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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग कुसुम्बा कांड: पुलिस की थ्योरी या 'साहित्यिक रचना'? DGP की प्रेस विज्ञप्ति पर उठे 10 तीखे सवाल

हजारीबाग कुसुम्बा कांड: पुलिस की थ्योरी या 'साहित्यिक रचना'? DGP की प्रेस विज्ञप्ति पर उठे 10 तीखे सवाल

क्या मासूम की रूह को इंसाफ मिलेगा? FIR के सूचक को ही अभियुक्त बनाने से लेकर 'प्री-मैच्योर बलि' के दावों तक, झारखंड पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हुए गंभीर सवाल।

हजारीबाग: जिले विष्णुगढ़ स्थित कुसुम्बा में हुई मासूम की नृशंस हत्या ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन, 1 अप्रैल 2026 की मध्य रात्रि को पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति ने न्याय की उम्मीदों पर कई सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इस विज्ञप्ति को 'साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन' के बजाय एक 'साहित्यिक कहानी' करार दिया जा रहा है।

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जांच रिपोर्ट की 5 बड़ी विसंगतियां:

सूचक ही हत्यारिन? पुलिस के अनुसार मृतका की मां रेशमी देवी ही हत्यारिन है और वही FIR की सूचक भी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सूचक ही अभियुक्त बन जाए, तो कोर्ट में केस को साबित करना लगभग असंभव होगा।

पंचांग और समय का फेर: विज्ञप्ति में अष्टमी की रात बलि की बात कही गई है, जबकि पंचांग के अनुसार हत्या की रात (24-25 मार्च) सप्तमी थी। क्या पुलिस ने कहानी बुनते समय तिथियों का मिलान भी नहीं किया?

भीम राम का रहस्य: आरोपी भीम राम का राजनीतिक संबंध और उसकी संलिप्तता की कहानी गले नहीं उतरती। कोई राह चलता व्यक्ति सिर्फ बुलाने पर गला घोंटने और सिर फोड़ने को कैसे तैयार हो सकता है?

SOP और फॉरेंसिक की अनदेखी: घटनास्थल को 9 दिनों तक असुरक्षित छोड़ना, फॉरेंसिक टीम की देरी और बिना DNA रिपोर्ट के बलात्कार की संभावना को नकारना, पॉक्सो (POCSO) इन्वेस्टिगेशन के नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

सुरक्षा या घेराबंदी? मृतका के परिजनों को सुरक्षा के नाम पर पुलिस घेरे में रखना, कहीं सच को मीडिया से छिपाने की कोशिश तो नहीं?

"इस अनुसंधान के जरिए बच्ची की दोबारा हत्या हुई है। यह पुलिसिया थ्योरी ट्रायल में टिक नहीं पाएगी और असली गुनहगार बच निकलेंगे। इसीलिए हम CBI जांच की मांग करते हैं।"

निष्कर्ष

संविधान के तीनों स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—की गरिमा इस केस के सटीक अनुसंधान पर टिकी है। यदि पुलिस की यह 'चंदा मामा' वाली कहानी सच की कसौटी पर फेल होती है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह न्याय की मशाल जलाए रखे।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक (न्यूज़ प्रहरी)

डुमरी विधायक जयराम महतो ने रिम्स पहुँचकर जाना मरीजों का हाल, बोले- 'इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं'

डुमरी विधायक जयराम महतो ने रिम्स पहुँचकर जाना मरीजों का हाल, बोले- 'इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं'
रिम्स अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार सुजीत कुमार का हालचाल जानते और परिजनों को सांत्वना देते डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो।

रांची/डुमरी: झारखंड की राजनीति में अपनी सक्रियता और जनसरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने एक बार फिर संवेदनशीलता का परिचय दिया है। विधायक जयराम महतो शुक्रवार को राजधानी रांची स्थित रिम्स (RIMS) अस्पताल पहुँचे, जहाँ उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से आए गंभीर मरीजों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य का जायजा लिया।

