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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग: विश्व पर्यावरण दिवस पर सिविल कोर्ट परिसर में डीएलएसए ने किया पौधारोपण; प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने दिया 'क्लाइमेट चेंज' से निपटने का संदेश

हजारीबाग कोर्ट पार्क में रोपे गए पौधे: बढ़ते तापमान को रोकने का एकमात्र उपाय अधिक से अधिक पेड़ लगाना— प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा

"सूखे और गीले कचरे को अलग कर खाद बनाएं, पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी"— जिला जज

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)

  • समाचार स्रोत (Source): सिविल कोर्ट परिसर, हजारीबाग जिला

हजारीबाग: विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के बैनर तले शुक्रवार को हजारीबाग सिविल कोर्ट स्थित पार्क में एक भव्य पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की रक्षा के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम की अगुवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने की। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में कोर्ट परिसर के पार्क में फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के कई पौधे लगाए गए।

कोर्ट परिसर में जुटे न्यायिक पदाधिकारियों और वकीलों का ग्रुप शॉट। टेक्स्ट: 📝 बढ़ते तापमान पर गहरी चिंता: प्रधान जिला जज ने कहा— ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का एकमात्र रास्ता सघन पौधारोपण और उनकी सुरक्षा है।

इस महत्वपूर्ण पौधारोपण कार्यक्रम में न्यायिक जगत से जुड़े कई वरीय पदाधिकारी शामिल हुए। मुख्य रूप से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) राजीव त्रिपाठी और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने सक्रिय रूप से पौधे रोपकर इस अभियान को गति दी। इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में हजारीबाग के मध्यस्थ (Mediators), पैनल अधिवक्ता (Panel Advocates), पारा लीगल वालेंटियर (PLV) और स्थानीय विधि महाविद्यालय (Law College) के छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्साहपूर्ण भागीदारी दर्ज कराई।

बढ़ते औसत तापमान पर प्रधान जिला जज ने जताई चिंता

पौधारोपण के उपरांत वहां उपस्थित न्यायिक पदाधिकारियों, वकीलों और कानून के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण की रक्षा को लेकर हम सभी को विशेष रूप से सचेत और गंभीर रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि जिस तीव्र गति से धरती का औसत तापमान बढ़ रहा है, उससे आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ग्लोबल वार्मिंग और इस भीषण गर्मी से निपटने का एकमात्र और सबसे सही उपाय यही है कि हम सभी मिलकर अधिक से अधिक संख्या में पेड़ों को लगाएं और न सिर्फ उन्हें लगाएं, बल्कि उनकी पूरी देखभाल भी सुनिश्चित करें।

कोर्ट परिसर में जुटे न्यायिक पदाधिकारियों और वकीलों का ग्रुप शॉट। टेक्स्ट: 📝 बढ़ते तापमान पर गहरी चिंता: प्रधान जिला जज ने कहा— ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का एकमात्र रास्ता सघन पौधारोपण और उनकी सुरक्षा है।

कचरा प्रबंधन (Waste Management) को लेकर दी महत्वपूर्ण सीख

प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर जोर दिया। उन्होंने आम जनमानस और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे को हमेशा अलग-अलग डस्टबिन में रखना चाहिए। उन्होंने गीले कचरे से जैविक खाद बनाने और उसका पौधों के लिए सदुपयोग करने की बात कही, ताकि कचरे का सही और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन किया जा सके। विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित इस पहल की पूरे कोर्ट परिसर और प्रबुद्ध समाज द्वारा सराहना की जा रही है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (The Legal Side of Environmental Rights)

📌 पर्यावरण संरक्षण और कानून: जानिए क्या हैं हमारे संवैधानिक अधिकार?

  • अनुच्छेद 21 (Right to Life): भारतीय संविधान के तहत जीने के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध हवा-पानी में सांस लेने का अधिकार भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसलों में इसे मौलिक अधिकार माना है।

  • अनुच्छेद 48A और 51A(g): राज्य के नीति निदेशक तत्वों और नागरिकों के मूल कर्तव्यों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि पर्यावरण की रक्षा, वनों का संवर्धन और वन्यजीवों के प्रति दया भाव रखना देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

  • डीएलएसए (DLSA) की भूमिका: जिला विधिक सेवा प्राधिकार केवल मुकदमों और मुफ्त कानूनी सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में पर्यावरण, स्वास्थ्य और बुनियादी मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भी निरंतर कार्य करता है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: कचरा प्रबंधन और पौधारोपण की न्यायिक पहल (Editorial)

बढ़ते पारे के बीच हजारीबाग न्यायपालिका का यह संदेश समाज के लिए मार्गदर्शक इस वर्ष पूरा उत्तर भारत और विशेषकर झारखंड जिस भीषण हीटवेव और रिकॉर्ड तोड़ तापमान से जूझ रहा है, वैसे में विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक रस्म बनकर न रह जाए, यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। हजारीबाग सिविल कोर्ट में प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा द्वारा दिया गया संदेश बेहद व्यावहारिक और समसामयिक है। अक्सर लोग पेड़ तो लगा देते हैं लेकिन उनकी सिंचाई और सुरक्षा की सुध नहीं लेते। जज साहब द्वारा सूखे और गीले कचरे के वर्गीकरण तथा उसकी खाद बनाने की जो बात कही गई है, वह सीधे तौर पर 'जीरो वेस्ट' (Zero Waste) जीवनशैली की वकालत करती है। जब न्यायपालिका के शीर्ष चेहरे खुद हाथों में कुदाल और पौधा लेकर जमीन पर उतरते हैं, तो इसका समाज, वकीलों और भावी पीढ़ी (लॉ स्टूडेंट्स) पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जरूरत इस बात की है कि इस मानसून सीजन में हजारीबाग का हर नागरिक सिविल कोर्ट की इस मुहिम से प्रेरणा लेते हुए कम से कम एक पौधा अवश्य रोपे और पर्यावरण को बचाने में अपनी आहुति दे

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हजारीबाग: SBMCH की बदहाली पर सांसद मनीष जायसवाल गंभीर; मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने अधीक्षक से मिलकर सौंपा मांग पत्र, ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू की व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ट्रॉमा सेंटर! सांसद प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने व्यवस्थागत लापरवाही पर जताया रोष, अधीक्षक ने दिया सुधार का भरोसा

"भीषण गर्मी में मरीज परेशान, वेंटिलेटर, लिफ्ट और एसी खराब; ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे तैनात हों सीनियर फिजिशियन और सर्जन"— रंजन चौधरी

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

हजारीबाग संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले और नगर अवस्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसबीएमसीएच) की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव को लेकर हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल बेहद गंभीर हैं। सांसद के निर्देश पर गुरुवार को उनके लोकसभा मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह से उनके कार्यालय कक्ष में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की गंभीर लापरवाहियों और व्यवस्थागत कमियों को उजागर करते हुए एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा।

🏥 हजारीबाग SBMCH की बदहाली पर सांसद मनीष जायसवाल सख्त! प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने प्रबंधन को दिया अल्टीमेटम।

मैनेजमेंट की लापरवाही से गरीब मरीज बेहाल, ऑक्सीजन प्लांट भी ठप्प

​सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने अस्पताल प्रबंधन पर तीखा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह अस्पताल पूरे हजारीबाग क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की जीवनरेखा (लाइफलाइन) है। परंतु, वर्तमान में प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण यहां आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल परिसर में स्थापित एक पीएसए (PSA) ऑक्सीजन प्लांट लंबे समय से खराब पड़ा है, जिसके कारण गंभीर मरीजों की जान पर बन आ रही है।

जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ट्रॉमा सेंटर, रिफर करने के चलन पर रोक लगाने की मांग

​रंजन चौधरी ने अस्पताल के आपातकालीन और संवेदनशील ट्रॉमा सेंटर की बदहाली पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि:

"वर्तमान में ट्रॉमा सेंटर को सिर्फ जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दिया जाता है, जिससे मरीजों को समय पर उचित और सटीक इलाज नहीं मिल पाता। हमारी मांग है कि ट्रॉमा सेंटर में चौबीसों घंटे जूनियर रेजिडेंट्स के साथ-साथ एक सीनियर फिजिशियन और एक सीनियर सर्जन की रोटेशनल ड्यूटी तैनाती अनिवार्य की जाए, ताकि गंभीर मरीजों को बेवजह दूसरे अस्पतालों में रेफर करने के इस चलन पर तुरंत रोक लग सके।"


​इसके साथ ही उन्होंने पोस्टमार्टम विभाग की विशेष मॉनिटरिंग की मांग की ताकि पीड़ितों को सही समय पर न्याय मिल सके। पत्र में आर्थोपेडिक वार्ड में चल रहे खेल को भी उजागर किया गया है, जहां बिना आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों से इंप्लांट के नाम पर मनमानी रकम वसूली जा रही है। उन्होंने यहां जरूरत के सभी इम्प्लांट का एक प्रामाणिक 'रेट चार्ट' डिस्प्ले कराने का आग्रह किया ताकि मरीजों से अवैध वसूली रोकी जा सके। इसके अलावा डॉक्टरों को सिर्फ सरकारी दवाएं ही पर्चे पर लिखने के सख्त निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया।

🏥 हजारीबाग SBMCH की बदहाली पर सांसद मनीष जायसवाल सख्त! प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने प्रबंधन को दिया अल्टीमेटम।

भीषण गर्मी में खराब पड़े हैं एसी-पंखे, वेंटिलेटर की भारी कमी

​अस्पताल के भीतर चल रही प्रशासनिक शिथिलता को उजागर करते हुए रंजन चौधरी ने बुनियादी सुविधाओं को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की। उन्होंने बताया कि:

  • बिजली और पानी का संकट: इस भीषण गर्मी में भी अस्पताल के कई वार्डों के एसी और पंखे खराब पड़े हैं। बिजली कटने पर जनरेटर सुचारू रूप से नहीं चलता और सोलर पैनल सिस्टम भी ठप्प है। मरीज पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
  • खराब लिफ्ट: बहुमंजिला भवनों में लिफ्ट खराब होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को सीढ़ियों से आना-जाना पड़ रहा है।
  • वेंटिलेटर की कमी: पूरे ट्रॉमा सेंटर में सिर्फ एक वेंटिलेटर चालू है। ओल्ड और न्यू आईसीयू (ICU) में तत्काल नए वेंटिलेटर स्थापित किए जाने की जरूरत है और इसे संचालित करने के लिए अलग से विशेषज्ञ चिकित्सक और चिकित्सा कर्मियों की बहाली आवश्यक है।
  • एम्बुलेंस हेल्पलाइन: मरीजों की सहूलियत के लिए मेडिकल कॉलेज के सभी सरकारी एम्बुलेंस ड्राइवरों के नंबर वार्डों में प्रदर्शित किए जाएं।

अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह ने दिया जल्द सुधार का भरोसा

​सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी द्वारा उठाए गए इन तमाम संवेदनशील और गंभीर मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया कि अस्पताल की कमियों को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही सभी शिकायतों और समस्याओं का निवारण कर स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त कर दिया जाएगा।

📋 न्यूज प्रहरी हेल्थ अवेयरनेस गाइड (Patient Rights Context)

​📌 मरीजों के अधिकार: सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान इन 3 बातों की जानकारी जरूर रखें

