हजारीबाग में कानून की अलख जगा रहा DLSA: 16 प्रखंडों में 90 दिनों का महाभियान शुरू; प्रधान जिला न्यायाधीश और सचिव के नेतृत्व में घर-घर पहुंच रहे 'अधिकार मित्र'
दारू प्रखंड के जिंगा पंचायत में चौक-चौराहों पर दी गई कानूनी जानकारी; बाल विवाह, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा और नशे के खिलाफ ग्रामीणों को किया गया जागरूक।
विशेष संवाददाता, दारू (हजारीबाग)
- रिपोर्टर: विशेष संवाददाता (News Prahari) / नरेश सोनी (Editor-in-Chief)
- समाचार स्रोत (Source): जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) कार्यालय, हजारीबाग।
हजारीबाग। "न्याय पाना सभी का अधिकार है" और इसी संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए हजारीबाग जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) इन दिनों एक बड़े मिशन पर काम कर रहा है। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के निर्देशानुसार और प्रधान जिला न्यायाधीश सह अध्यक्ष (डीएलएसए) हजारीबाग, धुर्व चंद्र मिश्रा के दिशानिर्देश में जिले के सभी 16 प्रखंडों में 90 दिवसीय कानूनी जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
![]() |
| न्याय पाना सभी का अधिकार है!" ⚖️✊ |
इसी महाभियान के तहत दारू प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत जिंगा में डीएलएसए की टीम ने दस्तक दी। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों के घर-घर, गलियों और मुख्य चौक-चौराहों पर जाकर लोगों को उनके कानूनी अधिकारों और बुनियादी कानूनों के प्रति जागरूक किया गया।
डीएलएसए सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी खुद कर रहे हैं मॉनिटरिंग
इस व्यापक कार्यक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि डीएलएसए के सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी खुद इस पूरे 90 दिवसीय अभियान की पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
बातचीत के क्रम में सचिव डॉ. रवि प्रकाश तिवारी ने बताया:
"यह कार्यक्रम झालसा के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी तरह जन-केंद्रित है, जो लगातार 90 दिनों तक बिना रुके चलेगा। इसके लिए हमारे 'अधिकार मित्रों' (लीगल वॉलिंटियर्स) को समय-समय पर विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक कानून की जानकारी पहुंचाना और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति सशक्त बनाना है।"
सामाजिक कुरीतियों और नशे के विरुद्ध 'अधिकार मित्रों' ने दिया सुझाव
जिंगा पंचायत में पहुंचे प्रशिक्षित अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और युवाओं से सीधा संवाद स्थापित किया। टीम ने ग्रामीणों को समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों के कानूनी पक्षों से अवगत कराया, जिसमें मुख्य रूप से:
- बाल विवाह के खिलाफ कड़े कानून।
- भ्रूण हत्या और लैंगिक असमानता पर रोक।
- दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा के खिलाफ कानूनी प्रावधान।
- नशीले पदार्थों के सेवन के दुष्परिणाम और उससे बचने के उपाय।
अधिकार मित्रों ने ग्रामीणों को इन सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और किसी भी प्रकार के शोषण या विवाद की स्थिति में मुफ्त कानूनी सहायता के लिए सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) से संपर्क करने का सुझाव दिया। इस मौके पर पारा लीगल वॉलिंटियर्स (PLVs) सहित भारी संख्या में स्थानीय महिला और पुरुष ग्रामीण उपस्थित थे।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: कानूनी साक्षरता से ही सशक्त बनेगा ग्रामीण हजारीबाग (Editorial)
अदालतों के कमरों से निकलकर चौपालों तक पहुंचता न्याय
हमारे देश में कानून तो कई हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण अक्सर लोग अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित रह जाते हैं। हजारीबाग डीएलएसए द्वारा चलाया जा रहा यह 90 दिवसीय आउटरीच कार्यक्रम इसी दूरी को पाटने का एक सराहनीय प्रयास है। 'अधिकार मित्रों' का सीधे लोगों के घरों और चौक-चौराहों तक पहुंचना यह साबित करता है कि अब न्याय व्यवस्था खुद चलकर जनता के द्वार तक आ रही है।
बाल विवाह, नशाखोरी और दहेज जैसी समस्याएं आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को खोखला कर रही हैं। केवल मुकदमों से इन्हें नहीं जीता जा सकता, इसके लिए व्यापक सामाजिक चेतना जरूरी है। प्रधान जिला न्यायाधीश धुर्व चंद्र मिश्रा और सचिव डॉ. तिवारी की यह पहल हजारीबाग के सभी 16 प्रखंडों में प्रशासनिक और कानूनी जवाबदेही को मजबूत करेगी। हालांकि, इस अभियान की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जागरूकता के बाद ग्रामीण अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में कितने सक्षम महसूस करते हैं।

No comments
Post a Comment