सुजीत कुमार की स्थिति देख भावुक हुए विधायक

विधायक के इस दौरे का मुख्य केंद्र डुमरी विधानसभा के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत नारायणपुर पंचायत के निवासी सुजीत कुमार रहे। सुजीत वर्तमान में रिम्स में जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। जयराम महतो ने सुजीत के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव आर्थिक व चिकित्सकीय सहयोग का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि "क्षेत्र की जनता मेरा परिवार है और उनके दुःख-दर्द में साथ खड़ा रहना ही मेरी पहली प्राथमिकता है।"

टुंडी विधानसभा के मरीजों से भी की मुलाकात

अपनी विधानसभा के साथ-साथ जयराम महतो ने टुंडी विधानसभा क्षेत्र से आए अन्य मरीजों से भी मुलाकात की। उन्होंने वार्डों में जाकर मरीजों का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीति से ऊपर उठकर मानवता की सेवा करना ही उनका मुख्य संकल्प है।

HOD को सख्त निर्देश: इलाज में न हो कोताही

मरीजों की शिकायतों और अस्पताल की व्यवस्थाओं को देखते हुए विधायक जयराम महतो ने संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों को स्पष्ट निर्देश दिया कि अस्पताल में भर्ती हर जरूरतमंद को उच्च स्तरीय उपचार मिलना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि "मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रिम्स राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल है, यहाँ गरीब जनता बड़े भरोसे के साथ आती है, उनके विश्वास को बनाए रखना प्रबंधन की जिम्मेदारी है।"

सोशल मीडिया पर साझा किया अपना संकल्प

विधायक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से जनता को संबोधित करते हुए लिखा कि उनका संकल्प हर जरूरतमंद तक मदद पहुँचाना है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और मरीजों को सम्मानजनक उपचार दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

निष्कर्ष

झारखंड के युवाओं के बीच लोकप्रिय जयराम महतो का यह दौरा न केवल प्रशासनिक कसावट लाने की कोशिश है, बल्कि उन गरीब परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण भी है जो महंगे इलाज के अभाव में बेबस महसूस करते हैं। अब देखना यह है कि विधायक के निर्देशों के बाद रिम्स प्रबंधन सुजीत कुमार और अन्य मरीजों के उपचार में कितनी तेजी लाता है।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक झारखंड, भारत।

और पढ़ें: झारखंड विधानसभा में गूँजी 'जल-जंगल-जमीन' की हुंकार: विधायक जयराम महतो ने भूमि अधिग्रहण और आरक्षण पर सरकार को घेरा

हजारीबाग: मिशन अस्पताल पर लापरवाही और अवैध वसूली का आरोप, स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत

हजारीबाग: मिशन अस्पताल पर लापरवाही और अवैध वसूली का आरोप, स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत
हजारीबाग स्थित मिशन अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन करते पीड़ित परिजन और स्थानीय ग्रामीण।

हजारीबाग। झारखंड के हजारीबाग जिले में स्थित मिशन अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इलाज में घोर लापरवाही, मरीजों के परिजनों से अवैध वसूली और दवाइयों के सिंडिकेट को लेकर पीड़ित परिवार ने मोर्चा खोल दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह और सिविल सर्जन से लिखित शिकायत कर अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने की मांग की गई है।

नॉर्मल डिलीवरी के नाम पर 'सिजेरियन' का खेल

पीड़ित महिला नैना कुमारी के परिजनों का आरोप है कि उन्हें अस्पताल द्वारा गुमराह किया गया। परिजनों के अनुसार, अस्पताल प्रशासन ने पहले नॉर्मल डिलीवरी का भरोसा दिया, लेकिन बाद में जबरन बड़ा ऑपरेशन (सिजेरियन) कर दिया गया। आरोप है कि अस्पताल ने सिर्फ बिल बढ़ाने के उद्देश्य से मुसीबत की झूठी कहानी गढ़ी और प्रसूता को अनावश्यक रूप से आईसीयू (ICU) में भर्ती कर दिया।

