हादसों को रोकने के लिए दारू पुलिस की बड़ी पहल: NH 522 पर लगेंगे स्लाइडर बैरियर और रंबल स्ट्रिप, पुराने बैरिकेड्स पर चमकेगा नया रेडियम; डीटीओ ने दिया आश्वासन
"सड़क सुरक्षा अभियान के तहत दारू थाना प्रभाग ने किया संवेदनशील स्थानों का भौतिक निरीक्षण, जिला परिवहन पदाधिकारी ने प्रतिवेदन को गंभीरता से लेते हुए दिया त्वरित मदद का भरोसा"
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): राष्ट्रीय राजमार्ग 522 (NH 522) दारू थाना क्षेत्र, हजारीबाग
हजारीबाग:
हजारीबाग-बगोदर मुख्य मार्ग यानी राष्ट्रीय राजमार्ग 522 (NH 522) के दारू थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले हिस्से में आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने और आम राहगीरों के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक बेहद सराहनीय और ठोस पहल की गई है। सड़क सुरक्षा अभियान (Road Safety Campaign) के तहत दारू थाना पुलिस ने एनएच 522 से गुजरने वाली पक्की सड़क का व्यापक और सूक्ष्म स्तर पर भौतिक निरीक्षण व तकनीकी समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद सड़क पर दुर्घटनाओं के दृष्टिकोण से चिन्हित किए गए ब्लैक स्पॉट्स (संवेदनशील क्षेत्रों) पर सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने के लिए एक विस्तृत और तथ्यात्मक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) तैयार कर जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO), हजारीबाग को समर्पित किया गया है।
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| 📝 प्रतिवेदन की मुख्य मांगें: तीखे मोड़ों पर लगेंगे सुरक्षात्मक स्लाइडर बैरियर, गति नियंत्रण के लिए बनेगी रंबल स्ट्रिप और कोहरे से निपटने के लिए बैरियरों पर चमकेगा नया रेडियम। |
इस सुरक्षा प्रतिवेदन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए हजारीबाग के जिला परिवहन पदाधिकारी ने दारू पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने मामले को बेहद गंभीरता पूर्वक लेते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यक सभी तकनीकी और सुरक्षा उपकरणों को जल्द से जल्द सरकारी स्तर पर उपलब्ध कराने का मजबूत आश्वासन दिया है।
इन आधुनिक सुरक्षा उपकरणों को लगाने की है योजना
दारू थाना प्रभाग द्वारा जिला परिवहन पदाधिकारी को सौंपे गए आधिकारिक प्रतिवेदन में राष्ट्रीय राजमार्ग के तीखे मोड़ों, अंधाधुंध गति वाले क्षेत्रों और ग्रामीण आबादी को जोड़ने वाले चौराहों पर कई तरह के आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाने की पुरजोर वकालत की गई है, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित आवश्यकताएं शामिल हैं:
- स्लाइडर बैरियर (Slider Barrier): एनएच 522 के उन संवेदनशील ढलानों और गहरे मोड़ों पर स्लाइडर बैरियर लगाए जाएंगे, जहां वाहनों के अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे पलटने की सर्वाधिक आशंका बनी रहती है।
- रंबल स्ट्रिप (Rumble Strip): गति सीमा को नियंत्रित करने के लिए चौराहों और मुख्य मोड़ों के ठीक पहले सड़कों पर आधुनिक रंबल स्ट्रिप्स (गति अवरोधक पट्टियां) बनाई जाएंगी, ताकि तेज रफ्तार वाहनों की गति स्वतः धीमी हो सके।
- रेडियम रिफ्लेक्टर (Radium Reflectors on Old Barriers): थाना क्षेत्र के विभिन्न मार्गों पर पूर्व से लगे जितने भी पुराने और धुंधले हो चुके बैरियर हैं, उन सभी पर नया और उच्च गुणवत्ता वाला रेडियम लगाया जाएगा, ताकि रात के अंधेरे या घने कोहरे के समय वाहन चालकों को दूर से ही बैरिकेडिंग और मोड़ों का साफ अहसास हो सके।
दुर्घटना मुक्त दारू क्षेत्र बनाने का संकल्प
सड़क सुरक्षा अभियान के तहत किए गए इस विशेष निरीक्षण के दौरान दारू थाना के पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने स्वयं एनएच 522 पर उतरकर पक्की सड़क की बनावट, डिवाइडरों की स्थिति और साइन बोर्ड्स की उपलब्धता की बारीकी से जांच की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग पर यातायात का दबाव काफी अधिक रहता है और रात के समय भारी वाहनों की रफ्तार के कारण छोटी गाड़ियां अक्सर हादसों का शिकार हो जाती हैं। जिला परिवहन विभाग से आवश्यक उपकरण मिलते ही दारू थाना पुलिस एनएचएआई (NHAI) और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से युद्ध स्तर पर इन्हें पक्की सड़क के किनारे और बीच में स्थापित कराएगी। पुलिस प्रशासन की इस मुस्तैदी और दूरदर्शी सोच से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी हर्ष है, क्योंकि इससे कई बेगुनाह जिंदगियों को अकाल मौत का ग्रास बनने से बचाया जा सकेगा।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव गाइड (The Motor Vehicles Act & Road Safety Standards)
📌 सड़क सुरक्षा और सरकारी गाइडलाइंस: जानिए दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या हैं वैधानिक नियम?
