हजारीबाग नगर निगम का कड़ा अल्टीमेटम: म्युनिसिपल दुकानों का 3.50 करोड़ का किराया बकाया; 1 सप्ताह में पैसे जमा नहीं किए तो सीधे सील होंगी दुकानें
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।
हजारीबाग। हजारीबाग नगर निगम क्षेत्र में सरकारी दुकानों का किराया दबाकर बैठने वाले दुकानदारों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बुधवार को राजस्व संग्रह (Revenue Collection) को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।
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| Hazaribagh Municipal Corporation Shop Sealing Order 2026 |
बैठक में राजस्व संग्रह से संबंधित कार्यों की बिंदुवार समीक्षा करते हुए सहायक नगर आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा कि नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समय पर बकाया राशि जमा नहीं करने वाले दुकानदारों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सीधे सीलिंग की कार्रवाई शुरू होगी।
21 स्थानों पर 1000 से अधिक दुकानें, साढ़े 3 करोड़ रुपये है बकाया
समीक्षा बैठक के दौरान सहायक नगर आयुक्त ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत म्युनिसिपल दुकानों की स्थिति और राजस्व के आंकड़ों को विस्तार से सामने रखा:
- नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत कुल 21 प्रमुख स्थानों पर लगभग 1,000 से अधिक म्युनिसिपल शॉप (दुकानें) संचालित हो रही हैं।
- इन सभी स्थानों पर अधिष्ठापित दुकानों का वर्तमान में कुल बकाया किराया लगभग 3 करोड़ 50 लाख रुपया तक पहुँच चुका है।
- पूरे क्षेत्र में 400 से अधिक ऐसे बड़े डिफाल्टर दुकानदार हैं, जिनका किराया पिछले 2 वर्षों से भी अधिक समय से लंबित है और प्रत्येक पर 50,000 रुपये से अधिक की राशि बकाया है।
मटवारी क्षेत्र के म्युनिसिपल शॉप पर 51 लाख से अधिक का बकाया
सहायक नगर आयुक्त ने विशेष रूप से चिन्हित क्षेत्रों का विवरण देते हुए बताया कि शहर के मटवारी (Matwari) स्थित म्युनिसिपल दुकानों की संख्या लगभग 158 है। इन 158 दुकानों पर ही सिर्फ वित्तीय वर्ष 2025-26 का कुल बकाया किराया 51 लाख रुपया से अधिक है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
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1 सप्ताह की आखिरी चेतावनी, नगरपालिका अधिनियम 2013 के तहत होगी कार्रवाई
नगर निगम ने लंबे समय से किराया न देने वाले दुकानदारों और किरायेदारों को अंतिम चेतावनी (लास्ट वार्निंग) जारी की है। यदि दुकानदार 1 सप्ताह के अंदर स्वयं नगर निगम कार्यालय आकर अपनी पूरी बकाया राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ निम्नलिखित कड़े कदम उठाए जाएंगे:
- झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2013 के अधीन कड़ा रुख अपनाते हुए ऐसी सभी डिफाल्टर दुकानों को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सील (Seal) कर दिया जाएगा।
- दुकानों को सील करने के बाद उनके आवंटन को पूरी तरह रद्द माना जाएगा और पारदर्शी तरीके से नए सिरे से आवंटन (Re-Allotment) करने की सरकारी प्रक्रिया की शुरुआत कर दी जाएगी।
शुक्रवार से चलेगा विशेष राजस्व संग्रह अभियान
राजस्व की त्वरित वसूली के लिए सहायक नगर आयुक्त ने शुक्रवार से पूरे शहर में एक विशेष राजस्व संग्रह अभियान चलाने का कड़ा निर्देश दिया है। इस अभियान के तहत अधिकारी और तहसीलदार सीधे फील्ड में उतरेंगे और बकाएदारों को नोटिस के साथ-साथ सीलिंग की चेतावनी दी जाएगी।
इस महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक में मुख्य रूप से नगर प्रबंधक सह-नोडल पदाधिकारी (बाजार शाखा) उपेंद्र कुमार, राजस्व निरीक्षक शैलेंद्र कुमार सिंह, तहसीलदार सूरज कुमार, अनिल यादव, राजीव कुशवाहा, उदय नारायण सिंह, प्रदीप गोस्वामी तथा उदय राम सहित नगर निगम के कई अन्य अधिकारी व कर्मचारी मुख्य रूप से उपस्थित थे।


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