दवाइयों का 'रिटर्न सिंडिकेट' और अवैध वसूली

परिजनों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यहाँ इलाज के नाम पर सिर्फ लूट मची है।

भारी भरकम बिल: ऑपरेशन और आईसीयू के नाम पर पीड़ित परिवार से 60,000 रुपये वसूले गए। डिस्चार्ज के समय भी अतिरिक्त 5,200 रुपये लिए गए।

दवाइयों का फर्जीवाड़ा: आरोप है कि डॉक्टर द्वारा दवाइयों की एक लंबी लिस्ट थमा दी जाती है। परिजनों द्वारा खरीदी गई महंगी दवाइयों को अस्पताल कर्मी चुपके से वापस मेडिकल स्टोर भेज देते हैं और उसका पैसा अस्पताल की जेब में जाता है।

हालत बिगड़ने पर डॉक्टर और स्टाफ हुए फरार

पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के मात्र दो दिन बाद ही नैना कुमारी के पेट में असहनीय दर्द शुरू हो गया। जब परिजन दोबारा शिकायत लेकर अस्पताल पहुँचे, तो प्रबंधन ने उपचार के नाम पर फिर से 50,000 रुपये जमा करने की मांग की। जब परिजनों ने विरोध किया और मामला तूल पकड़ने लगा, तो अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ मौके से फरार हो गए।

आंदोलन की चेतावनी: युवा नेता गौतम कुमार ने संभाला मोर्चा

इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता गौतम कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि मिशन अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और दोषी डॉक्टरों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्यवाही नहीं की, तो हजारों की संख्या में महिला-पुरुष सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक झारखंड भारत

हजारीबाग: मिशन हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप, प्रसूता की स्थिति गंभीर; परिजनों का भारी हंगामा

हजारीबाग: रामनवमी, ईद और सरहुल पर्व पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम; प्रशासन ने निकाला फ्लैग मार्च

हजारीबाग: रामनवमी, ईद और सरहुल पर्व पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम; प्रशासन ने निकाला फ्लैग मार्च

Naresh Soni Editor in Chief 
"हजारीबाग के झंडा चौक पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते प्रशासनिक अधिकारी एवं फ्लैग मार्च में शामिल पुलिस बल।"

हजारीबाग (झारखंड): झारखंड के ऐतिहासिक शहर हजारीबाग में आगामी त्योहारों—रामनवमी, ईद-उल-फितर और सरहुल—को लेकर प्रशासनिक सरगर्मी तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति संख्या 154/17.03.2026 के अनुसार, जिले में शांति और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंडाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के साथ-साथ व्यापक सुरक्षा खाका तैयार किया गया है।

प्रशासनिक तैयारियों का ब्लूप्रिंट

त्योहारों के दौरान आम जनमानस को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने कई चरणों में शांति समिति और विभिन्न अखाड़ा समितियों के साथ बैठकें की हैं। नगर निगम क्षेत्र के सभी वार्डों सहित कटकमदाग, मुफ्फसिल और पेलावल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष पुलिस बल और दंडाधिकारियों को तैनात किया गया है।

इन पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जमीन पर उतरकर अखाड़ा अध्यक्षों, सचिवों और सद्भावना विकास मंच के प्रतिनिधियों के साथ सीधा संवाद स्थापित करें। प्रशासन का मुख्य फोकस जुलूस मार्गों की सुगमता, बिजली के झूलते तारों की मरम्मत और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

जुलूस मार्गों का निरीक्षण और फ्लैग मार्च

मंगला जुलूस और रामनवमी को देखते हुए प्रशासन ने अपनी शक्ति और सतर्कता का प्रदर्शन किया। सीसीआर (CCR) से शुरू हुई पेट्रोलिंग ने शहर के प्रमुख रास्तों जैसे पुलिस लाइन, पगमिल, सलगांवा, सुल्ताना, खिरगांव, झंडा चौक और बड़ा बाजार का गहन निरीक्षण किया।