  1. निःशुल्क दवाओं का अधिकार: सरकारी नीति के अनुसार डॉक्टरों को अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाएं ही लिखनी चाहिए। यदि बाहर की दवा लिखी जा रही है, तो आप अस्पताल काउंटर पर उपलब्ध स्टॉक रजिस्टर की जानकारी मांग सकते हैं।
  2. आयुष्मान भारत योजना लाभ: यदि आप आयुष्मान योजना के अंतर्गत पात्र हैं, तो आर्थोपेडिक या किसी भी अन्य सर्जरी में इंप्लांट के लिए अतिरिक्त या मनमानी राशि देना कानूनन गलत है। इसकी शिकायत तुरंत अस्पताल के आयुष्मान मित्र या शिकायत सेल में करें।
  3. रेफरल का कारण: यदि अस्पताल प्रबंधन मरीज को किसी अन्य अस्पताल (जैसे रिम्स) रेफर करता है, तो रेफरल स्लिप पर रेफर करने का स्पष्ट चिकित्सीय कारण दर्ज होना अनिवार्य है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: सरकारी स्वास्थ्य ढांचा और जनप्रतिनिधियों की तत्परता (Editorial)

सिर्फ शिकायत नहीं, धरातल पर कड़े प्रशासनिक सुधारों की है आवश्यकता

हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसबीएमसीएच) की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। जब किसी संसदीय क्षेत्र का सबसे बड़ा मेडिकल कॉलेज अस्पताल बिजली, पानी, पंखे और वेंटिलेटर जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझे, तो आम जनता की बेबसी को आसानी से समझा जा सकता है। सांसद मनीष जायसवाल के निर्देश पर रंजन चौधरी द्वारा उठाया गया यह कदम सराहनीय है, क्योंकि जनप्रतिनिधियों का दबाव ही सोए हुए प्रशासनिक तंत्र को जगाता है।

​हालांकि, ट्रॉमा सेंटर को सीनियर सर्जनों के हवाले करना और इंप्लांट्स का रेट चार्ट सार्वजनिक करना ऐसे सुधार हैं जो बिना कड़े रुख के संभव नहीं हैं। अस्पताल अधीक्षक ने आश्वासन तो दिया है, लेकिन न्यूज़ प्रहरी इस बात पर नजर रखेगा कि ये वादे कब तक जमीन पर उतरते हैं। जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

  •      रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari. ​
  •      समाचार स्रोत (Source): Ranjan Choudhary Ki Kalam Se शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसबीएमसीएच) कार्यालय
  • और पढ़ें: हजारीबाग: सिलवार खुर्द में प्रखंड स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य आगाज; पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने फीता काटकर किया उद्घाटन, खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला


    हजारीबाग खेल जगत: युवा ऊर्जा और जोश का महासंग्राम

    हजारीबाग: सिलवार खुर्द में प्रखंड स्तरीय क्रिकेट प्रतियोगिता का भव्य आगाज; पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने फीता काटकर किया उद्घाटन, खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला

    "गांवों की मिट्टी में छुपी है राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं, बस सही मार्गदर्शन और सुविधाओं की है जरूरत"— मुन्ना सिंह

    विशेष संवाददाता, हजारीबाग

    हजारीबाग जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत सिलवार खुर्द पंचायत में स्थित प्रखंड स्तरीय स्टेडियम गुरुवार को खेल के उत्साह, युवा ऊर्जा और जबरदस्त जोश से सराबोर नजर आया। अवसर था सिलवार क्रिकेट अकादमी द्वारा आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता के भव्य शुभारंभ का, जिसका उद्घाटन पूर्व सदर विधानसभा प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने फीता काटकर किया। इस उद्घाटन समारोह में खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों, अभिभावकों, ग्रामीणों एवं क्षेत्र के गणमान्य लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

    "मुन्ना सिंह ने युवाओं से नशे से दूर रहकर खेल में करियर बनाने की अपील की है। हजारीबाग की इस खेल क्रांति पर आपकी क्या राय है? कमेंट में बताएं और न्यूज़ प्रहरी को अभी फॉलो करें!"

    खिलाड़ियों ने किया गर्मजोशी से स्वागत, खेल भावना का मिला संदेश

    ​उद्घाटन के दौरान मैदान में पहुंचते ही मुख्य अतिथि मुन्ना सिंह का खिलाड़ियों और स्थानीय युवाओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। उन्होंने मैदान पर उतरकर सभी खिलाड़ियों से एक-एक कर परिचय प्राप्त किया, उनका उत्साहवर्धन किया तथा प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए खेल भावना, अनुशासन और निरंतर अभ्यास को सफलता का मूल मंत्र बताया और पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।

    "खेल केवल जीत-हार नहीं, सर्वांगीण विकास का माध्यम"

    ​अपने संबोधन में पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने खेल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

    "खेल केवल जीत-हार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं के सर्वांगीण विकास, नेतृत्व क्षमता के निर्माण और स्वस्थ समाज की आधारशिला रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। सिलवार खुर्द के युवाओं में खेल के प्रति जो उत्साह, समर्पण और प्रतिभा दिखाई दे रही है, वह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आने वाले समय में यही युवा अपनी प्रतिभा के दम पर क्षेत्र की पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।"

    ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने पर जोर, रोजगार का सशक्त माध्यम

    ​मुन्ना सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों की खेल क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि गांवों की मिट्टी में ऐसे अनेक खिलाड़ी मौजूद हैं, जिनमें जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की क्षमता है। जरूरत सिर्फ उचित मार्गदर्शन, आधुनिक खेल सुविधाओं और नियमित प्रोत्साहन की है।

    मुन्ना सिंह ने युवाओं से नशे से दूर रहकर खेल में करियर बनाने की अपील की है। हजारीबाग की इस खेल क्रांति पर आपकी क्या राय है? कमेंट में बताएं और न्यूज़ प्रहरी को अभी फॉलो करें!"

    ​उन्होंने सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में हमारी महागठबंधन सरकार समाज और स्थानीय संस्थाओं के साथ मिलकर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का निरंतर कार्य कर रही है। वह समय दूर नहीं जब ग्रामीण क्षेत्रों के खिलाड़ी भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी अलग पहचान स्थापित करेंगे। वर्तमान समय में खेल युवाओं के लिए रोजगार और करियर का भी एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। उन्होंने युवाओं से नशा और सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर अपनी ऊर्जा खेल और शिक्षा के क्षेत्र में लगाने की अपील की।

    आयोजकों की सराहना और गरिमामयी उपस्थिति

    ​उन्होंने सिलवार क्रिकेट अकादमी के पदाधिकारियों और आयोजकों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर आयोजित इस प्रकार की प्रतियोगिताएं नई प्रतिभाओं को बेहतरीन मंच प्रदान करने के साथ-साथ क्षेत्र में खेल संस्कृति को मजबूत बनाती हैं।

    ​इस अवसर पर मुख्य रूप से पूर्व मुखिया महेंद्र राम प्रजापति, मुखिया प्रतिनिधि उमेश प्रसाद, पंचायत समिति सदस्य ओम प्रकाश देव, प्रधानाध्यापक शैलेश यादव सहित सिलवार क्रिकेट अकादमी के अमित यादव, शिवम यादव, सौरभ यादव, शनि यादव, ऋषभ यादव, विनय प्रजापति एवं सुनील पंडित समेत बड़ी संख्या में गणमान्यजन, अभिभावक, खेल प्रेमी और स्थानीय युवा उपस्थित थे।

    📋 न्यूज प्रहरी स्पोर्ट्स गाइड (Youth & Sports Awareness Context)

    ​📌 युवा खिलाड़ियों के लिए जरूरी जानकारी: खेल में करियर बनाने के लिए इन 3 बातों पर दें विशेष ध्यान

    1. नियमित फिटनेस और डाइट: खेल में तकनीक के साथ-साथ शारीरिक क्षमता (स्टैमिना) सबसे महत्वपूर्ण है। नशा और जंक फूड से पूरी तरह दूर रहें और प्रोटीन युक्त देसी खान-पान अपनाएं।
    2. पंजीकरण (Registration): जिला या राज्य स्तर पर खेलने के लिए अपने स्थानीय जिला क्रिकेट संघ (DCA) या मान्यता प्राप्त स्पोर्ट्स क्लब में अपना निबंधन अवश्य कराएं।
    3. सकारात्मक मानसिकता (Sportsmanship): मैदान पर हार से निराश होने के बजाय अपनी कमियों को पहचानें। अनुशासन और टीम भावना ही एक खिलाड़ी को महान बनाती है।

    🔍 संपादकीय विश्लेषण: ग्रामीण खेल मैदान और युवाओं का भविष्य (Editorial)

    प्रतिभाओं को तराशने के लिए जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं की दरकार

    हजारीबाग के सिलवार खुर्द में उमड़ा युवाओं का यह हुजूम गवाही देता है कि झारखंड के गांवों में खेल को लेकर कितना जुनून है। पूर्व प्रत्याशी मुन्ना सिंह का यह कहना बिल्कुल सटीक है कि गांवों की मिट्टी में राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी छुपे हैं। हालांकि, इन प्रतिभाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती आधुनिक संसाधनों, सही कोचिंग और टर्फ विकेट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है।

    ​टूर्नामेंट आयोजित करना एक सराहनीय कदम है, लेकिन इन ग्रामीण खिलाड़ियों को जिला और राज्य स्तर के चयन ट्राइल्स तक सुगम पहुंच मिलनी चाहिए। महागठबंधन सरकार की खेल नीतियों का लाभ अगर सीधे इन सुदूर ब्लॉक स्तरीय स्टेडियमों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे, तो हजारीबाग आने वाले दिनों में झारखंड को कई बड़े खिलाड़ी दे सकता है।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): सिलवार क्रिकेट अकादमी (मैदान लाइव)

    Hamar Jharkhand: डुमरी में उमड़ा 'उम्मीदों का दरबार'; जयराम महतो के जनता दरबार में दूसरे विधानसभा क्षेत्रों से भी पहुंचे लोग, अधिकारियों की लगी क्लास

    नौकरशाही की सुस्ती पर 'टाइगर' का कड़ा प्रहार: विधायक जयराम महतो ने ऑन-द-स्पॉट फोन घुमाकर अफसरों को दिया अल्टीमेटम; जानें पूरा मामला

    "जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत"— आवासीय कार्यालय में उमड़ी भारी भीड़ पर बोले डुमरी विधायक

    विशेष संवाददाता, डुमरी

    झारखंड की राजनीति में जनसरोकार के मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाले डुमरी के वर्तमान विधायक टाइगर जयराम कुमार महतो के आवासीय कार्यालय में लगने वाला जनता दरबार इन दिनों महज़ एक औपचारिक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आम जनता की उम्मीदों का बड़ा केंद्र बन चुका है। सोमवार को आयोजित हुए इस जनता दरबार में न केवल डुमरी विधानसभा, बल्कि आस-पास के कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों के सैकड़ो ग्रामीण अपनी बुनियादी और गंभीर समस्याएँ लेकर पहुँचे।

    "जनसेवा ही संकल्प": विधायक जयराम महतो ने कहा— "जनता की बातों को सुनना और समाधान करना हमारी प्राथमिकता है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"

