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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग: विश्व पर्यावरण दिवस पर सिविल कोर्ट परिसर में डीएलएसए ने किया पौधारोपण; प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने दिया 'क्लाइमेट चेंज' से निपटने का संदेश

हजारीबाग सिविल कोर्ट में विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधारोपण। प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने दी कचरा प्रबंधन की सीख। पढ़ें रिपोर्ट।
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हजारीबाग कोर्ट पार्क में रोपे गए पौधे: बढ़ते तापमान को रोकने का एकमात्र उपाय अधिक से अधिक पेड़ लगाना— प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा

"सूखे और गीले कचरे को अलग कर खाद बनाएं, पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी"— जिला जज

विशेष संवाददाता, हजारीबाग

  • रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)

  • समाचार स्रोत (Source): सिविल कोर्ट परिसर, हजारीबाग जिला

हजारीबाग: विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) के बैनर तले शुक्रवार को हजारीबाग सिविल कोर्ट स्थित पार्क में एक भव्य पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति की रक्षा के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम की अगुवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने की। उनकी गरिमामयी उपस्थिति में कोर्ट परिसर के पार्क में फलदार, छायादार और औषधीय प्रजातियों के कई पौधे लगाए गए।

कोर्ट परिसर में जुटे न्यायिक पदाधिकारियों और वकीलों का ग्रुप शॉट। टेक्स्ट: 📝 बढ़ते तापमान पर गहरी चिंता: प्रधान जिला जज ने कहा— ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का एकमात्र रास्ता सघन पौधारोपण और उनकी सुरक्षा है।

इस महत्वपूर्ण पौधारोपण कार्यक्रम में न्यायिक जगत से जुड़े कई वरीय पदाधिकारी शामिल हुए। मुख्य रूप से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) राजीव त्रिपाठी और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने सक्रिय रूप से पौधे रोपकर इस अभियान को गति दी। इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में हजारीबाग के मध्यस्थ (Mediators), पैनल अधिवक्ता (Panel Advocates), पारा लीगल वालेंटियर (PLV) और स्थानीय विधि महाविद्यालय (Law College) के छात्र-छात्राओं ने अपनी उत्साहपूर्ण भागीदारी दर्ज कराई।

बढ़ते औसत तापमान पर प्रधान जिला जज ने जताई चिंता

पौधारोपण के उपरांत वहां उपस्थित न्यायिक पदाधिकारियों, वकीलों और कानून के विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण की रक्षा को लेकर हम सभी को विशेष रूप से सचेत और गंभीर रहने की आवश्यकता है।

उन्होंने जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरों की ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि जिस तीव्र गति से धरती का औसत तापमान बढ़ रहा है, उससे आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। ग्लोबल वार्मिंग और इस भीषण गर्मी से निपटने का एकमात्र और सबसे सही उपाय यही है कि हम सभी मिलकर अधिक से अधिक संख्या में पेड़ों को लगाएं और न सिर्फ उन्हें लगाएं, बल्कि उनकी पूरी देखभाल भी सुनिश्चित करें।

कोर्ट परिसर में जुटे न्यायिक पदाधिकारियों और वकीलों का ग्रुप शॉट। टेक्स्ट: 📝 बढ़ते तापमान पर गहरी चिंता: प्रधान जिला जज ने कहा— ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का एकमात्र रास्ता सघन पौधारोपण और उनकी सुरक्षा है।

कचरा प्रबंधन (Waste Management) को लेकर दी महत्वपूर्ण सीख

प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर जोर दिया। उन्होंने आम जनमानस और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे को हमेशा अलग-अलग डस्टबिन में रखना चाहिए। उन्होंने गीले कचरे से जैविक खाद बनाने और उसका पौधों के लिए सदुपयोग करने की बात कही, ताकि कचरे का सही और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन किया जा सके। विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा आयोजित इस पहल की पूरे कोर्ट परिसर और प्रबुद्ध समाज द्वारा सराहना की जा रही है।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (The Legal Side of Environmental Rights)

📌 पर्यावरण संरक्षण और कानून: जानिए क्या हैं हमारे संवैधानिक अधिकार?

  • अनुच्छेद 21 (Right to Life): भारतीय संविधान के तहत जीने के अधिकार में स्वच्छ पर्यावरण और शुद्ध हवा-पानी में सांस लेने का अधिकार भी शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसलों में इसे मौलिक अधिकार माना है।

  • अनुच्छेद 48A और 51A(g): राज्य के नीति निदेशक तत्वों और नागरिकों के मूल कर्तव्यों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि पर्यावरण की रक्षा, वनों का संवर्धन और वन्यजीवों के प्रति दया भाव रखना देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

  • डीएलएसए (DLSA) की भूमिका: जिला विधिक सेवा प्राधिकार केवल मुकदमों और मुफ्त कानूनी सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में पर्यावरण, स्वास्थ्य और बुनियादी मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भी निरंतर कार्य करता है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: कचरा प्रबंधन और पौधारोपण की न्यायिक पहल (Editorial)

बढ़ते पारे के बीच हजारीबाग न्यायपालिका का यह संदेश समाज के लिए मार्गदर्शक इस वर्ष पूरा उत्तर भारत और विशेषकर झारखंड जिस भीषण हीटवेव और रिकॉर्ड तोड़ तापमान से जूझ रहा है, वैसे में विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक रस्म बनकर न रह जाए, यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। हजारीबाग सिविल कोर्ट में प्रधान जिला जज ध्रुव चन्द्र मिश्रा द्वारा दिया गया संदेश बेहद व्यावहारिक और समसामयिक है। अक्सर लोग पेड़ तो लगा देते हैं लेकिन उनकी सिंचाई और सुरक्षा की सुध नहीं लेते। जज साहब द्वारा सूखे और गीले कचरे के वर्गीकरण तथा उसकी खाद बनाने की जो बात कही गई है, वह सीधे तौर पर 'जीरो वेस्ट' (Zero Waste) जीवनशैली की वकालत करती है। जब न्यायपालिका के शीर्ष चेहरे खुद हाथों में कुदाल और पौधा लेकर जमीन पर उतरते हैं, तो इसका समाज, वकीलों और भावी पीढ़ी (लॉ स्टूडेंट्स) पर गहरा प्रभाव पड़ता है। जरूरत इस बात की है कि इस मानसून सीजन में हजारीबाग का हर नागरिक सिविल कोर्ट की इस मुहिम से प्रेरणा लेते हुए कम से कम एक पौधा अवश्य रोपे और पर्यावरण को बचाने में अपनी आहुति दे

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