सबसे महत्वपूर्ण रहा झंडा चौक से मालवीय मार्ग तक निकाला गया फ्लैग मार्च। इस मार्च के जरिए प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया और उपद्रवियों को कड़ा संदेश दिया। पेट्रोलिंग के दौरान अधिकारियों ने रास्तों की संवेदनशीलता और सुरक्षा घेरे का आकलन किया ताकि जुलूस के समय कोई व्यवधान न आए।

सोशल मीडिया और अफवाहों पर नजर

डिजिटल युग में शांति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट डालने वालों के खिलाफ साइबर सेल सक्रिय है। शांति समिति की बैठकों के माध्यम से मोहल्ला स्तर पर 'वॉलिंटियर्स' को सक्रिय किया गया है जो किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को देंगे।

मौके पर मौजूद रहे आला अधिकारी

सुरक्षा व्यवस्था की कमान खुद वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाल रखी है। फ्लैग मार्च और निरीक्षण के दौरान सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडेय, अपर समाहर्ता  संतोष सिंह, सहायक समाहर्ता  आनंद शर्मा समेत जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी और डीपीआरओ रोहित कुमार जैसे प्रमुख अधिकारी मौजूद रहे।

निष्कर्ष: नागरिक सहयोग की अपील

हजारीबाग प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए हर्षोल्लास के साथ त्योहार मनाएं। प्रशासन की यह मुस्तैदी दर्शाती है कि हजारीबाग इस बार भाईचारे और शांति की एक मिसाल पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

झारखंड विधानसभा में गूँजी 'जल-जंगल-जमीन' की हुंकार: विधायक जयराम महतो ने भूमि अधिग्रहण और आरक्षण पर सरकार को घेरा

झारखंड विधानसभा में गूँजी 'जल-जंगल-जमीन' की हुंकार: विधायक जयराम महतो ने भूमि अधिग्रहण और आरक्षण पर सरकार को घेरा

सम्पादकीय 
Dumri Vidhayak Jairam Kumar Mahto 

Ranchi: झारखंड विधानसभा का बजट सत्र आज उस समय गरमा गया जब डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन में राज्य के मूल निवासियों के अस्तित्व, जमीन की लूट और समुदायों के आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। जयराम महतो ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में ऐतिहासिक संदर्भों के साथ वर्तमान सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल दागे।

जमीन नहीं, आत्मा बसती है खेतों में: जयराम महतो

विधायक महतो ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड के लोगों की आत्मा उनकी जमीन और खेतों में बसती है। उन्होंने 1769 के चुहाड़ आंदोलन और रघुनाथ महतो के बलिदान का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ के पूर्वजों ने अंग्रेजों से अपनी माटी बचाने के लिए सैकड़ों लड़ाइयाँ लड़ीं। उन्होंने 1837 के विल्किन्सन कानून, 1908 के CNT एक्ट और 1949 के SPT एक्ट की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि ये कानून झारखंडियों की सुरक्षा के कवच थे, लेकिन आज आज़ाद भारत में इनका उल्लंघन चिंताजनक है।

भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर उठाए गंभीर सवाल

सदन में चर्चा के दौरान जयराम महतो ने देवघर एयरपोर्ट और अन्य परियोजनाओं के लिए हुए भूमि अधिग्रहण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून (धारा 26) के बावजूद, किसानों को बाजार मूल्य (Market Rate) के बजाय पुराने उत्पादन आधारित फॉर्मूले से मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने दुमका और देवघर के उदाहरण देते हुए कहा कि माननीय उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अधिकारी किसानों का हक मार रहे हैं।