    सिर्फ डुमरी नहीं, अन्य क्षेत्रों के लोगों की भी सुनी जा रही फ़रियाद

    ​जनता दरबार में उमड़ी भारी भीड़ के बीच विधायक टाइगर जयराम महतो एक-एक कर हर आम और खास व्यक्ति से मिले। उन्होंने दूर-दराज के गांवों से आए बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं की बातों को बेहद ध्यानपूर्वक सुना। इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित जन-समस्याएं प्रखरता से सामने आईं:

    • पेंशन और राशन: वृद्धों और एकल महिलाओं के अटके हुए सामाजिक सुरक्षा लाभ।
    • बुनियादी ढांचा: ग्रामीण क्षेत्रों में पानी, बिजली और जर्जर सड़कों की शिकायतें।
    • प्रशासनिक सुस्ती: स्थानीय अंचल (CO) और प्रखंड (BDO) कार्यालयों में लंबित मामले।

    तत्काल समाधान के लिए अधिकारियों को सीधे निर्देश

    ​जनता की समस्याओं पर त्वरित एक्शन लेते हुए विधायक ने संवेदनशीलता दिखाई। जिन मामलों का ऑन-द-स्पॉट (तत्काल) समाधान संभव था, उन्हें मौके पर ही निपटाया गया। वहीं, जटिल समस्याओं को लेकर विधायक जयराम महतो ने संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों से तुरंत मोबाइल पर संपर्क साधा और समस्या के शीघ्र और समयबद्ध निराकरण का कड़ा निर्देश दिया।

    "जनसेवा ही संकल्प": विधायक जयराम महतो ने कहा— "जनता की बातों को सुनना और समाधान करना हमारी प्राथमिकता है। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।"

    "जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी ताकत"

    ​जनता दरबार के सफल आयोजन के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए डुमरी विधायक टाइगर जयराम कुमार महतो ने कहा:

    "हमारे आवासीय कार्यालय में लगने वाला यह दरबार लोगों की उम्मीदों का दरबार है। जनता की बातों को ध्यानपूर्वक सुनना और यथासंभव उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना हमारी मुख्य प्राथमिकता है। जनसेवा ही हमारा संकल्प है, और जनता का यह अटूट विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत है।"


    📋 न्यूज प्रहरी पब्लिक अवेयरनेस गाइड (Grievance Redressal Context)

    ​📌 पाठकों के लिए जरूरी जानकारी: विधायक या प्रशासनिक स्तर पर शिकायत दर्ज कराते समय इन 3 बातों का रखें ध्यान

    1. लिखित आवेदन (Written Application): अपनी समस्या को हमेशा साफ अक्षरों में लिखित रूप में दें। आवेदन की दो कॉपियां रखें, ताकि एक प्रति पर आप रिसीविंग (पावती) ले सकें।
    2. दस्तावेजी साक्ष्य (Documentary Proof): यदि मामला जमीन, राशन या पेंशन का है, तो उससे संबंधित पुराने कागजात या पूर्व में दिए गए आवेदनों की फोटोकॉपी साथ जरूर संलग्न करें।
    3. फॉलो-अप नंबर: जनता दरबार के शिकायत रजिस्टर में अपना चालू मोबाइल नंबर दर्ज कराना कभी न भूलें, ताकि कार्रवाई होने पर विभाग या विधायक कार्यालय आपसे सीधे संपर्क कर सके।

    🔍 संपादकीय विश्लेषण: जनता दरबार और 'टाइगर' की जन-केंद्रित राजनीति (Editorial)

    प्रशासनिक तंत्र को जगाने और सीधे जनता से जुड़ने की एक मिसाल

    डुमरी विधानसभा में जयराम कुमार महतो का यह जनता दरबार पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नई उम्मीद जगाता है। अमूमन देखा जाता है कि चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि जनता की पहुंच से दूर हो जाते हैं, लेकिन अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भी लोगों का अपनी फरियाद लेकर जयराम महतो के पास पहुंचना यह साबित करता है कि उनका जनाधार और लोगों का उन पर भरोसा किस कदर बढ़ रहा है।

    ​अधिकारियों को सीधे फोन कर ऑन-द-स्पॉट जवाबदेही तय करना यह दिखाता है कि वे नौकरशाही की सुस्ती के खिलाफ जनता के साथ खड़े हैं। हालांकि, चुनौती यह होगी कि फोन पर दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर होता है, इसके लिए एक मजबूत फॉलो-अप सिस्टम की भी आवश्यकता होगी। बहरहाल, जनता के बीच जाकर उनकी पीड़ा सुनना ही लोकतंत्र की असली खूबसूरती है।




    कटकमदाग दोहरे हत्याकांड का 72 घंटे में खुलासा; ओला शोरूम का कर्मी ही निकला कातिल, दोनों मासूमों के शव बरामद

    हजारीबाग सनसनी: मोबाइल दिलाने के बहाने दो मासूम भाई-बहन का किया अपहरण, फिर की निर्मम हत्या; आरोपी संजीत पासवान गिरफ्तार

    एसपी के निर्देश पर गठित SIT ने जिला छोड़कर भाग रहे आरोपी को दबोचा; श्मशान घाट की झाड़ी से बहन और कुएं से मिला भाई का शव

    विशेष संवाददाता, हजारीबाग

    हजारीबाग जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र में एक 11 वर्षीय नाबालिग बच्ची और उसके 03 वर्षीय मासूम भाई के अपहरण और सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड का पुलिस ने शत-प्रतिशत खुलासा कर दिया है. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले अपराध को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी को हजारीबाग पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जिला छोड़कर भागने के क्रम में गिरफ्तार कर लिया है.

    हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी वह आधिकारिक प्रेस-विज्ञप्ति, जिसमें कटकमदाग दोहरे हत्याकांड के आरोपी की गिरफ्तारी और मामले के शत-प्रतिशत उद्भेदन की विस्तृत जानकारी दी गई है।

    लक्ष्मी पेट्रोल पंप के पास ओला शोरूम से गायब हुए थे बच्चे

    ​पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कटकमदाग थाना क्षेत्र के ग्राम कुद (वर्तमान पता) निवासी वादी मो० आमिर (स्थायी पता: ग्राम-चाचीपुर, थाना-अहरोली, जिला-अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश) ने कटकमदाग थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 11 वर्षीय पुत्री और 03 वर्षीय पुत्र शहरी क्षेत्र के ओला शो-रूम (निकट लक्ष्मी पेट्रोल पंप) के पास से अचानक गायब हो गए हैं. इस शिकायत के आधार पर कटकमदाग थाना काण्ड संख्या 90/26 (दिनांक 30.05.2026) धारा 137(2)/96 बी०एन०एस० के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया.

    हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी वह आधिकारिक प्रेस-विज्ञप्ति, जिसमें कटकमदाग दोहरे हत्याकांड के आरोपी की गिरफ्तारी और मामले के शत-प्रतिशत उद्भेदन की विस्तृत जानकारी दी गई है।
    4अपर पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में बनी SIT, सीसीटीवी से खुला राज

    ​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हजारीबाग पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर श्री अमित कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान), हजारीबाग के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया. टीम ने तत्काल घटनास्थल और उसके आसपास के संभावित मार्गों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले और तकनीकी साक्ष्यों की मदद ली.


    ​फुटेज में साफ देखा गया कि एक व्यक्ति ओला शो-रूम के बाहर से दोनों बच्चों को अपनी स्कूटी पर बैठाकर ले जा रहा है. जब उस व्यक्ति का भौतिक सत्यापन किया गया, तो उसकी पहचान ओला शो-रूम में ही काम करने वाले कर्मी संजीत कुमार पासवान (पिता- रामवतार पासवान, निवासी- सिन्दुर, थाना- कोर्रा, जिला- हजारीबाग) के रूप में हुई.

    श्मशान घाट और कुएं से बरामद हुए दोनों मासूमों के शव

    ​पुलिस की छापेमारी टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त संजीत पासवान को दिनांक 03 जून 2026 को उस समय धर-दबोचा जब वह जिले से भागने की फिराक में था. इससे पूर्व, दिनांक 31.05.2026 को ही पुलिस को कोर्रा थाना क्षेत्र के सिन्दुर स्थित श्मशान घाट से 11 वर्षीय बच्ची का शव बरामद हुआ था, जहां FSL और डॉग स्क्वायड की टीम ने गहन साक्ष्य जुटाए थे.

    ​इसके बाद आरोपी संजीत पासवान की निशानदेही पर पुलिस बल ने बड़े पैमाने पर सर्च अभियान चलाकर श्मशान घाट से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित एक कुएं से 03 वर्षीय मासूम भाई का शव भी बरामद कर लिया, जिसे एक बोरे में बंद कर फेंका गया था. दोनों शवों का पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड की निगरानी में कराया गया.

    आरोपी का कबूलनामा: शोर मचाने पर दोनों को उतारा मौत के घाट

    ​गिरफ्तार अभियुक्त संजीत पासवान ने पुलिस की कड़ाई से की गई पूछताछ में अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी घटना का खुलासा किया. उसने बताया कि:

    • ​उक्त नाबालिग लड़की पिछले दो महीने से ओला शोरूम की तरफ आती-जाती थी, जिससे उसकी जान-पहचान हो गई थी.
    • ​दिनांक 27.05.2026 को वह दोनों भाई-बहन को अपनी स्कूटी पर बैठाकर बाहर घूमाने, कुछ खिलाने और नया मोबाइल दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर सिन्दुर श्मशान घाट ले गया.
    • ​वहां सुनसान जगह पर रात के वक्त उसने लड़की के साथ जबरदस्ती करने का प्रयास किया. जब लड़की ने शोर मचाना (हो-हल्ला) शुरू किया, तो उसने पकड़े जाने के डर से लड़की को श्मशान घाट के बहते पानी में डुबोकर और गला घोंटकर मार डाला तथा शव को झाड़ियों में छिपा दिया.
    • ​इसके बाद इस जघन्य अपराध को छुपाने और पहचान उजागर होने के डर से उसने पास में ही खड़े लड़की के 03 वर्षीय छोटे भाई की भी गला घोंटकर हत्या कर दी. उसने बच्चे के शव को प्लास्टिक के बोरे में डाला, उसकी गर्दन को प्लास्टिक से बांधा और पास के कुएं में फेंक दिया.

    काण्ड में प्रयुक्त स्कूटी और बोरा बरामद

    ​पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की निशानदेही पर अपराध में इस्तेमाल की गई स्कूटी (पंजीकरण संख्या- JH02BH-8804) और शव को ठिकाने लगाने में प्रयुक्त 01 प्लास्टिक का बोरा अभियुक्त के घर व श्मशान घाट के पास से बरामद कर लिया है.

    उद्भेदन टीम में शामिल प्रमुख अधिकारी:

    इस बड़े काण्ड के सफल और त्वरित निष्पादन में बड़कागांव के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी श्री अमित आनंद (भा०पु०से०), अपर पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार, मुख्यालय डीएसपी श्री ज्ञान रंजन, पेलावल अंचल के पु०नि० सपन महथा, सदर थाना प्रभारी चन्द्रशेखर कुमार, कटकमदाग थाना प्रभारी सरोज कुमार, कोर्रा थाना प्रभारी नेमधारी रजक, गद्दी थाना प्रभारी ईकबाल हुसैन, उरीमारी ओ०पी० प्रभारी रघु उरांव, पु०अ०नि० चितरंजन कुमार, पु०अ०नि० पुन्नु यादव, पु०अ०नि० बिट्टू रजक, स०अ०नि० लक्ष्मण तिवारी, मनोज कुमार और हजारीबाग पुलिस की तकनीकी शाखा की मुख्य भूमिका रही.

