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Editor: Naresh Prasad Soni
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Hamar Hazaribagh: झारखंड में 'झांगुर ग्रुप' का अंत! 5 लाख के इनामी रामदेव उरांव सहित 3 कुख्यात अपराधियों ने किया सरेंडर

झारखंड के कुख्यात झांगुर ग्रुप के प्रमुख 5 लाख के इनामी रामदेव उरांव सहित 3 अपराधियों ने SLR हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण।
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रांची-गुमला पुलिस की बड़ी कामयाबी: 29 कांडों के आरोपी और संगठित गिरोह के प्रमुख ने स्वचालित हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण

झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर मुख्यधारा में लौटे उग्रवादी; भारी मात्रा में SLR और जिंदा कारतूस बरामद

विशेष संवाददाता, रांची/हजारीबाग

रांची/गुमला:

झारखंड में सक्रिय संगठित अपराध और उग्रवादी नेटवर्क के खिलाफ चलाए जा रहे दमन अभियान के बीच एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य में सक्रिय कुख्यात संगठित गिरोह 'झांगुर ग्रुप' के प्रमुख और 5 लाख रुपये के इनामी अपराधी रामदेव उरांव ने अपने दो सक्रिय साथियों के साथ पुलिस के सामने घुटने टेक दिए हैं। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति (Surrender Policy) से प्रभावित होकर इन अपराधियों ने समाज की मुख्यधारा में जुड़ने की इच्छा जताई और भारी मात्रा में आधुनिक हथियारों के साथ सरेंडर कर दिया।

रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त टीम के समक्ष स्वचालित हथियारों और कारतूसों के साथ आत्मसमर्पण करते झांगुर ग्रुप के सदस्य।

गुप्त सूचना पर रांची और गुमला पुलिस ने बिछाया था जाल

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार (30 मई 2026) को वरिय पुलिस अधीक्षक (SSP), रांची को एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि झांगुर ग्रुप का प्रमुख रामदेव उरांव अपने संगठन के सदस्यों के साथ रांची और गुमला जिले की सीमा पर भ्रमणशील है और वे पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण की फिराक में हैं।

​इस सूचना के सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई के लिए ग्रामीण एसपी (रांची) के निर्देशन में बेडो डीएसपी दीपक कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जो बेड़ो थाना क्षेत्र के लमकाना पहुंची। इसी दौरान समान इनपुट गुमला जिला पुलिस को भी मिला। गुमला एसपी के निर्देश पर घाघरा थाना प्रभारी पु०अ०नि० मोहन कुमार सिंह और पु०अ०नि० विकास कुमार के नेतृत्व में सशस्त्र बलों की टीम भी सीमा पर पहुंची।

​जब दोनों जिलों की संयुक्त पुलिस टीम रांची-गुमला सीमा पर पहुंची, तो इन तीनों अपराधियों ने खुद को झांगुर ग्रुप का सदस्य बताते हुए आत्मसमर्पण की इच्छा जताई और पुलिस के समक्ष विधिवत सरेंडर कर दिया।

29 संगीन मुकदमों का आरोपी है सरगना रामदेव उरांव

​पकड़ा गया मुख्य सरगना रामदेव उरांव एक बेहद शातिर और कुख्यात अपराधी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इसके खिलाफ राज्य के विभिन्न थानों और जिलों में हत्या, रंगदारी और लेवी जैसे लगभग 29 संगीन मामले (कांड) दर्ज हैं। प्रशासन ने इसकी गिरफ्तारी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

आत्मसमर्पण करने वाले अपराधियों की पूरी प्रोफाइल:

  1. रामदेव उरांव (उम्र 47 वर्ष) - गिरोह का प्रमुख (पिता: स्व० रूधवा उरांव, ग्राम: देवरागानी, थाना: बिशुनपुर, जिला: गुमला)।
  2. प्रसाद उरांव (उम्र 24 वर्ष) - सक्रिय सदस्य (पिता: बालदेव उरांव, निवासी: देवरागानी, बिशुनपुर, गुमला)।
  3. सुबास उरांव (उम्र 23 वर्ष) - सक्रिय सदस्य (पिता: मुन्ना उरांव, निवासी: देवरागानी, बिशुनपुर, गुमला)।

जब्त किए गए आधुनिक हथियार और कारतूस (Seizure List):

​सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण के दौरान इन अपराधियों के पास से अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है:

  • 01 स्वचालित हथियार (Automatic Weapon): जिसके बॉडी पर A56-2 571072 अंकित है।
  • 01 स्वचालित SLR रायफल (Self-Loading Rifle)।
  • जिंदा कारतूस: कुल 45 चक्र जिंदा कारतूस (30 चक्र स्वचालित हथियार के लिए और 15 चक्र SLR के लिए)।
  • मैगजीन: 02 अद्द (दोनों हथियारों के लिए एक-एक मैगजीन)।

सार्वजनिक सुझाव (Public Advisory / Message)

​📌 न्यूज प्रहरी का संदेश: हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का सही अवसर

झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति (Surrender and Rehabilitation Policy) भटके हुए युवाओं और अपराधियों को सुधारने का एक बेहतरीन मौका देती है। न्यूज प्रहरी ऐसे तमाम लोगों से अपील करता है जो किसी कारणवश कानून के खिलाफ रास्ते पर चल पड़े हैं, वे हिंसा का रास्ता छोड़कर पुलिस और प्रशासन के समक्ष आत्मसमर्पण करें। सरकार द्वारा उनके पुनर्वास और परिवार के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं।


संपादकीय विश्लेषण: झांगुर ग्रुप का खात्मा और शांति की नई सुबह (Editorial)

संयुक्त पुलिसिंग और कूटनीति की बड़ी जीत

रांची और गुमला जिला पुलिस की आपसी सूझबूझ और त्वरित तालमेल के कारण बिना एक भी गोली चले इतने बड़े गैंग के प्रमुख का सरेंडर होना झारखंड पुलिस की एक बड़ी रणनीतिक सफलता है। 5 लाख के इनामी अपराधी रामदेव उरांव के खिलाफ 29 मामले दर्ज होना यह बताता है कि इस गिरोह ने गुमला और रांची के सीमावर्ती इलाकों में कितना आतंक मचा रखा था।

​स्वचालित हथियार और SLR जैसे मिलिट्री-ग्रेड हथियारों का बरामद होना इस बात की पुष्टि करता है कि यह ग्रुप कितना खतरनाक हो चुका था। सरकार की सरेंडर नीति का असर अब धरातल पर दिखने लगा है, जिससे अपराधियों और उग्रवादियों को यह समझ आ रहा है कि हिंसा के रास्ते का अंत सिर्फ बर्बादी है। हालांकि, पुलिस को अभी सतर्क रहना होगा क्योंकि मुख्य सरगना के हटने के बाद गिरोह के अन्य बिखरे हुए सदस्य लेवी या रंगदारी के लिए फिर से सिर उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): संयुक्त पुलिस बल (राँची एवं गुमला जिला पुलिस) आधिकारिक विज्ञप्ति

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