कुड़मी और केवट समाज के आरक्षण की पुरजोर वकालत

जयराम महतो ने ऐतिहासिक तथ्यों के साथ कुड़मी (महतो) और केवट (मल्लाह, निषाद) समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची में शामिल करने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि 1872 से 1931 तक की जनगणना में कुड़मी समाज को 'एबोरिजिनल' (Aborigines) माना गया था, लेकिन 1950 में बिना किसी सूचना के उन्हें इस सूची से बाहर कर दिया गया। उन्होंने सरकार से मांग की कि टीआरआई (TRI) से दोबारा एथनोग्राफिक रिपोर्ट तैयार कराकर केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी जाए।

1932 खतियान और स्थानीय नीति पर स्पष्ट रुख

विधायक ने 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति को लेकर सरकार को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि 25 सालों के बाद भी राज्य की अपनी कोई ठोस स्थानीय नीति नहीं है, जिसके कारण बाहरी राज्यों के लोग यहाँ के हक-अधिकारों पर अतिक्रमण कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि "स्थानीयता का मतलब किसी को राज्य से बाहर निकालना नहीं, बल्कि सरकारी सुविधाओं और नौकरियों में राज्य के मूल निवासियों को प्राथमिकता देना है।"

सचिवालय की कार्यशैली और तकनीक पर प्रहार

महतो ने सूचना प्रौद्योगिकी के युग में सरकारी अधिकारियों की उदासीनता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जहाँ मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, वहीं राज्य के अधिकांश सचिव और प्रधान सचिव जनता की शिकायतों के प्रति असंवेदनशील हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारियों को भी सोशल मीडिया और तकनीक के माध्यम से जनता से सीधे जुड़ना चाहिए।

झारखंड विधानसभा में गूंजी अधिवक्ताओं की आवाज: विधायक प्रदीप प्रसाद ने की 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की मांग

झारखंड विधानसभा में गूंजी अधिवक्ताओं की आवाज: विधायक प्रदीप प्रसाद ने की 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की मांग

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड।
हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद झारखंड विधानसभा में अधिवक्ताओं के हितों और सुरक्षा पर अपना पक्ष रखते हुए।

रांची/हजारीबाग: झारखंड विधानसभा के वर्तमान सत्र में हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने अधिवक्ताओं के मान-सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने राज्य सरकार से पुरजोर मांग की कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' (अधिवक्ता संरक्षण कानून) को जल्द से जल्द लागू किया जाए।


न्याय की कड़ी को चाहिए सुरक्षा का कवच

सदन को संबोधित करते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि अधिवक्ता न्यायपालिका का एक अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब देश के कई अन्य राज्यों में यह कानून लागू हो चुका है, तो झारखंड में देरी क्यों? उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के आने से अधिवक्ताओं को भयमुक्त वातावरण में काम करने की शक्ति मिलेगी।

हजारीबाग बार एसोसिएशन के विकास पर विशेष जोर

विधायक ने केवल कानून ही नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं की कार्य-स्थितियों (Working Conditions) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने ऐतिहासिक हजारीबाग बार एसोसिएशन का उदाहरण देते हुए कहा कि यहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्य के सभी बार एसोसिएशनों में लाइब्रेरी, बैठने की व्यवस्था और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाए ताकि अधिवक्ताओं को गरिमापूर्ण माहौल मिल सके।

हजारीबाग: डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी शुरू, अधिकारियों को दिया जा रहा है विशेष प्रशिक्षण

हजारीबाग: डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी शुरू, अधिकारियों को दिया जा रहा है विशेष प्रशिक्षण

नरेश सोनी विशेष संवाददाता झारखंड 
"Census 2027 Hazaribagh Training"

हजारीबाग: भारत की आगामी जनगणना 2027 को त्रुटिमुक्त और पारदर्शी बनाने के लिए हजारीबाग जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। शुक्रवार को जबरा स्थित प्रमंडलीय पंचायत प्रशिक्षण संस्थान में तीन दिवसीय जिला एवं प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।