    संपादकीय विश्लेषण: मासूमों की सुरक्षा और डिजिटल समाज में छिपे भेड़िए (Editorial)

    विश्वास की आड़ में छिपी दरिंदगी; समाज के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत

    हजारीबाग के कटकमदाग में घटित यह दोहरा हत्याकांड सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के ताने-बाने और बच्चों की सुरक्षा पर एक गहरा आघात है। महज 11 वर्ष की बच्ची और 3 वर्ष के मासूम को मोबाइल दिलाने और घूमाने के बहाने मौत के घाट उतार देना यह दर्शाता है कि अपराधी किस हद तक संवेदनहीन हो चुके थे। ओला शोरूम के एक कर्मचारी पर भरोसा करना उन मासूमों के लिए काल बन गया। हजारीबाग पुलिस और विशेषकर एसपी द्वारा गठित एसआईटी टीम की जितनी सराहना की जाए वो कम है, जिसने सीसीटीवी और तकनीकी साक्ष्यों का सटीक विश्लेषण कर महज कुछ ही दिनों के भीतर न केवल दोनों शवों को बरामद किया, बल्कि भाग रहे हत्यारे को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

    ​हालांकि, यह घटना हर माता-पिता और अभिभावक के लिए एक गंभीर सबक है। आज के दौर में बच्चों को परिचितों या आस-पास काम करने वाले लोगों के भरोसे अकेला छोड़ना कितना खतरनाक हो सकता है, यह इस घटना से साफ है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अपना काम बखूबी कर दिया है, अब न्यायपालिका से उम्मीद है कि ऐसे दरिंदे को कम से कम समय में स्पीडी ट्रायल (Speedy Trial) चलाकर फांसी जैसी कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि हजारीबाग ही नहीं बल्कि पूरे देश में कानून का खौफ कायम हो सके।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): प्रेस-विज्ञप्ति, पुलिस अधीक्षक का कार्यालय, हजारीबाग (दिनांक– 03.06.2026)

    Hamar Hazaribagh: हजारीबाग में दो दिवसीय खो-खो टूर्नामेंट संपन्न; चैंपियंस और वॉरियर क्लब बने विजेता, खिलाड़ियों ने दिखाया दम

    खेलों से जुड़ेगा युवा, तो नशामुक्त होगा समाज: हजारीबाग खो-खो प्रतियोगिता के समापन पर बोले युवा समाजसेवी हर्ष अजमेरा

    महिला वर्ग में चैंपियंस क्लब और पुरुष वर्ग में वॉरियर क्लब ने जीता खिताब; जिला खेल पदाधिकारी कैलाश राम ने बढ़ाया खिलाड़ियों का हौसला

    विशेष संवाददाता, हजारीबाग

    क्रीड़ा भारती हजारीबाग के तत्वावधान में स्थानीय स्टेडियम में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय खो-खो टूर्नामेंट का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रतियोगिता में महिला एवं पुरुष वर्ग की कुल सात टीमों ने हिस्सा लिया और अपने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन किया। फाइनल मुकाबलों में खिलाड़ियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली, जिसका मैदान में मौजूद खेल प्रेमियों और दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।

     हजारीबाग स्थानीय स्टेडियम में आयोजित खो-खो टूर्नामेंट के समापन पर विजेता और उपविजेता टीम के खिलाड़ियों को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित करते मुख्य अतिथि हर्ष अजमेरा, विभाग संयोजक विकास केसरी व अन्य।

    रोमांचक मुकाबलों के परिणाम: चैंपियंस और वॉरियर क्लब ने मारी बाजी

    ​टूर्नामेंट के अंतिम दिन महिला और पुरुष दोनों वर्गों के फाइनल मुकाबले खेले गए:

    • महिला वर्ग का फाइनल: महिला वर्ग के खिताबी मुकाबले में हजारीबाग चैंपियंस क्लब ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए खो-खो अकादमी, हजारीबाग को 12-5 के बड़े अंतर से पराजित कर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
    • पुरुष वर्ग का फाइनल: पुरुष वर्ग का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और सांसें रोक देने वाला रहा। इसमें हजारीबाग वॉरियर क्लब ने एसएसबीएम (SSBM) को 20-19 के बेहद करीबी (1 अंक) अंतर से हराकर चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम की।

    खेल पदाधिकारी और अतिथियों ने बढ़ाया उत्साह

    ​प्रतियोगिता के दौरान हजारीबाग के जिला खेल पदाधिकारी कैलाश राम ने खिलाड़ियों से मैदान पर परिचय प्राप्त किया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के हुनर की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया।

    ​समापन सह पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हजारीबाग ओलंपिक संघ के अध्यक्ष व युवा समाजसेवी हर्ष अजमेरा उपस्थित थे। उनके साथ क्रीड़ा भारती के विभाग संयोजक विकास केसरी, डॉ. राहुल, डॉ. विक्रम, चंद्रशेखर दास और अजीत कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। क्रीड़ा भारती के सदस्यों ने बुके और स्मृति चिह्न देकर सभी अतिथियों को सम्मानित किय

    • हजारीबाग स्थानीय स्टेडियम में आयोजित खो-खो टूर्नामेंट के समापन पर विजेता और उपविजेता टीम के खिलाड़ियों को ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित करते मुख्य अतिथि हर्ष अजमेरा, विभाग संयोजक विकास केसरी व अन्य।

    युवा खेलों से जुड़कर नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से रहें दूर: हर्ष अजमेरा

    ​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि हर्ष अजमेरा ने कहा:

    "खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में अनुशासन, आत्मविश्वास और एक बेहतर व्यक्तित्व का निर्माण करता है। आज के समय में हमारे युवाओं को खेलों से अधिक से अधिक जुड़ना चाहिए ताकि वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रह सकें। एक स्वस्थ युवा ही सशक्त समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।"


    ​वहीं क्रीड़ा भारती के विभाग संयोजक विकास केसरी ने संगठन के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे खेलों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण की भूमिका तय की जा रही है। समारोह के अंत में अतिथियों द्वारा विजेता और उपविजेता टीमों के खिलाड़ियों को मेडल और ट्रॉफी प्रदान की गई। क्रीड़ा भारती हजारीबाग के अध्यक्ष भैया मुरारी सिन्हा ने प्रतियोगिता को सफल बनाने वाले सभी अंपायरों, रेफरी और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

    मौके पर उपस्थित गणमान्य:

    इस खेल उत्सव के अवसर पर मुख्य रूप से बहादुर राम, सिटी गोप, अविनाश कुमार, राहुल कुमार, रोबिन कुमार, नूतन कुजूर, अमित कुमार सहित भारी संख्या में स्थानीय खेल प्रेमी और खिलाड़ी उपस्थित थे।

    खेल मार्गदर्शिका (News Prahari Sports Guide & Rules Context)

    ​📌 न्यूज प्रहरी स्पोर्ट्स इनसाइट: खो-खो खेल के बुनियादी नियम और लाभ

    1. टीम संरचना: खो-खो एक पारंपरिक भारतीय मैदानी खेल है, जिसमें प्रत्येक टीम में 12 खिलाड़ी होते हैं, लेकिन मैदान पर एक समय में केवल 9 खिलाड़ी ही उतरते हैं।
    2. मैच की अवधि: यह खेल दो पारियों (Innings) में खेला जाता है। एक पारी में चेसिंग (पीछा करना) और डिफेंडिंग (बचना) के लिए 9-9 मिनट के दो टर्न होते हैं।
    3. शारीरिक और मानसिक लाभ: खो-खो खेलने से खिलाड़ियों में गजब की फुर्ती (Agility), स्टेमिना और रणनीतिक सोच का विकास होता है। यह कम खर्चीला और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय खेल है।

    संपादकीय विश्लेषण: स्वदेशी खेलों को प्रोत्साहन और युवाओं का नशामुक्त भविष्य (Editorial)

    क्रिकेट के चकाचौंध के बीच खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों को जिला स्तर पर जिंदा रखना सराहनीय

    हजारीबाग में क्रीड़ा भारती द्वारा खो-खो टूर्नामेंट का सफल आयोजन इस मायने में विशेष है कि आज के डिजिटल युग में जब युवा वर्ग मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया में खोया है, तब उन्हें मैदान तक वापस लाना एक बड़ी उपलब्धि है। खो-खो और कबड्डी जैसे स्वदेशी खेल न केवल कम बजट में तैयार हो जाते हैं, बल्कि यह खिलाड़ियों को शारीरिक रूप से बेहद सुदृढ़ बनाते हैं। महिला वर्ग में चैंपियंस क्लब और पुरुष वर्ग में वॉरियर क्लब की जीत यह दर्शाती है कि हजारीबाग के स्थानीय क्लबों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है।

    ​मुख्य अतिथि हर्ष अजमेरा का यह कथन कि 'युवा खेलों से जुड़कर नशामुक्त समाज का निर्माण करें', आज के परिप्रेक्ष्य में बेहद प्रासंगिक है। हजारीबाग सहित झारखंड के कई जिलों में युवाओं के बीच बढ़ता नशा एक गंभीर प्रशासनिक और सामाजिक चिंता का विषय बन चुका है। खेलों के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ना इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान हो सकता है। हालांकि, जिला खेल विभाग को केवल टूर्नामेंट कराने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि इन विजेता खिलाड़ियों को आगे राज्य और राष्ट्रीय स्तर के कैंपों के लिए उन्नत प्रशिक्षण (Coaching) और स्पोर्ट्स डाइट की सुविधा मिले। यदि स्थानीय स्तर पर ऐसे खिलाड़ियों को सरकारी या निजी क्षेत्रों में प्रोत्साहन और रोजगार के अवसर मिलने लगें, तो झारखंड का यह हुनर देश दुनिया में राज्य का नाम रोशन करेगा।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): क्रीड़ा भारती, हजारीबाग (टूर्नामेंट समापन प्रेस विज्ञप्ति)

    Hamar Jharkhand: JAC ने बढ़ाई JTET 2026 ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि; अब 20 जून तक फॉर्म भर सकेंगे अभ्यर्थी, अधिसूचना जारी

    JTET परीक्षा फॉर्म भरने में मोबाइल-ईमेल की समस्या होगी दूर: पुराने अभ्यर्थियों को विशेष अवसर देगा झारखंड अधिविद्य परिषद; जानें नया नियम

    विज्ञप्ति संख्या 39/2026 जारी; ऑनलाइन आवेदन की समय-सीमा विस्तारित, तिथि समाप्त होने के बाद खुलेगा विशेष सुधार विंडो

    विशेष संवाददाता, रांची

    झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक राहत भरी खबर है। झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC), रांची ने विभागीय निदेश के आलोक में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET), 2026 के लिए ऑनलाइन परीक्षा आवेदन प्रपत्र (Application Form) जमा करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है। वेब नोटिस 19/2026 के क्रम में लिए गए इस निर्णय के तहत अभ्यर्थी अब आगामी 20 जून 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपने आवेदन ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।

    झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति संख्या 39/2026, जिसमें आवेदन तिथि बढ़ाने और विशेष अवसर देने की घोषणा की गई है।

