हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने विधानसभा में बुलंद की जनता की आवाज: मंगला जुलूस और बिजली संकट पर सरकार को घेरा
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| झारखंड विधानसभा के बाहर मीडिया को संबोधित करते हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद। |
मंगला जुलूस: 'क्या झारखंड में त्योहार मनाना अब अपराध है?
विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन में शून्यकाल के दौरान हजारीबाग के मंगला जुलूस का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की कथित अनदेखी की जा रही है। उन्होंने तर्क दिया कि हजारीबाग की परंपरा और संस्कृति में मंगला जुलूस का गहरा महत्व है। शांतिपूर्ण और पारंपरिक आयोजनों पर बार-बार प्रतिबंध लगाना यह दर्शाता है कि प्रशासन स्थिति को संभालने के बजाय जनभावनाओं को दबाने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए पूछा, "क्या अब झारखंड में त्योहार मनाना भी मुश्किल हो गया है? आखिर ऐसी स्थिति केवल हजारीबाग में ही क्यों पैदा की जा रही है?" उन्होंने मांग की कि सरकार तुष्टीकरण और डर की राजनीति छोड़, धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करे।
अंधेरे में डूबा हजारीबाग: बिजली कटौती पर तीखे सवाल
धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ विधायक ने हजारीबाग की चरमराई विद्युत व्यवस्था पर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार राज्य के विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर त्योहारों के समय हजारीबाग में भारी बिजली कटौती की जाती है।
विधायक ने प्रमुखता से निम्नलिखित मांगें रखीं
निर्बाध आपूर्ति: पर्व-त्योहारों के दौरान 24 घंटे बिजली सुनिश्चित की जाए।
दीर्घकालिक समाधान: केवल अस्थायी सुधार के बजाय विद्युत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ठोस कार्ययोजना बने।
जवाबदेही तय हो: बार-बार होने वाली ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बिजली की कमी से न केवल आम नागरिक परेशान हैं, बल्कि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों का व्यवसाय भी चौपट हो रहा है, जो साल भर इन त्योहारों का इंतजार करते हैं।
सदन से सड़क तक संघर्ष का संकल्प
प्रदीप प्रसाद ने सदन के माध्यम से हजारीबाग की जनता को आश्वस्त किया कि वे उनके हक की लड़ाई कमजोर नहीं पड़ने देंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि है और यदि सरकार ने इन समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं निकाला, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधायक द्वारा उठाए गए ये मुद्दे आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति को और गरमा सकते हैं, क्योंकि ये सीधे तौर पर जनता की आस्था और बुनियादी जरूरतों से जुड़े हैं।
Naresh Soni
Editor in Chief Jharkhand India

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