डिजिटल डेटा पर विशेष जोर

इस बार की जनगणना में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी (सदर एवं बरही) और सहायक समाहर्ता ने संयुक्त रूप से बताया कि इस बार डेटा संकलन के लिए डिजिटल उपकरणों का प्रयोग होगा। इसका मुख्य उद्देश्य जनगणना की प्रक्रिया को सटीक बनाना है, क्योंकि इसी डेटा के आधार पर भविष्य की सरकारी योजनाओं का खाका तैयार होता है।

तीन दिनों तक चलेगा सत्र

13 मार्च से 15 मार्च तक चलने वाले इस शिविर में मास्टर ट्रेनर्स द्वारा प्रखंड सांख्यिकी पदाधिकारियों और तकनीकी सहायकों को डेटा मैनेजमेंट और फील्ड वर्क की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विकास योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए सटीक जनगणना अनिवार्य है, इसलिए प्रशिक्षण में किसी भी प्रकार की कोताही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। 

हजारीबाग में सनसनी: 15 वर्षीय छात्रा का अपहरण, 5 लाख की फिरौती और जान से मारने की धमकी; मुख्य आरोपी पर 50 हजार का इनाम घोषित


हजारीबाग में सनसनी- 15 वर्षीय छात्रा का अपहरण, 5 लाख की फिरौती और जान से मारने की धमकी; मुख्य आरोपी पर 50 हजार का इनाम घोषित


हजारीबाग (झारखंड): जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पुलिस प्रशासन और स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है।  एक 15 वर्षीय नाबालिग छात्रा के अपहरण और फिरौती की मांग ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 9 फरवरी 2026 की है। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र निवासी एजाज नय्यर की नाबालिग पुत्री को बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया। परिजनों का आरोप है कि अपहरण के बाद आरोपियों ने फोन कर 5 लाख रुपये (₹5,00,000) की फिरौती मांगी है। इतना ही नहीं, पैसे न देने की स्थिति में बच्ची को जान से मारने की धमकी भी दी गई है।

बिहार से जुड़े हैं तार, एक सहयोगी गिरफ्तार
"मुख्य आरोपी मोहम्मद नौशाद"


जांच में यह बात सामने आई है कि इस अपहरण कांड के तार बिहार के गया जिले से जुड़े हैं। मुख्य आरोपी की पहचान मोहम्मद नौशाद (निवासी: ग्राम शर्मा, थाना बाराचट्टी, जिला गया, बिहार) के रूप में हुई है।

इस साजिश में स्थानीय स्तर पर मदद करने वाले एक आरोपी, मोहम्मद सय्यद (निवासी: मुफ्फसिल थाना क्षेत्र हजारीबाग) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सय्यद ने ही नाबालिग को हजारीबाग बस स्टैंड तक पहुँचाने में मदद की थी, जहाँ से मुख्य आरोपी नौशाद उसे अपने साथ ले गया।

पुलिस अधीक्षक (SP) से न्याय की गुहार

पीड़िता के पिता ने हजारीबाग एसपी को लिखित आवेदन देकर अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद उनकी बेटी का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। परिजनों के पास धमकी भरे संदेशों और कॉल के स्क्रीनशॉट भी मौजूद हैं, जो आरोपियों की संलिप्तता को साबित करते हैं। परिवार का कहना है कि बच्ची नाबालिग है और उसकी जान को गंभीर खतरा है।

इनाम की घोषणा: सूचना देने वाले को मिलेंगे ₹50,000

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य आरोपी मोहम्मद नौशाद फिलहाल फरार चल रहा है। पीड़ित परिवार ने घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति मुख्य आरोपी के ठिकाने की सटीक सूचना देगा, उसे ₹50,000 (पचास हजार रुपये) का नकद इनाम दिया जाएगा। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले का नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। Mob. No 9162448426, 6207084145 पर सम्पर्क करें।

पुलिस की छापेमारी जारी

हजारीबाग पुलिस की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही है। बिहार और झारखंड के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को भी इस संबंध में कोई जानकारी मिले, तो वे तुरंत नजदीकी थाने को सूचित करें।