    पुराने अभ्यर्थियों की तकनीकी समस्या पर परिषद का बड़ा फैसला

    ​विज्ञप्ति के अनुसार, झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा, 2024 के लिए पूर्व में आवेदन कर चुके कतिपय (कुछ) अभ्यर्थियों को इस बार फॉर्म भरने में तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। कई अभ्यर्थियों के पुराने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी अनुपलब्ध (बंद या खो जाने) होने के कारण वर्ष 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रपत्र भरने में कठिनाई आ रही थी। अभ्यर्थियों द्वारा लगातार परिषद से इसके बदले अन्य विकल्प (Alternative Option) देने का अनुरोध किया जा रहा था।

    ​अभ्यर्थियों के व्यापक हित और प्राप्त अनुरोधों पर सम्यक् विचारोपरांत परिषद ने यह स्पष्ट किया है कि:

    • ​मात्र ऐसे प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए, जिन्हें मोबाइल या ईमेल अनुपलब्धता के कारण दिक्कत हो रही है, ऑनलाइन आवेदन की सामान्य तिथि समाप्त होने के उपरान्त विशेष रूप से एक अतिरिक्त अवसर (Special Window) प्रदान किया जाएगा।
    • ​इस निर्धारित विशेष अवधि के दौरान ऐसे अभ्यर्थी वेबसाइट पर अपनी 'सामान्य विवरणी' (Basic Details) अंकित करते हुए आसानी से अपना परीक्षा आवेदन प्रपत्र भर सकेंगे।
    • ​इससे संबंधित विस्तृत सूचना और प्रक्रिया जल्द ही परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी।

    ​यह आदेश झारखंड अधिविद्य परिषद के अध्यक्ष के आदेश से परीक्षा नियंत्रक द्वारा 02 जून 2026 (पत्रांक: JAC/JTET/2406/24-Secy/470/26) को जारी किया गया है।

    अभ्यर्थियों के लिए मार्गदर्शिका (News Prahari JTET Application Guide)

    ​📌 न्यूज प्रहरी की सलाह: फॉर्म भरते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    1. समय का सदुपयोग: जिन अभ्यर्थियों के पास सभी क्रेडेंशियल्स दुरुस्त हैं, वे अंतिम तिथि (20 जून) का इंतजार किए बिना अपना फॉर्म समय पर सबमिट कर लें ताकि आखिरी दिनों में सर्वर डाउन होने की समस्या से बचा जा सके।
    2. पुराने अभ्यर्थी रखें धैर्य: जिन भाई-बहनों का पुराना मोबाइल या ईमेल खो गया है, वे परेशान न हों। सामान्य आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के ठीक बाद JAC आपके लिए अलग से लिंक एक्टिव करेगा, जिसकी पल-पल की अपडेट News Prahari पर उपलब्ध कराई जाएगी।

    संपादकीय विश्लेषण: अभ्यर्थियों की मांग पर संवेदनशील पहल, पर स्थायी समाधान जरूरी (Editorial)

    समय विस्तार से मिली राहत, लेकिन तकनीकी रूप से मजबूत सिस्टम समय की मांग

    झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) द्वारा JTET 2026 के आवेदन की तिथि को 20 जून तक बढ़ाना और पुराने अभ्यर्थियों की मोबाइल-ईमेल वाली व्यावहारिक समस्या का संज्ञान लेना एक बेहद संवेदनशील और सराहनीय कदम है। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी परीक्षाओं में तकनीकी त्रुटियों के कारण सैकड़ों योग्य अभ्यर्थी आवेदन से वंचित रह जाते हैं या फिर उन्हें अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। परिषद ने समय रहते नोटिफिकेशन जारी कर छात्रों के असमंजस को दूर कर दिया है।

    ​हालांकि, इस प्रकार की तकनीकी समस्याएं हमारे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की एक बड़ी कमी को भी उजागर करती हैं। जब किसी अभ्यर्थी का पुराना डेटाबेस जैक के पास पहले से सुरक्षित है, तो नए फॉर्म में आधार प्रमाणीकरण या माता-पिता के नाम और जन्मतिथि के संयोजन से लॉगिन करने का विकल्प शुरुआत से ही उपलब्ध होना चाहिए था। इसके अभाव में छात्रों को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। भविष्य में होने वाली परीक्षाओं के लिए जेएसएससी (JSSC) और जैक (JAC) जैसी संस्थाओं को वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) जैसी मजबूत प्रणाली विकसित करनी चाहिए, ताकि मोबाइल या ईमेल बदलने पर भी छात्र का करियर दांव पर न लगे। बहरहाल, प्रशासन की यह तत्परता सराहनीय है और उम्मीद है कि विशेष विंडो की प्रक्रिया को भी पारदर्शी और सरल रखा जाएगा।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): परीक्षा नियंत्रक, झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC), रांची — विज्ञप्ति संख्या: 39/2026

    Hamar Ramgarh: रामगढ़ में DMFT फंड से बदल जाएगी तस्वीर; खेल स्टेडियम, आधुनिक टाउन हॉल और गोला डेली मार्केट कॉम्प्लेक्स को मिली बड़ी मंजूरी

    रामगढ़ समाहरणालय में DMFT की महा-बैठक: हर महीने आने वाले ₹25 करोड़ से चमकेगा जिला; चुम्बा जलापूर्ति योजना होगी बहाल, 1000 चापाकल सुधरेंगे

    उपायुक्त ऋतुराज, विधायक ममता देवी, रौशन लाल चौधरी और निर्मल महतो की मौजूदगी में ऐतिहासिक निर्णय; पेयजल को सर्वोच्च प्राथमिकता, रजरप्पा में बनेगा क्यू कॉम्प्लेक्स

    विशेष संवाददाता, रायगढ़ 

    रामगढ़ जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और जिले के स्थायी विकास को एक नई गति देने के लिए बुधवार को रामगढ़ समाहरणालय में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। भारत सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं प्रावधानों के अंतर्गत संचालित होने वाले इस फंड की समीक्षा बैठक में जनहित और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई ऐतिहासिक प्रस्तावों पर अंतिम सहमति बनी। बैठक में निर्णय लिया गया कि जनता की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पेयजल, खेल और सामुदायिक विकास जैसे प्राथमिक व गैर-प्राथमिक दोनों क्षेत्रों की योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाएगा।

    रामगढ़ समाहरणालय सभाकक्ष में जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की शासी परिषद बैठक की अध्यक्षता करते उपायुक्त  ऋतुराज, साथ में उपस्थित माननीय विधायकगण एवं प्रशासनिक अधिकारी।

    प्रतिमाह मिलेंगे ₹20 से ₹25 करोड़, पेयजल व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता

    ​बैठक में जानकारी दी गई कि जिले के विकास के लिए DMFT मद से लगभग ₹20 से ₹25 करोड़ प्रतिमाह की राशि उपलब्ध हो रही है। इस भारी-भरकम राशि का जनहित में प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने मुकम्मल खाका तैयार किया है:

    • 1000 चापाकलों की मरम्मत: जिले में पेयजल संकट को दूर करने के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता के तहत 1000 बंद पड़े चापाकलों की मरम्मत का कार्य तत्काल प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। आगामी 10 से 15 दिनों के भीतर ये चापाकल पुनः चालू हो जाएंगे।
    • 35 जलापूर्ति योजनाएं होंगी पुनर्जीवित: जिले की 35 छोटी-बड़ी बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं को दोबारा चालू किया जाएगा।
    • चुम्बा जलापूर्ति योजना की बहाली: वर्षों से बंद पड़ी प्रसिद्ध चुम्बा जलापूर्ति योजना को DMFT फंड के माध्यम से पुनर्स्थापित (Restore) करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे क्षेत्रवासियों को जल्द ही शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा।

    रामगढ़ को मिलेगा समर्पित खेल स्टेडियम और आधुनिक टाउन हॉल

    ​बैठक में रामगढ़ शहर और जिले के युवाओं के लिए दो बड़ी और बहुप्रतीक्षित सौगातों पर मुहर लगी। जिले के प्रतिभावान खिलाड़ियों के लिए एक समर्पित खेल स्टेडियम के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इसके अलावा, बड़े सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सार्वजनिक आयोजनों को गरिमापूर्ण तरीके से आयोजित करने के लिए शहर में एक आधुनिक टाउन हॉल (Town Hall) का निर्माण कराया जाए ।

    गोला डेली मार्केट और रजरप्पा मंदिर के लिए विशेष योजनाएं स्वीकृत

    ​ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा-सुविधा के लिए बैठक में कई और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किए गए:

    • गोला डेली मार्केट कॉम्प्लेक्स: गोला बाजार क्षेत्र में पार्किंग और यातायात की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक भव्य मार्केट कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा। इसके साथ ही हजारों किसानों और व्यवसायियों के लिए 'गोला डेली मार्केट कॉम्प्लेक्स योजना' को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी गई है।
    • रजरप्पा मंदिर क्यू कॉम्प्लेक्स: प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा मंदिर में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अत्याधुनिक क्यू कॉम्प्लेक्स (Queue Complex) का निर्माण और पूरे परिसर में समुचित प्रकाश व्यवस्था (High Mask Lights) की जाएगी।
    • हाथी प्रभावित क्षेत्रों में सोलर लाइट: वन्यजीवों और हाथियों के प्रभाव वाले ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा के मद्देनजर बड़े पैमाने पर सोलर लाइटें लगाई जाएंगी।
    • स्कूलों की बाउंड्री वॉल और भूमि सुरक्षा: सरकारी विद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और विशेषकर छोटानागपुर कॉलेज सहित अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए बाउंड्री वॉल निर्माण सुनिश्चित करने के आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसके अलावा, हर पंचायत में भूमि की उपलब्धता के आधार पर सर्वसुविधायुक्त सामुदायिक भवन बनाए जाएंगे।

    बैठक में ये जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे उपस्थित

    ​इस महा-मंथन बैठक में मुख्य रूप से रामगढ़ के उपायुक्त श्री ऋतुराज, रामगढ़ विधायक श्रीमती ममता देवी, बड़कागांव विधायक श्री रौशन लाल चौधरी, मांडू विधायक श्री निर्मल महतो उर्फ तिवारी महतो, उप विकास आयुक्त (DDC) श्री आशीष अग्रवाल, छावनी परिषद रामगढ़ के मुख्य अधिशासी अधिकारी (CEO) श्री विवेक सिंह, रामगढ़ वन प्रमंडल के प्रभागीय वन पदाधिकारी (DFO) श्री नितीश कुमार सहित विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक विभागों के वरीय पदाधिकारी उपस्थित रहे।

    प्रशासनिक मार्गदर्शिका (News Prahari DMFT Fund Tracker & Welfare Guide)

    ​📌 न्यूज प्रहरी की तकनीकी इनसाइट: क्या होता है DMFT फंड और कैसे बदलता है यह गांवों की तकदीर?

    जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) एक वैधानिक संस्था है, जिसे प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना (PMKKKY) के तहत खनन प्रभावित जिलों में स्थापित किया गया है। खनन कंपनियों द्वारा रॉयल्टी का एक निश्चित हिस्सा इस ट्रस्ट में जमा किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य खनन से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण को सुधारना है। न्यूज प्रहरी रामगढ़ जिला प्रशासन और स्थानीय विधायकों के इस साझा प्रयास की सराहना करता है, क्योंकि मासिक ₹25 करोड़ के फंड का अगर सही और समयबद्ध ऑडिट हो, तो रामगढ़ इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में राज्य का रोल मॉडल बन सकता है।


    संपादकीय विश्लेषण: फंड का आना सुखद, लेकिन योजनाओं का समय पर पूरा होना असली चुनौती (Editorial)

    चुम्बा जलापूर्ति की बहाली और स्टेडियम का निर्माण कागजों से निकलकर धरातल पर कब उतरेगा?

