हजारीबाग: 9 मई को लगेगी राष्ट्रीय लोक अदालत, बैंक रिकवरी और लंबित मामलों के निपटारे को लेकर पीडीजे ने कसी कमर
प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने बैंक अधिकारियों के साथ की उच्चस्तरीय बैठक; आपसी सहमति से मुकदमों के बोझ को कम करने की तैयारी।
नरेश सोनी न्यूज़ प्रहरी प्रधान संपादक.
हजारीबाग: आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय प्रदान करने की दिशा में हजारीबाग व्यवहार न्यायालय में आगामी 9 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा इसकी तैयारियां युद्धस्तर पर की जा रही हैं। इस विशेष अदालत में अधिक से अधिक वादों के निष्पादन को सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (PDJ) रंजीत कुमार की अध्यक्षता में विभिन्न बैंकों के उच्चाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक संपन्न हुई।
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| PDJ Ranjit Kumar |
बैंकों के साथ रिकवरी और निष्पादन पर चर्चा बैठक के दौरान प्रधान जिला जज रंजीत कुमार ने बैंकों से जुड़े लंबित मुकदमों और लोन रिकवरी के मामलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बैंक पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे लोक अदालत के माध्यम से बैंक और ग्राहकों के बीच के विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने का प्रयास करें। PDJ ने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा मंच है जहाँ बिना किसी कानूनी उलझन के दोनों पक्ष जीत की स्थिति में होते हैं।
इन बैंकों के पदाधिकारी रहे मौजूद न्यायिक और बैंकिंग सेक्टर के बीच हुए इस संवाद में जिले के लगभग सभी प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से:
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव: डॉ. रवि प्रकाश तिवारी
विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि: एसबीआई के राम भगत, जेएससीबी के जीतेश कुमार, यूनियन बैंक के विजय प्रकाश कुजूर, बैंक ऑफ महाराष्ट्र के रवीश रंजन, एलडीएम किशोर कुमार, पंजाब एंड सिंध बैंक के राकेश कुमार, बैंक ऑफ बड़ौदा के जितेंद्र साव, यूको बैंक के अंशु वर्मा, आईडीबीआई की काजल कुमारी और केनरा बैंक की माधुरी कुमारी उपस्थित रहीं।
जनता के लिए सुनहरा अवसर विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने बताया कि लोक अदालत में न केवल बैंक ऋण मामले, बल्कि बिजली बिल विवाद, चेक बाउंस, वैवाहिक विवाद और राजस्व संबंधी मामलों का भी निपटारा किया जाएगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने पुराने विवादों को हमेशा के लिए खत्म करने हेतु 9 मई को होने वाली इस लोक अदालत का लाभ उठाएं।
प्रशासन और न्यायपालिका का लक्ष्य है कि इस बार रिकॉर्ड संख्या में मामलों का ऑन-द-स्पॉट सेटलमेंट किया जाए ताकि कोर्ट पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम किया जा सके।

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