हजारीबाग वार्ड नंबर 7 में बजेगी बदलाव की घंटी? प्रत्याशी नीरज गुप्ता ने खोला चुनावी कार्यालय, गिनाईं क्षेत्र की समस्याएं और अपना विजन

हजारीबाग वार्ड नंबर 7 में बजेगी बदलाव की घंटी? प्रत्याशी नीरज गुप्ता ने खोला चुनावी कार्यालय, गिनाईं क्षेत्र की समस्याएं और अपना विजन

हजारीबाग

नगर निगम चुनाव की सरगर्मियों के बीच हजारीबाग के वार्ड नंबर 7 में चुनावी पारा चढ़ने लगा है। वार्ड नंबर 7 से पार्षद पद के प्रबल दावेदार और समाजसेवा में लंबा अनुभव रखने वाले नीरज कुमार गुप्ता ने विधिवत अपने चुनावी कार्यालय का उद्घाटन किया। बाबूगांव मल्टी के पास स्थित इस कार्यालय का उद्देश्य वार्ड वासियों के लिए एक सुलभ संपर्क केंद्र बनना है, जहां वे अपनी समस्याएं सीधे साझा कर सकें।

कार्यालय उद्घाटन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए नीरज गुप्ता ने वर्तमान व्यवस्था और पिछले दस सालों के कार्यकाल पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि वार्ड नंबर 7 में बदलाव की लहर दौड़ रही है क्योंकि जनता पिछले एक दशक की निष्क्रियता से त्रस्त हो चुकी है। निवर्तमान पार्षद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि दस साल मौका मिलने के बावजूद वार्ड में एक भी ढंग का काम नहीं हुआ। उन्होंने अपने कार्यालय के सामने की जर्जर सड़क की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब मुख्य रास्ते का यह हाल है, जहां धूल के गुबार से लोग परेशान हैं, तो गलियों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

नीरज गुप्ता ने वार्ड की मूलभूत समस्याओं जैसे नाली, गली, सड़क, बिजली और पानी की बदहाली को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता बाबूगांव शिव मंदिर से लेकर मटवारी तालाब तक एक सुव्यवस्थित नाली का निर्माण कराना है, जिससे जलजमाव की समस्या खत्म हो सके। साथ ही, भु


ईया टोली और इमली चौक से नूरी मस्जिद तक बहते गंदे पानी और टूटे चेम्बरों की मरम्मत उनका मुख्य एजेंडा होगा।

जल संकट को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने कृष्णापुरी तालाब और मटवारी तालाब के जीर्णोद्धार का विजन रखा। उनका मानना है कि तालाबों का गहरीकरण और सुंदरीकरण न केवल जलस्तर को बढ़ाएगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पानी की किल्लत से भी बचाएगा।

भ्रष्टाचार मुक्त वार्ड बनाने का संकल्प लेते हुए नीरज गुप्ता ने एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें मौका देती है, तो आवास योजना, राशन कार्ड या किसी भी सरकारी लाभ में एक रुपये का भी भ्रष्टाचार नहीं होने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वार्ड के दस वरिष्ठ और प्रबुद्ध नागरिकों की एक निगरानी समिति बनाएंगे और जो भी फंड आएगा, वह इसी समिति की देखरेख में पारदर्शी तरीके से खर्च होगा।

अपनी 16 वर्षों की समाजसेवा का हवाला देते हुए उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस बार बदलाव के लिए वोट करें। उनका कहना था कि वे जीतने के बाद कुर्सी पर नहीं बैठेंगे बल्कि हर नागरिक के घर जाकर सेवा देंगे। जनता से एक मौका मांगते हुए उन्होंने विश्वास दिलाया कि वार्ड नंबर 7 की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने के लिए वे तत्पर हैं।

झारखंड: ‘जान देंगे पर जमीन नहीं’ – अडानी के खिलाफ गोंदलपुरा में महासंग्राम, 12 फरवरी के भारत बंद को खतियानी परिवार का खुला समर्थन

