हजारीबाग मेडिकल अस्पताल में आधी रात को टली बड़ी त्रासदी: ऑक्सीजन पाइप फटने से वेंटिलेटर पर मौजूद नवजातों पर मंडराया संकट, बैकअप तैयार कर बचाई जान
सांसद प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने आधी रात को अस्पताल प्रबंधन को जगाया; निजी अस्पतालों में शिफ्टिंग की थी तैयारी, वार्ड बॉय आंशिक रूप से झुलसा
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के अति संवेदनशील नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) में बीती रात करीब 11:00 बजे एक भयानक हादसा होने से बाल-बाल बच गया। अस्पताल परिसर के एसएनसीयू के बाहर अचानक ऑक्सीजन पाइपलाइन से जम्बो सिलेंडर में जोड़ा गया पाइप जोरदार आवाज के साथ फट गया और उसमें स्पार्क के कारण आग लग गई। पाइपलाइन फटने से पूरे एसएनसीयू वार्ड की ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह ठप्प हो गई, जिससे वहां वेंटिलेटर पर मौजूद तीन गंभीर शिशुओं सहित अन्य नवजातों की जान पर सीधा संकट मंडराने लगा। इस अचानक आई विपदा से बच्चों के परिजनों के बीच कोहराम और चीख-पुकार मच गई।
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| शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग का एसएनसीयू वार्ड, जहां आधी रात को ऑक्सीजन पाइपलाइन फटने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। |
जागरूक परिजन की सूचना पर सांसद मनीष जायसवाल की त्वरित संवेदनशीलता
वार्ड में भर्ती एक बच्चे के जागरूक परिजन जितेंद्र कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद मनीष जायसवाल को फोन पर हादसे की लाइव जानकारी दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सांसद ने अद्वितीय तत्परता दिखाई और बिना एक पल गंवाए अपने सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी को तुरंत अस्पताल पहुंचने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सांसद ने खुद एसएनसीयू में तैनात ऑन-ड्यूटी महिला शिशु चिकित्सक से फोन पर बात कर हालात की समीक्षा की और निर्देश दिया कि यदि जरूरत पड़े, तो बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें तत्काल शहर के किसी भी बेहतर निजी अस्पताल (Private Hospital) में शिफ्ट कराया जाए, जिसका खर्च वह स्वयं वहन करने को तैयार थे।
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आधी रात को जुटा प्रशासनिक अमला, युद्ध स्तर पर बदला गया पाइप
सांसद के निर्देश पर मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी तुरंत मेडिकल कॉलेज पहुंचे और अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजकिशोर तथा शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. क्षितिज आनंद से संपर्क कर तत्काल आपातकालीन हस्तक्षेप का आग्रह किया।
- तकनीकी सेल की कार्रवाई: उपाधीक्षक डॉ. राजकिशोर की त्वरित पहल पर अस्पताल की तकनीकी टीम मौके पर पहुंची। जागरूक परिजन जितेंद्र कुमार सिंह और टीम की कड़ी मशक्कत के बाद फटे हुए ऑक्सीजन पाइप को हटाकर नया पाइप लगाया गया और सप्लाई बहाल की गई।
- निजी अस्पतालों का बैकअप: शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ. क्षितिज आनंद भी खुद वार्ड पहुंचे। उन्होंने एहतियातन शहर के कई निजी अस्पतालों से बात कर बैकअप वेंटिलेटर बेड तैयार करवा लिए थे। हालांकि, पाइपलाइन समय रहते ठीक हो जाने और ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह सुचारू पाए जाने के कारण बच्चों को शिफ्ट करने की नौबत नहीं आई और सभी नवजात सुरक्षित हैं।
इस भीषण हादसे के दौरान जब पाइपलाइन में आग लगी, तो उसे बुझाने के साहसिक प्रयास में अस्पताल के एक जांबाज वार्ड बॉय का हाथ भी आंशिक रूप से झुलस गया, जिसे प्राथमिक उपचार दिया गया है।