    रामगढ़ समाहरणालय में हुई DMFT की बैठक जनहित के दृष्टिकोण से बेहद उम्मीदें जगाने वाली है। विशेषकर गोला क्षेत्र के किसानों के लिए डेली मार्केट कॉम्प्लेक्स की मंजूरी और रजरप्पा में क्यू कॉम्प्लेक्स का निर्माण, स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था दोनों को बूस्ट करेगा। वर्षों से बंद पड़ी चुम्बा जलापूर्ति योजना को दोबारा जिंदा करने का निर्णय यह दिखाता है कि प्रशासन पुरानी और मृतप्राय योजनाओं को कबाड़ बनाने के बजाय उनका पुनरुद्धार करने के प्रति गंभीर है।

    ​हालांकि, इतिहास गवाह है कि DMFT फंड की सबसे बड़ी समस्या 'फंड की कमी' नहीं, बल्कि 'योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली प्रशासनिक देरी' और 'गुणवत्ता से समझौता' रही है। हर महीने ₹20 से ₹25 करोड़ की आमदनी वाले इस जिले में यदि 1000 चापाकलों को ठीक करने में 15 दिन से अधिक का समय लगता है, तो यह तंत्र की शिथिलता होगी। उपायुक्त ऋतुराज और स्थानीय विधायकों की इस साझा मुस्तैदी को अब ठेकेदारों और कार्यपालक अभियंताओं (Engineers) पर कड़ा नियंत्रण रखना होगा। छोटानागपुर कॉलेज की भूमि सुरक्षा और स्कूलों की बाउंड्री वॉल का काम बिना किसी भू-विवाद के समय पर पूरा होना चाहिए। यदि इस भारी-भरकम राशि का थर्ड-पार्टी ऑडिट (Third-Party Audit) कराया जाए और आम जनता के लिए इसकी प्रगति रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर सार्वजनिक की जाए, तो रामगढ़ में पारदर्शिता की एक नई मिसाल पेश होगी।

  •   ​रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
  • ​ समाचार स्रोत (Source): जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट                    (DMFT) शासी परिषद बैठक — रामगढ़ समाहरणालय
  • Hamar Hazaribagh: शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज के 'ब्लैकआउट' पर भड़के सांसद मनीष जायसवाल; बोले— 'प्रबंधन नाकारा है, डीजल मैं दूंगा पर अंधेरे में नहीं रहेंगे मरीज'

    हजारीबाग: 300 बेड का मेडिकल अस्पताल हुआ अंधेरा, अधीक्षक बोले- 'डीजल नहीं मिल रहा'; सांसद मनीष जायसवाल ने लिया आड़े हाथ,दी बड़ी चेतावनी

    ऑक्सीजन हादसे के बाद अब बिजली संकट से जूझा अस्पताल; सांसद प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने आधी रात को ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर खोला मोर्चा

    विशेष संवाददाता, हजारीबाग 

    हजारीबाग के सबसे बड़े सरकारी स्वास्थ्य केंद्र, शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुप्रबंधन और संवेदनहीनता का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अभी एसएनसीयू (SNCU) में ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने का हादसा शांत भी नहीं हुआ था कि पूरा अस्पताल परिसर अचानक 'ब्लैकआउट' (घने अंधेरे) में डूब गया। करीब 300 बेड वाले इस अति व्यस्त अस्पताल में बिजली गुल होने के बाद जनरेटर न चलने से मरीजों और उनके परिजनों की जिंदगी पूरी तरह दांव पर लग गई। अस्पताल में पसरे इस अंधेरे और चीख-पुकार के बीच जागरूक मरीजों ने इसकी सूचना तत्काल हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी को दी। सूचना मिलते ही रंजन चौधरी ने आधी रात को मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और इसकी तस्वीरें सीधे सांसद मनीष जायसवाल तक पहुंचाईं।

    शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग की तस्वीर, जहां जनरेटर में डीजल न होने के कारण पूरा परिसर घने अंधेरे में डूब गया था।

    सांसद ने अधीक्षक डॉ के.के. सिंह से सीधे फोन पर किया जवाब-तलब

    ​अस्पताल के भीतर फैले घने अंधेरे और तड़पते मरीजों की तस्वीरें जैसे ही सांसद मनीष जायसवाल के पास पहुंचीं, तो उन्होंने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। सांसद ने तुरंत अस्पताल के अधीक्षक (Superintendent) डॉ. के.के. सिंह को सीधे फोन लगाया और इस घोर लापरवाही पर कड़ा जवाब-तलब किया।

    ​फोन पर बातचीत के दौरान अस्पताल अधीक्षक ने एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना दलील देते हुए स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि 'बाजार में उन्हें जनरेटर चलाने के लिए डीजल ही नहीं मिल रहा है।'

    'अधीक्षक का बयान हजारीबाग का दुर्भाग्य'— सांसद का तीखा हमला

    ​अधीक्षक के इस गैर-जिम्मेदाराना रुख पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि अस्पताल का एक सक्षम और सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी अगर यह लाचारी दिखाता है कि उसे इमरजेंसी सेवा के लिए डीजल नहीं मिल रहा, तो इससे बड़ा हजारीबाग का दुर्भाग्य और कुछ नहीं हो सकता। सांसद ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अधीक्षक का यह वक्तव्य खुद यह साबित करता है कि वे इस जिम्मेदार पद के बिल्कुल काबिल नहीं हैं और प्रबंधन पूरी तरह नाकारा हो चुका है।

    शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग की तस्वीर, जहां जनरेटर में डीजल न होने के कारण पूरा परिसर घने अंधेरे में डूब गया था।

    सांसद मनीष जायसवाल ने खुद के स्तर से डीजल उपलब्ध कराने की घोषणा की

    ​अस्पताल में भर्ती सैकड़ों मरीजों की तकलीफ, वेंटिलेटर पर मौजूद मासूमों और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने अंततः एक बड़ा और मानवीय फैसला लिया। उन्होंने दो टूक लहजे में अस्पताल प्रशासन से कहा:

    "अगर मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन को पूरे जिले में कहीं डीजल नहीं मिल रहा है, तो वह खुद अपने व्यक्तिगत स्तर से अस्पताल के जनरेटर के लिए डीजल उपलब्ध कराएंगे। लेकिन हजारीबाग के इस मुख्य अस्पताल को किसी भी हाल में अंधेरे (ब्लैकआउट) में रहने नहीं दिया जाएगा और स्वास्थ्य सेवाएं बाधित नहीं होने दी जाएंगी।"


    ​नियमतः, देश के किसी भी कानून के तहत कोई भी पेट्रोल पंप संचालक अस्पताल जैसी आवश्यक आपातकालीन सेवा (Emergency Services) के लिए डीजल या ईंधन देने से इनकार नहीं कर सकता है और न ही इस पर कोई प्रशासनिक या चुनावी बाध्यता लागू होती है। इसके बावजूद प्रबंधन का यह रवैया उनकी घोर लापरवाही को दर्शाता है।

    अस्पताल बिजली बैकअप मार्गदर्शिका (Emergency Power Audit Guidelines)

    ​📌 न्यूज प्रहरी की तकनीकी सलाह: सरकारी अस्पतालों में 'ब्लैकआउट' रोकने के अनिवार्य नियम

    1. 72 घंटे का फ्यूल स्टॉक रिजर्व: किसी भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आपातकालीन जनरेटरों (DG Sets) के लिए कम से कम 3 दिन (72 घंटे) का डीजल स्टॉक हमेशा एडवांस में स्टोर रूम में रिजर्व होना चाहिए।
    2. ऑटोमैटिक चेंजओवर स्विच (AMF Panel): मुख्य बिजली कटने के ठीक 30 सेकंड के भीतर अस्पताल के क्रिटिकल वार्ड्स (SNCU, ICU, OT) में ऑटोमैटिक जनरेटर चालू होना अनिवार्य है, ताकि मैनुअल ऑपरेटर का इंतजार न करना पड़े।
    3. फ्यूल वेंडिंग एग्रीमेंट: अस्पताल प्रशासन का स्थानीय पेट्रोल पंपों के साथ लिखित इमरजेंसी एग्रीमेंट होना चाहिए, जिसके तहत किसी भी वीआईपी या क्रिटिकल सिचुएशन में ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित की जा सके।

    संपादकीय विश्लेषण: लाचारी का बहाना या आपराधिक लापरवाही? (Editorial)

    जब रक्षक ही लाचार हो जाएं, तो जनता किसके भरोसे रहे?

    शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहले ऑक्सीजन पाइपलाइन का फटना और उसके तुरंत बाद पूरे अस्पताल का ब्लैकआउट हो जाना यह साबित करता है कि इस संस्थान का प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह चरमरा चुका है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. के.के. सिंह का यह कहना कि 'डीजल नहीं मिल रहा है', एक प्रशासनिक अधिकारी के मुंह से बेहद हास्यास्पद और खतरनाक लगता है। एक सरकारी मेडिकल कॉलेज का प्रमुख अगर ईंधन जैसी बुनियादी चीज के लिए हाथ खड़े कर दे, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही मानी जाएगी।

    ​हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल और उनके प्रतिनिधि रंजन चौधरी की यह सजगता निश्चित रूप से सराहनीय है कि वे रात के अंधेरे में भी मरीजों की आवाज बन रहे हैं और अपने स्तर से डीजल देने की पेशकश कर रहे हैं। लेकिन यह एक स्थायी समाधान नहीं है। आज सांसद डीजल दे देंगे, कल कोई और मदद कर देगा, पर उस विशाल सरकारी बजट का क्या होता है जो इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के लिए हर साल जारी किया जाता है? आपातकालीन सेवाओं के लिए कानूनन डीजल ब्लॉक नहीं किया जा सकता, फिर अधीक्षक ने लिखित रूप से जिला प्रशासन या उपायुक्त से मदद क्यों नहीं मांगी? इस पूरे मामले की स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा जांच होनी चाहिए। ऐसे अधिकारियों को पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जो मरीजों को अंधेरे में छोड़कर चैन की नींद सो रहे हों। हजारीबाग के नागरिकों को स्वास्थ्य के नाम पर खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होना चाहिए।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): प्रत्यक्षदर्शी एवं ग्राउंड जीरो कवरेज (शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल)

    Hamar Hazaribagh: मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू में फटा ऑक्सीजन पाइप, मची अफरा-तफरी; सांसद मनीष जायसवाल की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा

    हजारीबाग मेडिकल अस्पताल में आधी रात को टली बड़ी त्रासदी: ऑक्सीजन पाइप फटने से वेंटिलेटर पर मौजूद नवजातों पर मंडराया संकट, बैकअप तैयार कर बचाई जान

    सांसद प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने आधी रात को अस्पताल प्रबंधन को जगाया; निजी अस्पतालों में शिफ्टिंग की थी तैयारी, वार्ड बॉय आंशिक रूप से झुलसा