 झारखंड: ‘जान देंगे पर जमीन नहीं’ – अडानी के खिलाफ गोंदलपुरा में महासंग्राम, 12 फरवरी के भारत बंद को खतियानी परिवार का खुला समर्थन

हजारीबाग (विशेष संवाददाता):

झारखंड के हजारीबाग जिले में जल, जंगल और जमीन की लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गई है। बड़कागांव प्रखंड के गोंदलपुरा में अडानी ग्रुप के प्रस्तावित कोल खनन प्रोजेक्ट के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस बीच, खतियानी परिवार ने न केवल इस स्थानीय आंदोलन को धार दी है, बल्कि केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी, 2026 को बुलाए गए ‘संपूर्ण भारत बंद’ का भी पुरजोर समर्थन किया है।
'जान देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे' 
"हजारीबाग में बैठक करते खतियानी परिवार के सदस्य और गोंदलपुरा में अपनी जमीन बचाने के लिए लामबंद ग्रामीण।"


खतियानी परिवार की साप्ताहिक बैठक पुराना धरना स्थल के पास केंद्रीय अध्यक्ष बाबू भाई विद्रोही की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में केंद्रीय महासचिव मो. हकीम ने अडानी ग्रुप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि गोंदलपुरा पंचायत के बुजुर्गों, नौजवानों और महिलाओं ने अपनी मिट्टी बचाने की जो कसम खाई है, वह ऐतिहासिक है।

ग्रामीणों का स्पष्ट नारा है— "जान देंगे लेकिन जमीन नहीं देंगे।" मो. हकीम ने कहा कि जिस तरह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर देश को आजाद कराया था, ठीक उसी तरह गोंदलपुरा के किसान पिछले तीन वर्षों से अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि कंपनी के "काले चिट्ठे" अब उजागर हो चुके हैं।

पैसा, प्रशासन और बाहरी घुसपैठ का आरोप

बैठक में यह गंभीर आरोप लगाया गया कि कंपनी पैसे के बल पर ग्रामीणों की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। खतियानी परिवार का कहना है कि प्रशासन कंपनी के पक्ष में खड़ा होकर ग्रामीणों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर रहा है ताकि आंदोलन को कमजोर किया जा सके।

मो. हकीम ने दावा किया, "कंपनी अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए भोले-भाले बाहरी लोगों को बुलाकर ग्रामीणों से भिड़वा रही है, जिसे प्रशासन 'निजी आंदोलन' बताकर पल्ला झाड़ लेता है। हम ऐसे जनविरोधी हथकंडों का पुरजोर विरोध करते हैं।" संगठन ने मांग की है कि 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून का पालन हो और अडानी का कॉल ब्लॉक तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।

12 फरवरी को भारत बंद का ऐलान

स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ खतियानी परिवार ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी आवाज बुलंद की है। संगठन के जिला अध्यक्ष अशोक राम ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घोषणा की है कि 12 फरवरी, 2026 को संयुक्त मोर्चा द्वारा आहूत ‘संपूर्ण भारत बंद’ को उनका संगठन पूर्ण समर्थन देगा।

अशोक राम ने कहा, "केंद्र सरकार की किसान और मजदूर विरोधी नीतियों और अंधाधुंध निजीकरण के खिलाफ यह बंदी बुलाई गई है। हजारीबाग में खतियानी परिवार इस बंदी को सफल बनाने के लिए सड़क पर उतरेगा।"

ये रहे उपस्थित

इस महत्वपूर्ण बैठक और रणनीति निर्माण में मुख्य रूप से राम अवतार भगत, डॉ. तनवीर अख्तर, मेघनाथ मेहता, मो. आशिक, महेश विश्वकर्मा, मो. फखरुद्दीन, अशरफ अली, शोएब अंसारी, अमर कुमार गुप्ता, अली जान मियां और बिंदु देवी सहित कई अन्य सक्रिय सदस्य मौजूद रहे।


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