सांसद प्रतिनिधि ने प्रबंधन की लापरवाही पर उठाए तीखे सवाल
अस्पताल पहुंचे सांसद मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण ही ऑक्सीजन पाइपलाइन का समय पर मेंटेनेंस और रूटीन ऑडिट नहीं किया जाता है, जिसके चलते इतनी बड़ी घटना घटी। अगर सही समय पर सांसद की संवेदनशीलता और जागरूक नागरिकों का सहयोग न मिलता, तो सोए हुए प्रबंधन की वजह से आज हजारीबाग एक बड़ी और दर्दनाक मानवीय त्रासदी का गवाह बन सकता था।
अस्पताल सुरक्षा मार्गदर्शिका (SNCU Safety Advisory for Hospitals)
📌 न्यूज प्रहरी की तकनीकी सलाह: मेडिकल ऑक्सीजन सिस्टम के लिए जरूरी सुरक्षा मानक
- साप्ताहिक प्रेशर व लीकेज टेस्ट: किसी भी मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू जैसे अति संवेदनशील वार्डों की ऑक्सीजन पाइपलाइन और मैनिफोल्ड सिस्टम का हर हफ्ते प्रेशर ऑडिट और लीकेज टेस्ट होना अनिवार्य है।
- ऑटो-कट और समानांतर बैकअप: मुख्य पाइपलाइन फटने की स्थिति में आटोमेटिक अलार्म बजना चाहिए और वार्ड के भीतर कम से कम 2 से 4 घंटे का स्टैंडबाय जम्बो ऑक्सीजन सिलेंडर बैकअप हमेशा ऑन-मोड में रहना चाहिए ताकि मुख्य सप्लाई कटने पर वेंटिलेटर बंद न हों।
- एंटी-फायर कोटिंग व पीपीई किट: ऑक्सीजन जोन के पास फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) और वार्ड बॉयज के लिए बेसिक फायर सेफ्टी ग्लव्स हमेशा उपलब्ध होने चाहिए।
संपादकीय विश्लेषण: मुस्तैदी की तारीफ, लेकिन लापरवाही पर जवाबदेही कब? (Editorial)
नेताओं की संवेदनशीलता ने बचाई जान, लेकिन तंत्र की ढिलाई का इलाज जरूरी
शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एसएनसीयू की यह घटना देश के विभिन्न सरकारी अस्पतालों (जैसे गोरखपुर त्रासदी) में हुए पूर्व के हादसों की याद दिलाती है, जहां ऑक्सीजन की कमी या तकनीकी खराबी ने कई मासूमों को निगल लिया था। हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल और उनके प्रतिनिधि रंजन चौधरी की आधी रात को दिखाई गई सक्रियता निश्चित रूप से मिसाल के काबिल है, जिसने प्रशासनिक अमले को बेड से उठकर वार्ड तक दौड़ने पर मजबूर किया। एक आम नागरिक जितेंद्र कुमार सिंह की सजगता भी उतनी ही सराहनीय है, जिसने सही समय पर सही जगह सूचना पहुंचाई।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि संवेदनशील वार्डों की सुरक्षा भगवान भरोसे या राजनेताओं के फोन कॉल के भरोसे क्यों छोड़ी जाए? ऑक्सीजन पाइपलाइन का फटना और उसमें स्पार्क होना यह साफ जाहिर करता है कि अस्पताल का मेंटेनेंस विंग केवल कागजों पर काम कर रहा है। क्या अस्पताल प्रबंधन को यह नहीं पता था कि एसएनसीयू में भर्ती बच्चे और खासकर वेंटिलेटर पर मौजूद शिशु बिना ऑक्सीजन के चंद मिनट भी जिंदा नहीं रह सकते? एक वार्ड बॉय का झुलसना यह बताता है कि ग्राउंड स्टाफ के पास सुरक्षा उपकरण नहीं थे। इस मामले में सिर्फ 'हादसा टल जाने' की राहत मनाकर बैठ जाना अगली किसी बड़ी लापरवाही को निमंत्रण देना होगा। स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को इस गंभीर लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए और मेंटेनेंस के जिम्मेदार अधिकारियों व वेंडरों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी अस्पतालों में लोग इलाज कराने आएं, अपनी जान गंवाने नहीं।
- रिपोर्टर: नरेश सोनी / मुन्ना सिंह (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): प्रत्यक्षदर्शी एवं ग्राउंड जीरो कवरेज (शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल)


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