गुरुनानक पैलेस में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया गुरु अर्जन देव का शहीदी दिवस: विधायक प्रदीप प्रसाद ने टेका माथा
"बस स्टैंड के पास आयोजित धार्मिक दीवान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़; प्रचंड गर्मी के बीच राहगीरों को ठंडा शरबत पिलाकर की गई मानव सेवा"— विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
सांस्कृतिक एवं सामाजिक ब्यूरो, हजारीबाग:
हजारीबाग के सरकारी बस स्टैंड के समीप स्थित गुरुनानक पैलेस में सिखों के पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव का पावन शहीदी दिवस पूरी श्रद्धा, भक्ति और सम्मान के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आयोजित विशेष धार्मिक कार्यक्रम में हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद मुख्य रूप से शामिल हुए। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद लिया और गुरु अर्जन देव के महान बलिदान को याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। इस गरिमामयी कार्यक्रम में जिले के बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, बुद्धिजीवियों और गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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| Hazaribagh Gurunanak Palace |
त्याग, तपस्या और सेवा के प्रतीक थे गुरु अर्जन देव: विधायक प्रदीप प्रसाद
शहीदी गुरुपर्व के अवसर पर उपस्थित संगत को संबोधित करते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि गुरु अर्जन देव का पूरा जीवन त्याग, तपस्या, सेवा, अटूट सत्य और मानव कल्याण के सर्वोच्च आदर्शों से परिपूर्ण था। उन्होंने मानवता और धर्म की रक्षा के लिए हंसते-हंसते अपनी शहादत दे दी। उनकी यह अद्वितीय शहादत आज भी हम सभी को अधर्म के खिलाफ खड़े होने और मानवता व आपसी सद्भाव के मार्ग पर निरंतर चलने की प्रेरणा देती है। गुरु अर्जन देव का महान बलिदान भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और इतिहास का एक ऐसा अमूल्य अध्याय है, जो आने वाली पीढ़ियों को युगों-युगों तक सही राह दिखाता रहेगा।
भीषण गर्मी में राहगीरों के बीच छबील लगाकर बांटा गया ठंडा शरबत
सिख परंपरा के अनुसार, गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस पर सेवा भाव का अनूठा परिचय दिया गया। कार्यक्रम के दौरान पैलेस के बाहर मुख्य सड़क पर विशेष छबील लगाई गई, जहां भीषण गर्मी और प्रचंड धूप से बेहाल राहगीरों, रिक्शा चालकों, यात्रियों और स्थानीय लोगों के बीच ठंडे मीठे शरबत का वितरण किया गया। इस पुनीत सेवा कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों और युवाओं ने बेहद उत्साहपूर्वक भाग लिया। धार्मिक दीवान के समापन पर संगत ने गुरु अर्जन देव के आदर्शों एवं उनकी पवित्र शिक्षाओं को अपने व्यावहारिक जीवन में आत्मसात करने और उनके बताए परोपकारी मार्ग पर चलने का सामूहिक संकल्प लिया।

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