    विशेष संवाददाता, हजारीबाग

    हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अति संवेदनशील नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) में बीती रात करीब 11:00 बजे एक भयानक हादसा होने से बाल-बाल बच गया। अस्पताल परिसर के एसएनसीयू के बाहर अचानक ऑक्सीजन पाइपलाइन से जम्बो सिलेंडर में जोड़ा गया पाइप जोरदार आवाज के साथ फट गया और उसमें स्पार्क के कारण आग लग गई। पाइपलाइन फटने से पूरे एसएनसीयू वार्ड की ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह ठप्प हो गई, जिससे वहां वेंटिलेटर पर मौजूद तीन गंभीर शिशुओं सहित अन्य नवजातों की जान पर सीधा संकट मंडराने लगा। इस अचानक आई विपदा से बच्चों के परिजनों के बीच कोहराम और चीख-पुकार मच गई।

    शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग का एसएनसीयू वार्ड, जहां आधी रात को ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।

    जागरूक परिजन की सूचना पर सांसद मनीष जायसवाल की त्वरित संवेदनशीलता

    ​वार्ड में भर्ती एक बच्चे के जागरूक परिजन जितेंद्र कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद मनीष जायसवाल को फोन पर हादसे की लाइव जानकारी दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सांसद ने अद्वितीय तत्परता दिखाई और बिना एक पल गंवाए अपने सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी को तुरंत अस्पताल पहुंचने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सांसद ने खुद एसएनसीयू में तैनात ऑन-ड्यूटी महिला शिशु चिकित्सक से फोन पर बात कर हालात की समीक्षा की और निर्देश दिया कि यदि जरूरत पड़े, तो बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें तत्काल शहर के किसी भी बेहतर निजी अस्पताल (Private Hospital) में शिफ्ट कराया जाए, जिसका खर्च वह स्वयं वहन करने को तैयार थे।

    • शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग का एसएनसीयू वार्ड, जहां आधी रात को ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।


    आधी रात को जुटा प्रशासनिक अमला, युद्ध स्तर पर बदला गया पाइप

    ​सांसद के निर्देश पर मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी तुरंत मेडिकल कॉलेज पहुंचे और अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजकिशोर तथा शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. क्षितिज आनंद से संपर्क कर तत्काल आपातकालीन हस्तक्षेप का आग्रह किया।

    • तकनीकी सेल की कार्रवाई: उपाधीक्षक डॉ. राजकिशोर की त्वरित पहल पर अस्पताल की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। जागरूक परिजन जितेंद्र कुमार सिंह और टीम की कड़ी मशक्कत के बाद फटे हुए ऑक्सीजन पाइप को हटाकर नया पाइप लगाया गया और सप्लाई बहाल की गई।
    • निजी अस्पतालों का बैकअप: शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ. क्षितिज आनंद भी खुद वार्ड पहुंचे। उन्होंने एहतियातन शहर के कई निजी अस्पतालों से बात कर बैकअप वेंटिलेटर बेड तैयार करवा लिए थे। हालांकि, पाइपलाइन समय रहते ठीक हो जाने और ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह सुचारू पाए जाने के कारण बच्चों को शिफ्ट करने की नौबत नहीं आई और सभी नवजात सुरक्षित हैं।

    ​इस भीषण हादसे के दौरान जब पाइपलाइन में आग लगी, तो उसे बुझाने के साहसिक प्रयास में अस्पताल के एक जांबाज वार्ड बॉय का हाथ भी आंशिक रूप से झुलस गया, जिसे प्राथमिक उपचार दिया गया है।

    सांसद प्रतिनिधि ने प्रबंधन की लापरवाही पर उठाए तीखे सवाल

    ​अस्पताल पहुंचे सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ही ऑक्सीजन पाइपलाइन का समय पर मेंटेनेंस और रूटीन ऑडिट नहीं किया जाता है, जिसके चलते इतनी बड़ी घटना घटी। अगर सही समय पर सांसद की संवेदनशीलता और जागरूक नागरिकों का सहयोग न मिलता, तो सोए हुए प्रबंधन की वजह से आज हजारीबाग एक बड़ी और दर्दनाक मानवीय त्रासदी का गवाह बन सकता था।

    अस्पताल सुरक्षा मार्गदर्शिका (SNCU Safety Advisory for Hospitals)

    ​📌 न्यूज प्रहरी की तकनीकी सलाह: मेडिकल ऑक्सीजन सिस्टम के लिए जरूरी सुरक्षा मानक

    1. साप्ताहिक प्रेशर व लीकेज टेस्ट: किसी भी मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्डों की ऑक्सीजन पाइपलाइन और मैनिफोल्ड सिस्टम का हर हफ्ते प्रेशर ऑडिट और लीकेज टेस्ट होना अनिवार्य है।
    2. ऑटो-कट और समानांतर बैकअप: मुख्य पाइपलाइन फटने की स्थिति में आटोमेटिक अलार्म बजना चाहिए और वार्ड के भीतर कम से कम 2 से 4 घंटे का स्टैंडबाय जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर बैकअप हमेशा ऑन-मोड में रहना चाहिए ताकि मुख्य सप्लाई कटने पर वेंटिलेटर बंद न हों।
    3. एंटी-फायर कोटिंग व पीपीई किट: ऑक्सीजन जोन के पास फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) और वार्ड बॉयज के लिए बेसिक फायर सेफ्टी ग्लव्स हमेशा उपलब्ध होने चाहिए।

    संपादकीय विश्लेषण: मुस्तैदी की तारीफ, लेकिन लापरवाही पर जवाबदेही कब? (Editorial)

    नेताओं की संवेदनशीलता ने बचाई जान, लेकिन तंत्र की ढिलाई का इलाज जरूरी

    शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसएनसीयू की यह घटना देश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों (जैसे गोरखपुर त्रासदी) में हुए पूर्व के हादसों की याद दिलाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी या तकनीकी खराबी ने कई मासूमों को निगल लिया था। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल और उनके प्रतिनिधि रंजन चौधरी की आधी रात को दिखाई गई सक्रियता निश्चित रूप से मिसाल के काबिल है, जिसने प्रशासनिक अमले को बेड से उठकर वार्ड तक दौड़ने पर मजबूर किया। एक आम नागरिक जितेंद्र कुमार सिंह की सजगता भी उतनी ही सराहनीय है, जिसने सही समय पर सही जगह सूचना पहुंचाई।

    ​लेकिन बड़ा सवाल यह है कि संवेदनशील वार्डों की सुरक्षा भगवान भरोसे या राजनेताओं के फोन कॉल के भरोसे क्यों छोड़ी जाए? ऑक्सीजन पाइपलाइन का फटना और उसमें स्पार्क होना यह साफ जाहिर करता है कि अस्पताल का मेंटेनेंस विंग केवल कागजों पर काम कर रहा है। क्या अस्पताल प्रबंधन को यह नहीं पता था कि एसएनसीयू में भर्ती बच्चे और खासकर वेंटिलेटर पर मौजूद शिशु बिना ऑक्सीजन के चंद मिनट भी जिंदा नहीं रह सकते? एक वार्ड बॉय का झुलसना यह बताता है कि ग्राउंड स्टाफ के पास सुरक्षा उपकरण नहीं थे। इस मामले में सिर्फ 'हादसा टल जाने' की राहत मनाकर बैठ जाना अगली किसी बड़ी लापरवाही को निमंत्रण देना होगा। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस गंभीर लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और मेंटेनेंस के जिम्मेदार अधिकारियों व वेंडरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी अस्पतालों में लोग इलाज कराने आएं, अपनी जान गंवाने नहीं।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी / मुन्ना सिंह (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): प्रत्यक्षदर्शी एवं ग्राउंड जीरो कवरेज (शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल)

    हजारीबाग: अधिकारियों की परीक्षा में आयुक्त का कड़ा रुख; कदाचारमुक्त और पारदर्शी संचालन को लेकर परखीं सुरक्षा व्यवस्थाएं, सचिव भी रहे मौजूद

    Hamar Jharkhand: 'झारखंड प्रदेश बने 26 साल हुए, पर अब तक तय नहीं स्थानीय नीति'; खतियानी परिवार ने सरकार की 'टालमटोल' वाली राजनीति पर उठाए सवाल

    स्थानीय नीति बनाम लैंड बैंक: खतियानी परिवार का वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकार पर बड़ा हमला; कहा— 'झारखंडियों की पहचान, जिसके पास हो खतियान'

    अशोक राम की अध्यक्षता और महासचिव मो. हकीम के नेतृत्व में हुई साप्ताहिक बैठक; मूलवासियों-आदिवासियों को नौकरियों में हक देने की मांग

    विशेष संवाददाता, रांची/हजारीबाग

    झारखंड राज्य गठन के लगभग 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी प्रदेश में 'स्थानीय नीति' (Local Policy) को स्पष्ट रूप से परिभाषित न किए जाने को लेकर मूलवासियों और आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसी सिलसिले में पुराना धरना स्थल के समीप अशोक राम की अध्यक्षता में 'खतियानी परिवार' की एक महत्वपूर्ण साप्ताहिक बैठक संपन्न हुई। बैठक में स्वर्गीय ए.डी. नन्दी के प्रसिद्ध नारे "झारखंडियों की पहचान / जिसके पास हो खतियान" को दोहराते हुए राज्य के मूल निवासियों के अस्तित्व और अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

    पुराना धरना स्थल के पास स्थानीय नीति को लेकर साप्ताहिक बैठक करते खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम, अध्यक्ष अशोक राम व अन्य।

    26 वर्षों में भी स्थानीय नीति का गौन होना चिंताजनक: मोहम्मद हकीम

    ​बैठक को संबोधित करते हुए खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मोहम्मद हकीम ने राज्य की वर्तमान और पूर्ववर्ती सरकारों की मंशा पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:

    "आज झारखंड प्रदेश को बने करीब ढाई दशक (26 वर्ष) बीत चुके हैं, लेकिन इतनी लंबी अवधि के बाद भी झारखंड सरकार यहां की स्थानीय नीति को स्पष्ट और परिभाषित नहीं कर सकी है। बार-बाहर राज्य के आंदोलनकारी और मूलवासी इस गंभीर समस्या को उठा रहे हैं, लेकिन वर्तमान सरकार सार्थक कदम उठाने के बजाय टालमटोल की राजनीति कर रही है, जिससे स्थानीय नीति का मुद्दा गौन होता जा रहा है।"

    ​महासचिव ने आगे कहा कि सदान और आदिवासी समाज के कल्याण के लिए स्थानीय नीति का अनुसरण करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि यहां की गरीब जनता, आदिवासी और हरिजन (दलित) समाज ही इस नीति के न होने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

    रघुवर सरकार के 'लैंड बैंक' पर साधा निशाना

    ​बैठक के दौरान पूर्ववर्ती भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा गया। खतियानी परिवार के वक्ताओं ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री माननीय रघुवर दास के कार्यकाल में स्थानीय नीति को परिभाषित करने के बदले 'लैंड बैंक' (Land Bank) बना दिया गया, जिसने झारखंड के स्थानीय लोगों को कंगाल बनाने का काम किया। उन्होंने तर्क दिया कि लैंड बैंक से झारखंड का कल्याण संभव नहीं है, क्योंकि यहां के स्थानीय लोग टाटा-बिड़ला की तरह भौतिक संपदा से संपन्न नहीं हैं जो लैंड बैंक का व्यावसायिक उपयोग कर सकें।

    नौकरियों में हक के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की मांग

    ​बैठक में केंद्र और राज्य के बीच चल रही राजनीतिक रस्साकसी पर भी कटाक्ष किया गया। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार दुराचार की सीमाएं पार कर चुकी है और झारखंड सरकार उसका मुकाबला करने के लिए कदम से कदम मिलाकर जवाब तो दे रही है, लेकिन अपने मूल वादे (स्थानीय नीति) को भूल चुकी है। अगर स्थानीय नीति पूरी तरह स्पष्ट हो जाए, तो झारखंड प्रदेश के सदान और आदिवासियों को स्थानीय नौकरियों (State Jobs) में प्राथमिकता मिलती और युवा अपने अधिकारों से वंचित न होते। खतियानी परिवार ने मुख्यमंत्री से दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए अविलंब खतियान आधारित स्थानीय नीति लागू करने का अनुरोध किया है।

    बैठक में ये मुख्य लोग रहे उपस्थित

    ​इस साप्ताहिक बैठक में मुख्य रूप से महेश विश्वकर्मा, मोहम्मद आशिक, रामचंद्र राम (मुखिया), मोहम्मद फखरुद्दीन, बोधी सॉव, शंकर राम, कुंती देवी, राधा देवी, प्रदीप कुमार मेहता, सुरेश महतो, मेघ मेहता, तनवीर अहमद, शोएब अंसारी, मोहम्मद मोबीन सहित बड़ी संख्या में खतियानी परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग उपस्थित थे।

    झारखंड का राजनीतिक परिदृश्य (News Prahari Context Note)

    ​📌 न्यूज प्रहरी विशेष नोट: क्यों उलझा है झारखंड में स्थानीयता का मामला?