- ब्लैक स्पॉट्स का नियम (Identification of Black Spots): केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सड़क के जिस हिस्से पर 3 वर्षों में 5 से अधिक गंभीर दुर्घटनाएं या मौतें होती हैं, उसे 'ब्लैक स्पॉट' घोषित किया जाता है। इसकी तकनीकी मरम्मत और उपकरणों को लगाने की जिम्मेदारी जिला सड़क सुरक्षा समिति (जिसके सदस्य डीटीओ होते हैं) की होती है।
- रंबल स्ट्रिप्स और बैरियर्स का महत्व: भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों पर सामान्य स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जा सकते। वहां केवल रंबल स्ट्रिप्स का ही प्रावधान है, जो वाहन चालक को कंपन और आवाज के जरिए सचेत करती हैं।
- नागरिकों का कानूनी अधिकार: सड़क पर पर्याप्त साइनेज, रेडियम लाइट और सेफ्टी बैरियर न होने के कारण यदि कोई दुर्घटना होती है, तो इसे प्रशासनिक लापरवाही माना जा सकता है। प्रत्येक नागरिक का यह अधिकार है कि उसे सुरक्षित और सुगम राष्ट्रीय राजमार्ग मिले।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: दारू पुलिस की पहल से एनएच 522 पर सुरक्षित होगा सफर (Editorial)
सिर्फ चालान काटना नहीं, बुनियादी ढांचे को सुधारना ही सड़क सुरक्षा का असली पैमाना
अक्सर देखा जाता है कि पुलिस का ध्यान केवल हेलमेट और सीट बेल्ट के चालान काटने पर ही केंद्रित रहता है, लेकिन दारू थाना पुलिस ने एनएच 522 पर दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सड़क का भौतिक निरीक्षण कर और उपकरणों की मांग कर असल पुलिसिंग का उदाहरण पेश किया है। हजारीबाग से बगोदर को जोड़ने वाली यह सड़क (NH 522) विकास की जीवनरेखा तो है, लेकिन तीखे मोड़ों और रिफ्लेक्टरों की कमी के कारण यह 'डेथ ट्रैप' भी बनती जा रही है।
दारू पुलिस द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में पुराने बैरियरों पर नए रेडियम लगाने, रंबल स्ट्रिप बनाने और स्लाइडर बैरियर की जो मांग की गई है, वह बेहद व्यावहारिक है। रात के समय इस हाईवे पर विजिबिलिटी काफी कम हो जाती है, जिसके कारण अनियंत्रित वाहन सीधे खाई में या पेड़ से टकरा जाते हैं। हजारीबाग जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) द्वारा इस प्रतिवेदन को गंभीरता से लेना और उपकरणों की उपलब्धता का आश्वासन देना प्रशासन की सकारात्मक संवेदनशीलता को दर्शाता है। उम्मीद है कि यह आश्वासन कागजी फाइलों में नहीं दबेगा और मानसून या सर्दियों के कोहरे से पहले एनएच 522 पर ये तमाम जीवन रक्षक उपकरण धरातल पर नजर आएंगे।

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