हजारीबाग के खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी: बैडमिंटन कोच और तीरंदाजों को मिलेंगे जूते-टीशर्ट, हॉकी सेंटर में बनेगा नया टर्फ; डीसी ने दिए कड़े निर्देश
पुराने समाहरणालय में शिफ्ट होंगे साक्षरता एवं नेहरू युवा केंद्र कार्यालय; सीएसआर मद से चमकेगा स्टेडियम, जिला योजना और खेल पदाधिकारी को समय सीमा की हिदायत
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
हजारीबाग जिले के स्थानीय खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन अब बड़े बदलाव की तैयारी में है। उपायुक्त (DC) हेमन्त सती ने मंगलवार को अपने कार्यालय कक्ष में खेल विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक की। इस बैठक में जिले की विभिन्न खेल गतिविधियों, खिलाड़ियों की जरूरतों और खेल अधोसंरचना (Sports Infrastructure) से जुड़े चालू व लंबित कार्यों की बिंदुवार समीक्षा की गई। उपायुक्त ने खेल के स्तर को बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को कई कड़े और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
![]() |
| समाहरणालय कक्ष में खेल विभाग और खेलो इंडिया की योजनाओं की समीक्षा करते हुए उपायुक्त हेमन्त सती, साथ में जिला योजना पदाधिकारी एवं जिला खेल पदाधिकारी। |
कर्ज़न स्टेडियम का होगा सौंदर्यीकरण, हटेंगे दो सरकारी दफ्तर
स्टेडियम परिसर में खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त जगह और बेहतर माहौल तैयार करने के लिए उपायुक्त ने एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। उन्होंने कर्ज़न स्टेडियम परिसर में वर्तमान में संचालित साक्षरता कार्यालय और नेहरू युवा केंद्र (NYK) को पुराने समाहरणालय भवन में स्थानांतरित (Shift) करने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही, कर्ज़न स्टेडियम के सौंदर्यीकरण (Beautification) के लिए सीएसआर (CSR) मद का उपयोग किया जाएगा। इसके तहत स्टेडियम में सोलर और इलेक्ट्रिक हाई मास्ट लाइटें लगाई जाएंगी, शौचालयों की मुकम्मल मरम्मत होगी और पूरे परिसर की प्रकाश व्यवस्था (Lighting System) को सुदृढ़ किया जाएगा। उपायुक्त ने जिला योजना पदाधिकारी को इसके लिए आवश्यक निविदा (Tender) प्रक्रिया को जल्द से जल्द फाइनल करने का आदेश दिया।
बैडमिंटन के लिए मिलेंगे कोच, तीरंदाजों को मिलेंगे आधुनिक संसाधन
जिले के उभरते हुए खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन देने के लिए उपायुक्त ने जिला खेल पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे बैडमिंटन खिलाड़ियों के लिए पेशेवर प्रशिक्षक (Coach) की व्यवस्था हेतु विभागीय स्तर पर तत्काल पत्राचार शुरू करें।
वहीं, तीरंदाजी (Archery) का प्रशिक्षण ले रहे बच्चों की बुनियादी जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए डीसी ने जिला योजना पदाधिकारी को निर्देश दिया कि वे विभिन्न बैंकों से समन्वय (Coordination) स्थापित कर सीएसआर के तहत बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाले टी-शर्ट, खेल के जूते, बॉल और अन्य आवश्यक किट उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
हॉकी सेंटर में टर्फ और खेलो इंडिया के तहत बनेंगे चेंजिंग रूम
हजारीबाग में खेलों को वैश्विक पहचान देने के लिए 'खैलो इंडिया' योजना के अंतर्गत बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। बैठक में उपायुक्त ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अविलंब तैयार कर खेल निदेशालय (रांची) भेजने का निर्देश दिया:
- खेलो इंडिया प्रोजेक्ट के तहत अत्याधुनिक चेंजिंग रूम का निर्माण।
- स्थानीय हॉकी सेंटर में नए एस्ट्रोटर्फ (Turf) का निर्माण।
- डे-बोर्डिंग (Day-Boarding) खिलाड़ियों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त आवासीय केंद्र (Residential Center) की स्थापना।
समीक्षा बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में उपायुक्त हेमन्त सती के अलावा मुख्य रूप से जिला योजना पदाधिकारी पंकज तिवारी, जिला खेल पदाधिकारी कैलाश कुमार सहित खेल विभाग और समाहरणालय के कई वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
खेल मार्गदर्शिका (News Prahari Sports Advisory / Infrastructure Insight)
📌 न्यूज प्रहरी का नजरिया: कर्ज़न स्टेडियम में लाइट और कोच की व्यवस्था से खिलाड़ियों को मिलेगी नई उड़ान
हजारीबाग का कर्ज़न स्टेडियम दशकों से जिले के खिलाड़ियों की नर्सरी रहा है। शाम के वक्त प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) दुरुस्त न होने और पेशेवर कोच की कमी के कारण कई प्रतिभावान खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते थे। न्यूज प्रहरी जिला प्रशासन के इस कदम का स्वागत करता है। स्टेडियम से प्रशासनिक कार्यालयों के हटने से खिलाड़ियों को अधिक स्पेस मिलेगा और सोलर हाई मास्ट लाइटों से वे देर शाम तक अभ्यास कर सकेंगे।
संपादकीय विश्लेषण: बुनियादी सुधारों के साथ रखरखाव (Maintenance) भी बेहद जरूरी (Editorial)
बैंकों से समन्वय और टेंडर प्रक्रिया में तेजी से ही धरातल पर उतरेंगे खेलो इंडिया के सपने
उपायुक्त हेमंत सती द्वारा खेल विभाग की समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णय हजारीबाग के खेल जगत के लिए एक नई सुबह की तरह हैं। तीरंदाजी के बच्चों को जूते-टीशर्ट दिलाने के लिए बैंकों के सीएसआर (CSR) फंड को जोड़ना और हॉकी के लिए टर्फ का प्रस्ताव भेजना यह दर्शाता है कि प्रशासन केवल पारंपरिक बजट पर निर्भर नहीं है, बल्कि लीक से हटकर सोच रहा है। बैडमिंटन के लिए कोच की मांग भी लंबे समय से स्थानीय स्तर पर की जा रही थी।
हालांकि, खेल अधोसंरचना के विकास में सबसे बड़ी चुनौती 'निर्माण' नहीं, बल्कि 'रखरखाव' (Maintenance) होती है। पूर्व में भी कई स्टेडियमों में शौचालयों और लाइटों की व्यवस्था की गई, जो देखरेख के अभाव में खराब हो गईं। जिला खेल विभाग को चाहिए कि वह बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ स्थानीय खेल संघों को भी इसमें भागीदार बनाए। इसके अलावा, खेलो इंडिया के तहत चेंजिंग रूम और हॉकी टर्फ के प्रस्तावों को रांची मुख्यालय से समय पर स्वीकृत कराना और जिला योजना कार्यालय द्वारा हाई मास्ट लाइट के टेंडर को बिना किसी तकनीकी देरी के पारदर्शी तरीके से पूरा करना इस पूरी योजना की वास्तविक सफलता की कुंजी होगी।
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (IPRD), हजारीबाग — प्रेस विज्ञप्ति संख्या: 321/02.06.2026

No comments
Post a Comment