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Editor: Naresh Prasad Soni
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गुरनाम भुल्लर की फिल्म इश्कां दे लेखे ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, तीसरे हफ्ते में भी कायम है जबरदस्त रफ्तार

गुरनाम भुल्लर की फिल्म 'इश्कां दे लेखे' ने तीसरे हफ्ते भी बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया है। जानें कैसे हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर ने इस फिल्म को बनाया ब्
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गुरनाम भुल्लर की फिल्म इश्कां दे लेखे ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, तीसरे हफ्ते में भी कायम है जबरदस्त रफ्तार

नई दिल्ली: पंजाबी सिनेमा के चमकते सितारे गुरनाम भुल्लर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर कहानी में दम हो और भावनाएं सच्ची हों, तो फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनने से कोई नहीं रोक सकता। उनकी नवीनतम फिल्म 'इश्कां दे लेखे' ने बॉक्स ऑफिस पर अपने प्रदर्शन से न केवल आलोचकों को चौंका दिया है, बल्कि व्यापार विश्लेषकों को भी नए आंकड़े लिखने पर मजबूर कर दिया है। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि कोई भी फिल्म रिलीज के दूसरे हफ्ते के बाद धीमी पड़ने लगती है, लेकिन इस फिल्म के मामले में कहानी बिल्कुल उलट नजर आ रही है। रिलीज के तीसरे हफ्ते में भी इस फिल्म ने अपनी पकड़ बेहद मजबूत बनाए रखी है, जो इसकी सफलता की असल कहानी बयां करती है।

अभिनेता गुरनाम भुल्लर और ईशा मालवीय अपनी फिल्म 'इश्कां दे लेखे' की सफलता का जश्न मनाते हुए।

दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों पर नजर डालें तो 'इश्कां दे लेखे' ने अब तक कुल 20.5 करोड़ रुपये का शानदार ग्रॉस कलेक्शन कर लिया है। यह आंकड़ा एक क्षेत्रीय फिल्म के लिए बहुत मायने रखता है, विशेषकर तब जब फिल्म किसी बड़े फ्रेंचाइजी का हिस्सा न होकर एक मौलिक और भावुक प्रेम कहानी पर आधारित हो। भारत में इस फिल्म ने अब तक 11.75 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है। तीसरे हफ्ते के शुरुआती छह दिनों में फिल्म ने भारतीय बाजार से 1.50 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह हफ्ता खत्म होते-होते फिल्म 1.75 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लेगी। केवल भारत ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी गुरनाम भुल्लर का जादू सिर चढ़कर बोल रहा है, जहां फिल्म ने 7 लाख अमेरिकी डॉलर की कमाई कर अपनी अंतरराष्ट्रीय साख मजबूत की है।

इस फिल्म की सफलता का सबसे दिलचस्प पहलू इसका क्षेत्रीय विस्तार है। आमतौर पर पंजाबी फिल्मों का मुख्य कारोबार पंजाब और चुनिंदा विदेशी बाजारों तक सीमित रहता है, लेकिन 'इश्कां दे लेखे' ने इस पुरानी धारणा को तोड़ दिया है। इस बार फिल्म की सफलता का बड़ा श्रेय हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के क्षेत्रों को जाता है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि दूसरे हफ्ते में फिल्म की कुल कमाई का केवल 35 प्रतिशत हिस्सा पंजाब से आया था, जबकि हरियाणा एक सशक्त गढ़ के रूप में उभरकर सामने आया। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों ने महज दो हफ्तों के भीतर 80 लाख रुपये का नेट कलेक्शन देकर फिल्म की व्यावसायिक सफलता में बड़ी भूमिका निभाई है। इसके अलावा दिल्ली, नोएडा और जयपुर जैसे शहरों में भी दर्शकों की भारी भीड़ देखी गई, जो यह संकेत देती है कि फिल्म की अपील केवल पंजाबी भाषी लोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि गैर-पंजाबी दर्शकों ने भी इसकी भावुक कहानी को दिल से लगाया है।

