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Editor: Naresh Prasad Soni
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नगर निगम का ऐतिहासिक फैसला: हजारीबाग में पहली बार होगा 'वार्ड समितियों' का गठन, मोहल्लों के विकास की रूपरेखा खुद तय करेंगे नागरिक

हजारीबाग नगर निगम में पहली बार वार्ड समिति का गठन। झारखंड नगरपालिका अधिनियम की धारा 34 के तहत मिली स्वीकृति। जानें कैसे काम करेगी यह समिति।
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नगर निगम का ऐतिहासिक फैसला: हजारीबाग में पहली बार होगा 'वार्ड समितियों' का गठन, मोहल्लों के विकास की रूपरेखा खुद तय करेंगे नागरिक

नगर आयुक्त के निर्देश पर हुई उच्च स्तरीय बैठक; वार्ड पार्षद होंगे अध्यक्ष, सफाई-पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसे बुनियादी मुद्दों का मौके पर होगा समाधान।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़।

हजारीबाग: नगर निगम के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। नगर आयुक्त के दिशा-निर्देशानुसार सोमवार, 11 मई 2026 को निगम कार्यालय के सभागार में आयोजित एक साधारण बैठक में 'वार्ड समितियों' के गठन को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई। यह झारखंड नगरपालिका अधिनियम की धारा 34 के आलोक में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है, जिसका उद्देश्य शासन को सीधे जनता की दहलीज तक पहुँचाना है।

Nagar Aukt Hazaribagh.

पहली बार जमीनी स्तर पर दिखेगा बदलाव

बैठक की अध्यक्षता कर रहे सहायक नगर आयुक्त-सह-नगरपालिका सचिव विपिन कुमार ने बताया कि यह पहली बार है जब नगर निगम में वार्ड समितियों का गठन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक निर्णय से अब वार्डों के विकास में स्थानीय नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित होगी। बैठक में नगर प्रबंधक उपेंद्र कुमार, संतोष कुमार, प्रीतम कुमार सिंह और सतीश कुमार के अलावा सभी सात जोनल अध्यक्षों की सक्रिय मौजूदगी रही।

समिति का स्वरूप: कौन-कौन होगा शामिल?

वार्ड समिति के गठन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है:

  • अध्यक्ष: संबंधित वार्ड के निर्वाचित पार्षद इस समिति के पदेन अध्यक्ष होंगे।
  • सदस्य: वार्ड की आम सभा द्वारा निर्वाचित 2-3 सदस्य, स्थानीय सिविल सोसाइटी या NGO के प्रतिनिधि, अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधि, और SC/ST वर्ग के सदस्य शामिल होंगे।
  • सदस्य सचिव: नगर आयुक्त द्वारा नामित सदस्य इस समिति के सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

वार्ड समितियों के मुख्य कार्य और शक्तियाँ

यह समितियाँ केवल कागजी नहीं होंगी, बल्कि इन्हें व्यापक जिम्मेदारी दी गई है:

  1. विकास योजनाएं: अपने वार्ड की जरूरतों के अनुसार विकास योजनाओं का खाका तैयार कर निगम को प्रस्तुत करना।
  2. साफ-सफाई एवं पेयजल: वार्ड के भीतर नियमित साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता की निरंतर निगरानी करना।
  3. स्ट्रीट लाइट प्रबंधन: मोहल्लों में लगी स्ट्रीट लाइटों के उचित रखरखाव और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करना।

जोनल अध्यक्षों की रही गरिमामयी उपस्थिति

बैठक में सातों जोनों के अध्यक्षों—विजय प्रसाद, बैद्यनाथ राम, विकास कुमार यादव, रूपाली कुमारी, मिताली रश्मि, दीप रंजन और मोहम्मद मुस्तकिम ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और समितियों के प्रभावी कार्यान्वयन पर विचार साझा किए।

​प्रशासन का मानना है कि इस पहल से न केवल नगर निगम पर काम का बोझ कम होगा, बल्कि स्थानीय समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान भी संभव हो सकेगा।

"आपके वार्ड में विकास की क्या स्थिति है? हमें कमेंट में बताएं।"


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