सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के 'स्तंभ' आचार्य शैलेंद्र सिंह की भावुक विदाई, 34 वर्षों का सफर संपन्न
"शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता", वरिष्ठ आचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में मिली भावुक विदाई।
34 वर्षों की निष्ठापूर्ण सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए शैलेंद्र सिंह; विद्यालय प्रबंधन और सहयोगियों ने अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर किया सम्मानित।
हजारीबाग: शहर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, मालवीय मार्ग में एक युग का समापन हुआ। विद्यालय के स्थापना काल से जुड़े वरिष्ठ आचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह की सेवानिवृत्ति के अवसर पर आयोजित "स्नेह मिलन" कार्यक्रम में पूरा विद्यालय परिवार भावुक नजर आया। 1992 से निरंतर शिक्षा की अलख जगाने वाले श्री सिंह को उनके समर्पण और अनुशासन के लिए याद किया गया।
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| हजारीबाग सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह का सम्मान समारोह। |
भव्य 'स्नेह मिलन' और दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति के सचिव ज्ञानचंद प्रसाद मेहता, सदस्य लाल दास चौधरी, अशोक कुमार मल्लिक, बबीता कुमारी, ऋचा प्रिया सिन्हा और प्रधानाचार्य संजीव कुमार झा ने संयुक्त रूप से किया। भारत माता और मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शिक्षा के इस अनमोल साधक के सम्मान में दीप प्रज्वलित किया गया।
"शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता": ज्ञानचंद प्रसाद मेहता
अपने संबोधन में सचिव ज्ञानचंद प्रसाद मेहता ने एक प्रेरणादायक विचार साझा किया। उन्होंने कहा, "एक शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, बल्कि वह जीवनभर समाज का पथ प्रदर्शन करता रहता है।" उन्होंने शैलेंद्र बाबू को शालीन और प्रेरणादायक व्यक्तित्व का धनी बताते हुए कहा कि 34 वर्षों तक विद्या भारती की परंपराओं का निर्वहन करना एक बड़ी उपलब्धि है।
अनुशासन और सादगी की प्रतिमूर्ति
प्रधानाचार्य संजीव कुमार झा ने शैलेंद्र सिंह को विद्यालय का एक मजबूत स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि उनका मिलनसार और सरल स्वभाव नए शिक्षकों के लिए हमेशा प्रेरणा बना रहेगा। वरिष्ठ आचार्य मनोज कुमार पांडे ने अतिथियों का परिचय कराते हुए बताया कि किस प्रकार 1992 से शैलेंद्र बाबू ने विद्यालय की उन्नति में अपना खून-पसीना एक किया।
विदाई की बेला में छलके आंसू
जब विदाई के संबोधन की बारी आई, तो आचार्य शैलेंद्र कुमार सिंह स्वयं भावुक हो गए। उन्होंने रुंधे गले से कहा, "इस विद्यालय की मिट्टी और यहाँ बिताए गए पल मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। यहाँ के आचार्य परिवार और विद्यार्थियों से जो स्नेह मिला, उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।"
समारोह के दौरान उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और उपहार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन छात्रा महक कुमारी एवं सोनाक्षी कुमारी ने किया। इस दौरान आशा दीदी और एकता दीदी ने भी उनके व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे।

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