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Editor: Naresh Prasad Soni
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विभावि में पीजी स्तर पर लागू होगी 'नई शिक्षा नीति-2020': कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा की अध्यक्षता में बड़ा फैसला; 1 और 2 वर्षीय स्नातकोत्तर का बदलेगा सिलेबस

जम्मू, इग्नू और मेघालय से आए तीन बड़े शिक्षाविदों ने तैयार किया खाका; हर सेमेस्टर में होंगे 5 पेपर, रिसर्च और प्रोजेक्ट पर रहेगा विशेष जोर।

 

हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े सुधार की शुरुआत होने जा रही है। विश्वविद्यालय में अब स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) को पूरी तरह लागू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए मंगलवार को कौटिल्य भवन स्थित मनोविज्ञान विभाग की प्रयोगशाला में पाठ्यक्रम एवं क्रेडिट रूपरेखा निर्धारित करने हेतु गठित उच्च स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने की।

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2026 के नए सत्र से लागू होगी व्यवस्था

बैठक की जानकारी देते हुए समिति के संयोजक तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभावि नोडल अधिकारी डॉ. इंद्रजीत कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के स्नातक (UG) स्तर पर पहले ही एनईपी लागू हो चुकी है। अब यूजीसी (UGC) के दिशा-निर्देशों के आलोक में:

  • सत्र 2026-27 से एक-वर्षीय स्नातकोत्तर (1-Year PG) का पाठ्यक्रम लागू होगा।

  • सत्र 2026-28 से दो-वर्षीय स्नातकोत्तर (2-Year PG) की पढ़ाई के लिए नए पाठ्यक्रम और क्रेडिट रूपरेखा को हरी झंडी दी जाएगी।

देशभर से जुटे तीन बड़े बाह्य विशेषज्ञ

इस उच्च स्तरीय मंथन में विश्वविद्यालय के आमंत्रण पर देश के तीन नामचीन शिक्षाविदों ने बाह्य विशेषज्ञ (External Experts) के रूप में भाग लिया और अपना अमूल्य योगदान दिया:

  1. प्रो. पंकज श्रीवास्तव (यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू)

  2. प्रो. सुदीप झा (इग्नू, स्कूल ऑफ साइंस, नई दिल्ली)

  3. प्रो. रमेश शर्मा (पूर्व संकायाध्यक्ष, नेहूं, मेघालय)

नया परीक्षा पैटर्न: हर सेमेस्टर 20 क्रेडिट का

डॉ. इंद्रजीत कुमार द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से तैयार ड्राफ्ट को सभी के समक्ष रखा गया। गहन विमर्श के बाद तय हुआ कि:

  • नए पाठ्यक्रम के तहत प्रत्येक सेमेस्टर (समसत्र) में अब कुल 5 पेपर (पत्र) की पढ़ाई होगी।

  • प्रत्येक पेपर 4 क्रेडिट का होगा, जिससे हर सेमेस्टर का कुल वेटेज 20 क्रेडिट का हो जाएगा।

  • नए सिलेबस में किताबी ज्ञान से ज्यादा कोर्स वर्क, प्रोजेक्ट कार्य और शोध प्रबंध (Dissertation) पर विशेष बल दिया गया है।

  • बैठक के दौरान भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कुमार सिंह और गणित विभागाध्यक्ष डॉ. गोविंद झा ने भी कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

5-वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स पर भी चर्चा

बैठक में पांच-वर्षीय इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम लागू करने का भी प्रस्ताव आया। हालांकि, विशेषज्ञों ने बताया कि विभावि जैसे एफिलिएटिंग (संबद्ध) विश्वविद्यालय में इसे लागू करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहाँ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कॉलेजों में होती है और यूनिवर्सिटी कैंपस में केवल पीजी की पढ़ाई होती है।

अब आगे क्या होगा?

क्रेडिट फ्रेमवर्क तय होने के बाद अब सभी विभागों में पाठ्यक्रम समिति (BOCS) का गठन होगा, जो बाह्य विशेषज्ञों की मदद से अपने-अपने विषय का नया सिलेबस तैयार करेंगी। इसके बाद अंतिम मंजूरी के लिए इस पूरे प्रारूप को विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद (Academic Council) की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस बैठक में विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष और परीक्षा नियंत्रक उपस्थित थे। तकनीकी सहयोग सहायक दीपू कुमार ने प्रदान किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के कुलानुशासक डॉ. सादिक रज्जाक ने किया।

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