हजारीबाग: मिशन अस्पताल पर लापरवाही और अवैध वसूली का आरोप, स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत
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| हजारीबाग स्थित मिशन अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन करते पीड़ित परिजन और स्थानीय ग्रामीण। |
हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित मिशन अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इलाज में घोर लापरवाही, मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली और दवाइयों के सिंडिकेट को लेकर पीड़ित परिवार ने मोर्चा खोल दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह और सिविल सर्जन से लिखित शिकायत कर अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की गई है।
नॉर्मल डिलीवरी के नाम पर 'सिजेरियन' का खेल
पीड़ित महिला नैना कुमारी के परिजनों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल द्वारा गुमराह किया गया। परिजनों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने पहले नॉर्मल डिलीवरी का भरोसा दिया, लेकिन बाद में जबरन बड़ा ऑपरेशन (सिजेरियन) कर दिया गया। आरोप है कि अस्पताल ने सिर्फ बिल बढ़ाने के उद्देश्य से मुसीबत की झूठी कहानी गढ़ी और प्रसूता को अनावश्यक रूप से आईसीयू (ICU) में भर्ती कर दिया।
दवाइयों का 'रिटर्न सिंडिकेट' और अवैध वसूली
परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यहाँ इलाज के नाम पर सिर्फ लूट मची है।
भारी भरकम बिल: ऑपरेशन और आईसीयू के नाम पर पीड़ित परिवार से 60,000 रुपये वसूले गए। डिस्चार्ज के समय भी अतिरिक्त 5,200 रुपये लिए गए।
दवाइयों का फर्जीवाड़ा: आरोप है कि डॉक्टर द्वारा दवाइयों की एक लंबी लिस्ट थमा दी जाती है। परिजनों द्वारा खरीदी गई महंगी दवाइयों को अस्पताल कर्मी चुपके से वापस मेडिकल स्टोर भेज देते हैं और उसका पैसा अस्पताल की जेब में जाता है।
हालत बिगड़ने पर डॉक्टर और स्टाफ हुए फरार
पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के मात्र दो दिन बाद ही नैना कुमारी के पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया। जब परिजन दोबारा शिकायत लेकर अस्पताल पहुँचे, तो प्रबंधन ने उपचार के नाम पर फिर से 50,000 रुपये जमा करने की मांग की। जब परिजनों ने विरोध किया और मामला तूल पकड़ने लगा, तो अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार हो गए।
आंदोलन की चेतावनी: युवा नेता गौतम कुमार ने संभाला मोर्चा
इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता गौतम कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मिशन अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और दोषी डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्यवाही नहीं की, तो हजारों की संख्या में महिला-पुरुष सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक झारखंड भारत
हजारीबाग: मिशन हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप, प्रसूता की स्थिति गंभीर; परिजनों का भारी हंगामा

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