हजारीबाग उपायुक्त के जनता दरबार में उमड़ा जनसैलाब: जमीन विवाद से लेकर पेंशन तक की सुनी गईं शिकायतें, बिना भाइयों की सहमति वाली जमीन का म्यूटेशन रोकने का निर्देश
"समाहरणालय भवन में प्राप्त आवेदनों पर उपायुक्त ने लिया त्वरित संज्ञान; अंचल अधिकारियों और विभागीय अफसरों को नियमों के तहत तुरंत राहत देने का दिया कड़ा आदेश"— विशेष प्रशासनिक रिपोर्ट
प्रशासनिक ब्यूरो, हजारीबाग:
हजारीबाग जिले के आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से समाहरणालय भवन में एक बार फिर उपायुक्त के जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस जनता दरबार में जिले के विभिन्न सुदूरवर्ती प्रखंडों और शहरी क्षेत्रों से आए सैकड़ों लोगों ने अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक समस्याओं तथा प्रशासनिक शिकायतों को उपायुक्त के समक्ष रखा। सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 377 के अनुसार, बड़ी संख्या में नागरिक अपनी पुरानी समस्याओं के समाधान की ठोस उम्मीद लेकर पहुंचे थे। उपायुक्त ने संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी आवेदकों की शिकायतों को एक-एक कर गंभीरता से सुना और उनके त्वरित निष्पादन के लिए मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
![]() |
| Hazaribagh DC Janta Darbar Action |
आपसी सहमति के बिना संयुक्त जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, सीओ को दिए कड़े निर्देश
जनता दरबार में सुनवाई के दौरान जमीन धोखाधड़ी से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया। बिना भाइयों की आपसी सहमति और दस्तखत के एक संयुक्त जमीन की रजिस्ट्री करा लेने की शिकायत पर उपायुक्त ने तत्काल संज्ञान लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त ने संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) को उक्त विवादित भूमि का म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) तत्काल प्रभाव से रोकने का सख्त निर्देश दिया। उपायुक्त ने प्रशासनिक रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इज़माल यानी संयुक्त पारिवारिक संपत्ति से संबंधित किसी भी रजिस्ट्री एवं म्यूटेशन की प्रक्रिया में सभी हिस्सेदारों और पक्षकारों की लिखित सहमति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार का भूमि विवाद या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
जमीन कब्जा, पेंशन और दिव्यांगों को ट्राई-साइकिल देने से जुड़े मामलों पर तत्काल कार्रवाई
इस साप्ताहिक जनता दरबार में मुख्य रूप से जिला प्रशासन को निम्नलिखित श्रेणियों के आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर उपायुक्त ने ऑन-द-स्पॉट निर्देश दिए:
- भूमि और राजस्व: जमीन के आपसी विवाद, म्यूटेशन में हो रही देरी, रैयती जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा और ऑनलाइन लगान रसीद निर्गत करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों से संबंधित मामले।
- सामाजिक सुरक्षा: वृद्धावस्था व विधवा पेंशन की स्वीकृति में आ रही अड़चनें और दिव्यांगजनों के लिए अत्याधुनिक बैटरी चालित ट्राई-साइकिल उपलब्ध कराने की मांग।
- अनुकंपा नियुक्ति: विभिन्न सरकारी विभागों में लंबित अनुकंपा के आधार पर बहाली की प्रक्रियाओं को गति देने से जुड़े आवेदन।
विभागीय पदाधिकारियों को समय सीमा के भीतर आवेदकों को राहत देने का आदेश
जनता दरबार में आए अन्य सभी मामलों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को सीधे आवेदन अग्रसारित किए। उन्होंने कड़े लहजे में निर्देशित किया कि सभी अधिकारी सरकारी नियमों और प्रावधानों के तहत इन मामलों पर समय सीमा के भीतर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करें, ताकि पीड़ित आवेदकों को जल्द से जल्द वास्तविक राहत प्रदान की जा सके। इस दौरान समाहरणालय के कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न विभागों के नोडल अफसर मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

No comments
Post a Comment