र महीना 'रमजान' अपने समापन की ओर है, वहीं दूसरी ओर हिंदू भाइयों का उल्लास भरा 'होली' पर्व और मर्यादा का प्रतीक 'रामनवमी' का पावन महीना भी चल रहा है।
मोहम्मद हकीम ने जोर देकर कहा कि रमजान और रामनवमी का एक साथ आना आत्म-परीक्षण का एक बड़ा अवसर है। रमजान हमें ईमान, संयम और त्याग की शिक्षा देता है, तो रामनवमी का संदेश है कि 'दूसरों की भलाई से बड़ा कोई पुण्य नहीं है'। ये दोनों त्योहार समाज को सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने अपील की है कि करोड़ों हिंदू-मुस्लिम भाई आपसी मतभेद भुलाकर शांतिपूर्ण तरीके से इन पर्वों को संपन्न करें।
सरहुल: प्रकृति पर्व और आदिवासी अस्मिता की पहचान
झारखंड की माटी का सबसे प्रमुख त्योहार 'सरहुल' भी नजदीक है। जिला अध्यक्ष अशोक राम ने आदिवासी समाज को प्रकृति पर्व सरहुल की पूर्व संध्या पर बधाई दी। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन को भी विशेष रूप से शुभकामनाएं देते हुए 'जोहार झारखंड' का नारा बुलंद किया। सरहुल न केवल फूलों का त्योहार है, बल्कि यह जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संकल्प भी है।
निष्कर्ष
सांप्रदायिक सौहार्द और सांस्कृतिक विविधता ही झारखंड की असली पहचान है। खतियानी परिवार का यह संदेश समाज में एकता की नई मिसाल पेश करता है। त्योहारों का यह सीजन हमें यह सिखाता है कि विभिन्न मजहबों के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मंजिल मानवता की सेवा ही है।
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक झारखंड भारत।

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