कटकमदाग अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल: म्यूटेशन के लिए भटक रहे युवक के टावर पर चढ़ने से मचा हड़कंप, स्थानीय प्रशासन मौन
"जब अंचल अधिकारी विधायक तक की बात नहीं सुनते, तो आम जनता न्याय के लिए कहां जाए?"— आक्रोशित स्थानीय ग्रामीण
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत: बनादाग, कटकमदाग अंचल क्षेत्र, हजारीबाग
हजारीबाग:
हजारीबाग जिले के कटकमदाग अंचल क्षेत्र अंतर्गत बानादाग में उस समय भारी अफरा-तफरी और हड़कंप मच गया, जब विकास कुमार नामक एक स्थानीय युवक प्रशासनिक उपेक्षा और अंचल कार्यालय की मनमानी से तंग आकर एयरटेल के ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक के टावर पर चढ़ने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, देखते ही देखते वहां सैकड़ों ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। युवक का आरोप है कि उसकी जमीन से संबंधित म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज का मामला पिछले कई महीनों से अंचल कार्यालय में अकारण लंबित रखा गया है। बार-बार कार्यालय का चक्कर काटने और अधिकारियों से मिन्नतें करने के बावजूद उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला गया।
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| हजारीबाग में हाई वोल्टेज ड्रामा! दाखिल खारिज नहीं होने पर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, जयराम महतो की भी नहीं सुनी 🔥🚨 |
विधायक की पैरवी भी अंचल कार्यालय में रही बेअसर, ग्रामीणों ने की रोड जाम करने की घोषणा
घटनास्थल पर विरोध प्रदर्शन कर रहे युवक के सहयोगियों ने अंचल प्रशासन पर भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता के गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बात करते हुए एक स्थानीय साथी ने बताया कि युवक पिछले छह महीनों से अंचल कार्यालय की दौड़ लगा रहा है। इस दौरान अंचल अधिकारी लगातार टालमटोल की नीति अपनाते रहे और हर बार 'कर देंगे, कर देंगे' कहकर मामले को लटकाए रखा।
हद तो तब हो गई जब इस मामले को लेकर स्थानीय विधायक (एमएलए) टाइगर जयराम कुमार महतो ने भी अंचल अधिकारी से सीधे बात की और युवक की समस्या का त्वरित निष्पादन करने को कहा। विधायक द्वारा सुनिश्चित करने के निर्देश के बाद भी अंचल अधिकारी ने इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की। ग्रामीणों ने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब यह भ्रष्ट व्यवस्था एक जनप्रतिनिधि और विधायक तक की बात को अनसुना कर देती है, तो आम जनता की औकात ही क्या रह जाती है।
अंचल अधिकारी के इस अड़ियल और उपेक्षापूर्ण व्यवहार से नाराज ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सीओ स्वयं धरातल पर आकर युवक को न्याय देने का लिखित आश्वासन नहीं देते, तब तक वे मुख्य सड़क को पूरी तरह जाम रखेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि हक की इस लड़ाई के लिए यदि उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़े या जेल भी जाना पड़े, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। जब तक अधिकारी मौके पर नहीं आते, तब तक युवक को नीचे नहीं उतारा जाएगा।
मौके पर पहुंची पुलिस, अंचल अधिकारी ने साधी चुप्पी
घटना की संवेदनशीलता और मौके पर बढ़ते जनआक्रोश की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना की पुलिस दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने उग्र ग्रामीणों को शांत कराने का प्रयास किया और टावर पर चढ़े युवक से लाउडस्पीकर के माध्यम से संवाद स्थापित कर उसे सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिशें और प्रशासनिक कसरत शुरू कर दी है। समाचार लिखे जाने तक पुलिस और स्थानीय प्रबुद्ध लोग युवक को समझाने-बुझाने में जुटे हुए हैं।
दूसरी तरफ, कटकमदाग अंचल कार्यालय और अंचल अधिकारी की कार्यशैली एक बार फिर इस घटना से पूरी तरह बेनकाब हो गई है। इतने बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम और हंगामे के बावजूद अंचल अधिकारी की ओर से अब तक कोई भी आधिकारिक या सुरक्षात्मक बयान सामने नहीं आया है, जिससे स्थानीय जनता में अंचल प्रशासन के प्रति नाराजगी और ज्यादा गहरी होती जा रही है।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: भ्रष्टाचार और टालमटोल की भेंट चढ़ती जनता की उम्मीदें
कटकमदाग अंचल कार्यालय का यह रवैया व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है
हजारीबाग के बनादाग में घटी यह घटना कोई पहली या इकलौती घटना नहीं है, बल्कि यह झारखंड के अंचल कार्यालयों में व्याप्त उस गहरे रोग का लक्षण है जहां आम आदमी को अपनी ही जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए चप्पलें घिसनी पड़ती हैं। छह महीने तक एक युवक को दौड़ाना और क्षेत्र के विधायक टाइगर जयराम कुमार महतो की पैरवी को भी कूड़ेदान में डाल देना यह साबित करता है कि अंचल के अधिकारियों को न तो जनता का डर है और न ही कानून का।
एक आम युवक का अपनी जायज मांग के लिए जान जोखिम में डालकर मोबाइल टावर पर चढ़ना सीधे तौर पर प्रशासनिक हत्या के प्रयास जैसा है। अंचल अधिकारी की यह चुप्पी इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। जिला प्रशासन और हजारीबाग उपायुक्त को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए दोषी अंचल अधिकारी पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य युवक को न्याय के लिए टावर पर चढ़ने को मजबूर न होना पड़े।

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