जी.एम. महाविद्यालय इचाक में 'विश्व पृथ्वी दिवस' पर सेमिनार: पर्यावरण संरक्षण के लिए एकजुट हुए छात्र और शिक्षक
धरती को बचाने का एकमात्र विकल्प है 'हरियाली', महाविद्यालय प्रभारी ने ग्लोबल वार्मिंग और जल संकट पर जताई चिंता।
इचाक (हजारीबाग):
पर्यावरण असंतुलन और बढ़ती तपिश के बीच, आज इचाक स्थित जी.एम. महाविद्यालय में 'विश्व पृथ्वी दिवस' (World Earth Day) के अवसर पर एक भव्य सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और पृथ्वी को विनाश से बचाने के उपायों पर चर्चा करना था।
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| World Earth Day |
विद्यार्थियों ने साझा किए विचार
सेमिनार में महाविद्यालय की छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसमें नंदनी कुमारी, समीक्षा कुमारी, सुहानी कुमारी, प्रिया कुमारी, तनु कुमारी, अंजलि कुमारी, रेशमी कुमारी, कुमकुम कुमारी, रानी कुमारी एवं संगम कुमारी ने अपने संबोधन के माध्यम से पर्यावरण सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। प्रतिभागियों ने पोस्टर और वक्तव्यों के जरिए यह संदेश दिया कि यदि आज हम सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन समाप्त हो जाएंगे।
पृथ्वी हमारी जीवनदायनी: महाविद्यालय प्रभारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय प्रभारी पंकज कुमार ने पृथ्वी के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा, "पृथ्वी हमारी एकमात्र जीवनदायनी है, जो हमें सांस लेने के लिए हवा, भूख मिटाने के लिए भोजन, प्यास बुझाने के लिए पानी और रहने के लिए सुरक्षित स्थान प्रदान करती है।"
उन्होंने वर्तमान मानवीय गतिविधियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई, औद्योगिक धुआं, प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग और वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण सीधे तौर पर धरती के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसी का परिणाम है कि आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग, गंभीर जल संकट और जैव विविधता (Biodiversity) में कमी जैसी विकट समस्याओं से जूझ रही है।
समाधान: वृक्षारोपण और जागरूकता
सेमिनार के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि इन सभी समस्याओं का एकमात्र प्रभावी विकल्प पृथ्वी को 'हरा-भरा' रखना है। वक्ताओं ने सुझाव दिया कि:
अधिक से अधिक वृक्षारोपण: प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करनी चाहिए।
सफाई अभियान: प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखना।
जल संरक्षण: वर्षा जल संचयन और पानी की बर्बादी रोकना।
जन जागरूकता: समाज के हर वर्ग को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना।
कार्यक्रम की सफलता में इनका रहा योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में शिक्षक रत्नेश कुमार राणा, संजीत कुमार यादव, अजीत हांसदा, पार्वती कुमारी, संगम कुमारी, और रवि कुमार महतो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महाविद्यालय के सभी स्टाफ और छात्रों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए निरंतर कार्य करेंगे।

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