6 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली इस फिल्म का निर्देशन मनवीर बरार ने किया है और इसकी संवेदनशील पटकथा जस्सी लोहका ने लिखी है। गुरनाम भुल्लर और ईशा मालवीय की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म का निर्माण डायमंडस्टार वर्ल्डवाइड और गुरजस्सक प्रोडक्शंस के बैनर तले किया गया है। यह फिल्म एक ऐसी दुखद प्रेम कहानी है जो दर्शकों के दिलों को झकझोर देती है। इसमें दिल टूटने, लंबे इंतजार और प्यार के प्रति जुनून को इतनी खूबसूरती से पिरोया गया है कि दर्शक खुद को किरदारों के साथ जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। ट्रेजेडी रोमांस का यह फॉर्मूला फिल्म के लिए वरदान साबित हुआ है, जिसने दर्शकों को शुरुआती सप्ताहांत के बहुत बाद तक भी सिनेमाघरों की ओर आकर्षित किया। गुरनाम भुल्लर पहले से ही अपनी रोमांटिक छवि के लिए मशहूर रहे हैं, और इस फिल्म की सफलता ने उनके करियर ग्राफ को एक नई ऊंचाई प्रदान की है।

गुरनाम भुल्लर के फिल्मी सफर को देखें तो उन्होंने हमेशा से ही संगीत प्रधान और भावुक प्रेम कहानियों को प्राथमिकता दी है। साल 2022 में आई उनकी फिल्म 'सोहरेयां दा पिंड आ गया' में भी उनकी और सरगुन मेहता की केमिस्ट्री को काफी पसंद किया गया था। वह फिल्म सिनेमाघरों के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर भी सफल रही थी, जिससे उनकी लोकप्रियता में इजाफा हुआ था। अब 'इश्कां दे लेखे' की इस जबरदस्त सफलता ने उनके साल 2026 के आने वाले प्रोजेक्ट्स के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर दिया है। उनकी अगली फिल्म 'लड्डू' पहले से ही चर्चा में है और वर्तमान सफलता को देखते हुए दर्शकों में उस फिल्म को लेकर उत्सुकता कई गुना बढ़ गई है। यह फिल्म न केवल उनके करियर को गति दे रही है, बल्कि पंजाबी सिनेमा की व्यावसायिक क्षमता को भी नए सिरे से परिभाषित कर रही है।

गूगल एडसेंस की शर्तों और हाई क्वालिटी कंटेंट की दृष्टि से देखें तो ऐसी फिल्मों की सफलता यह दर्शाती है कि दर्शक अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कहानी में गहराई और नयापन तलाश रहे हैं। फिल्म के तकनीकी पक्ष और इसके संगीत ने भी युवाओं को अपनी ओर खींचा है। सिनेमा विशेषज्ञों का मानना है कि 'इश्कां दे लेखे' जैसी फिल्मों की सफलता से क्षेत्रीय सिनेमा को नई दिशा मिलेगी और निर्माता अब केवल पारंपरिक बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय अन्य राज्यों में भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश करेंगे। यह फिल्म एक मिसाल है कि कैसे एक मध्यम बजट की फिल्म अपनी मजबूत पटकथा और भावनात्मक जुड़ाव के दम पर बड़े बजट की फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर कड़ी टक्कर दे सकती है।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म का लाइफटाइम कलेक्शन कहां जाकर रुकता है। फिलहाल, जिस तरह से दर्शकों का प्यार मिल रहा है, उससे यह साफ है कि गुरनाम भुल्लर की यह फिल्म लंबे समय तक सिनेमाघरों में टिकी रहेगी। फिल्म के वितरण और मार्केटिंग की रणनीति ने भी इसकी सफलता में अहम भूमिका निभाई है, जिससे फिल्म को सही समय पर सही दर्शकों तक पहुंचाया जा सका। 'न्यूज़ प्रहरी' की इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से हमने यह समझने की कोशिश की है कि किस तरह एक क्षेत्रीय फिल्म राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है।

Naresh Soni Editor in Chief.

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