    झारखंड की राजनीति में 1932 के खतियान या अंतिम सर्वे सेटलमेंट को स्थानीयता का आधार बनाने की मांग हमेशा से संवेदनशील रही है। वर्तमान हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने 'झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा और परिणामी सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य लाभों को ऐसे व्यक्तियों तक विस्तारित करने के लिए विधेयक' पारित कर इसे नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र को भेजा था। हालांकि, कानूनी अड़चनों और राजभवन व न्यायालय के विभिन्न आदेशों के कारण यह मामला अब तक पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाया है, जिससे स्थानीय युवाओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

    संपादकीय विश्लेषण: स्थानीय नीति का चक्रव्यूह और युवाओं का भविष्य (Editorial)

    सिर्फ नारों और विधेयकों से अलग, एक सर्वमान्य और कानूनी रूप से ठोस नीति की दरकार

    खतियानी परिवार की बैठक में उठाए गए सवाल केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़े गहरे जज्बात हैं। यह एक कड़वी सच्चाई है कि बिहार से अलग होने के 26 साल बाद भी झारखंड यह तय नहीं कर पाया है कि तकनीकी और कानूनी रूप से 'झारखंडी' कौन है? इस नीति के अभाव का सीधा असर जेएसएससी (JSSC) और जेपीएससी (JPSC) जैसी नियुक्तियों पर पड़ता है, जहां अक्सर बाहरी बनाम स्थानीय का विवाद खड़ा हो जाता है और नियुक्तियां अदालतों में लटक जाती हैं।

    ​रघुवर दास सरकार के समय की 'लैंड बैंक' नीति की आलोचना इस मायने में व्यावहारिक है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े इस राज्य में जमीनों का अधिग्रहण उद्योगों के नाम पर तो हुआ, लेकिन उसका सीधा लाभ स्थानीय रैयतों या आदिवासियों को नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ, वर्तमान सरकार द्वारा भी बार-बार अध्यादेश लाने या विधानसभा से बिल पास कराने के बावजूद उसे कानूनी अमलीजामा न पहना पाना प्रशासनिक शिथिलता या राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को ही उजागर करता है। सरकार को चाहिए कि वह केवल चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे को जिंदा रखने के बजाय, एक ऐसी सर्वमान्य, व्यावहारिक और कानूनी रूप से अचूक स्थानीय नीति तैयार करे जो कोर्ट के पैमाने पर भी खरी उतरे, ताकि यहां के मूलवासी-आदिवासी युवाओं को उनका वास्तविक हक मिल सके।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): खतियानी परिवार, केंद्रीय कमेटी (प्रेस विज्ञप्ति — 30 मई 2026)


    Hamar Hazaribagh: हजारीबाग के सिंदूर ITI में आज लगेगा दत्तोपंत ठेंगड़ी महा रोजगार मेला; 6400 पदों पर सीधी भर्ती, जानें जरूरी दस्तावेज

    बेरोजगार युवाओं के लिए सुनहरा अवसर: हजारीबाग में निजी कंपनियों की बड़ी बहाली; 3 जून को रोजगार मेले में शामिल होने के लिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

    सुबह 10 से शाम 4 बजे तक लगेगा मेला; बायोडाटा, शैक्षणिक कागजात और झारनियोजन पोर्टल पर निबंध के साथ पहुंचें अभ्यर्थी

    विशेष संवाददाता, हजारीबाग

    हजारीबाग और आसपास के जिलों के शिक्षित एवं योग्य बेरोजगार युवाओं के लिए जिला प्रशासन और अवर प्रादेशिक नियोजनालय की ओर से रोजगार का एक बड़ा और सुनहरा अवसर सामने आया है। हजारीबाग जिला प्रशासन के सौजन्य से बुधवार, 3 जून 2026 को सिंदूर स्थित आई.टी.आई. (ITI) परिसर में एकदिवसीय 'दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार मेला सह कौशल विकास मेला' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस महा मेले के जरिए विभिन्न प्रतिष्ठित निजी कंपनियों द्वारा कुल 6400 रिक्त पदों पर योग्य युवाओं की सीधी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    हजारीबाग सिंदूर स्थित आईटीआई परिसर में आयोजित होने वाले दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार मेला सह कौशल विकास मेले का आधिकारिक पोस्टर।

    मेले का समय और स्थान

    • दिनांक: 3 जून 2026 (बुधवार)
    • समय: सुबह 10:00 बजे पूर्वाहन से लेकर शाम 4:00 बजे अपराहन तक।
    • स्थान: आई.टी.आई. (ITI) परिसर, सिंदूर, हजारीबाग।

    ​जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हजारीबाग जिले के सभी इच्छुक युवक एवं युवतियां जो निजी क्षेत्रों में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वे इस मेले में शामिल होकर अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसरों का सीधा लाभ उठा सकते हैं।

    भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन (निबंधन) की प्रक्रिया

    ​रोजगार मेले में शामिल होने के लिए अभ्यर्थियों का नियोजनालय में निबंधित होना अनिवार्य है। इसके लिए नियम निम्नलिखित हैं:

    1. नए अभ्यर्थियों के लिए: जो आवेदक पूर्व से नियोजनालय में निबंधित नहीं हैं, वे अपने निकटतम नियोजनालय में जाकर या फिर झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल jharniyojan.jharkhand.gov.in पर जाकर ऑनलाइन अपना रजिस्ट्रेशन तुरंत करा सकते हैं।
    2. पूर्व से निबंधित अभ्यर्थियों के लिए: जो उम्मीदवार पहले से ही नियोजनालय में निबंधित हैं, उन्हें दोबारा नया निबंधन कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

    अपने साथ लाएं ये 5 जरूरी दस्तावेज (Document Checklist)

    ​रोजगार मेले में भाग लेने वाले सभी अभ्यर्थियों को साक्षात्कार (Interview) और चयन प्रक्रिया के लिए अपने साथ निम्नलिखित मूल दस्तावेज और उनकी कॉपियां लाना अनिवार्य होगा:

    • ​सभी मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र (Original Certificates) एवं उनकी अंक तालिका (Mark Sheets)।
    • ​सभी प्रमाण पत्रों की छायाप्रति (Photocopies) का एक सेट।
    • ​स्थानीय अंचल कार्यालय (Circle Office) द्वारा निर्गत वैध आवासीय प्रमाण पत्र (Residential Certificate)।
    • ​अपडेटेड बायोडाटा (Resume/CV) की कम से कम दो प्रतियां (Copies)।
    • ​दो हालिया पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो।

    महत्वपूर्ण नोट: जिला प्रशासन द्वारा यह स्पष्ट कर दिया गया है कि उपलब्ध सभी रिक्तियां पूर्णतः निजी क्षेत्र (Private Sector) से संबंधित हैं, इसलिए चयन प्रक्रिया में नियोजनालय का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं रहेगा। साथ ही, मेले में आने वाले अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार का मार्ग व्यय (Travel Allowance) देय नहीं होगा।

    युवाओं के लिए मार्गदर्शिका (News Prahari Career Guide)

    ​📌 न्यूज प्रहरी की सलाह: साक्षात्कार के लिए ऐसे करें खुद को तैयार

    6400 पदों की यह भर्ती आपके करियर को एक नई दिशा दे सकती है। न्यूज प्रहरी सभी परीक्षार्थियों और युवाओं को सलाह देता है कि मेले में जाने से पहले अपने बायोडाटा (Resume) को अच्छी तरह से अपडेट कर लें और अपनी शैक्षणिक योग्यता के अनुसार कम से कम 3-4 कॉपियां साथ रखें, ताकि अलग-अलग कंपनियों में आवेदन दे सकें। साक्षात्कार के समय औपचारिक पहनावे (Formal Dress) में जाएं और अपना आत्मविश्वास बनाए रखें।


    संपादकीय विश्लेषण: निजी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भर्ती और स्थानीय युवाओं की उम्मीदें (Editorial)

    6400 पदों का आंकड़ा बड़ा, लेकिन पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण चयन ही असली सफलता

    हजारीबाग जिला प्रशासन और अवर प्रादेशिक नियोजनालय द्वारा एक ही छत के नीचे 6400 पदों पर निजी कंपनियों को आमंत्रित करना एक सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है। वर्तमान समय में जब सरकारी नौकरियों के अवसर सीमित हैं, ऐसे में 'दत्तोपंत ठेंगड़ी रोजगार मेला' जैसे आयोजन स्थानीय युवाओं को तत्काल रोजगार देने और उनके कौशल विकास को परखने का एक सशक्त माध्यम बनते हैं। ऑनलाइन पोर्टल 'झारनियोजन' के माध्यम से पंजीकरण की व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी देखने को मिलती है।

    ​हालांकि, ऐसे बड़े रोजगार मेलों के आयोजन के बाद जिला प्रशासन को एक 'फॉलो-अप डेटा' (Follow-up Data) भी सार्वजनिक करना चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि मेले में चयनित किए गए युवाओं में से वास्तव में कितने लोगों को कंपनियों ने जॉइनिंग लेटर दिया और वे वर्तमान में कार्यरत हैं। अक्सर देखा जाता है कि कंपनियां शुरुआती चयन के बाद बाद में प्रक्रिया को ठंडे बस्ते में डाल देती हैं। इसके अलावा, कंपनियों को स्थानीय युवाओं के लिए न्यूनतम वेतनमान (Minimum Wage) और श्रम नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा, ताकि चयनित युवाओं का शोषण न हो। यदि प्रशासन नियोजन के बाद भी कंपनियों की निगरानी करता है, तो हजारीबाग के युवाओं का सरकारी तंत्र पर भरोसा और मजबूत होगा।

    • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
    • समाचार स्रोत (Source): अवर प्रादेशिक नियोजनालय सह जिला प्रशासन, हजारीबाग (आधिकारिक जनहित विज्ञापन)

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