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Editor: Naresh Prasad Soni
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इचाक मनरेगा घोटाले में नया मोड़: वन विभाग की जमीन पर JCB से खोदे गए डोभा को नया दिखाकर फर्जी अटेंडेंस से राशि की निकासी, भूमि प्रतिवेदन में भी हेराफेरी

इचाक मनरेगा: योजना संख्या 3416007021 में प्रवेश कुमार सोनी के डोभा निर्माण में फर्जी भूमि प्रतिवेदन और NMMS से अवैध निकासी का आरोप।
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इचाक मनरेगा घोटाले में नया मोड़: वन विभाग की जमीन पर JCB से खोदे गए डोभा को नया दिखाकर फर्जी अटेंडेंस से राशि की निकासी, भूमि प्रतिवेदन में भी हेराफेरी

"प्रवेश कुमार सोनी की जमीन के नाम पर योजना संख्या 3416007021/IF/7080904120711 में चल रहा है बड़ा खेल; बीडीओ, बीपीओ, एई, जेई और पंचायत सचिव की मिलीभगत का आरोप"— विशेष खोजी रिपोर्ट

खोजी पत्रकारिता ब्यूरो, इचाक (हजारीबाग):

हजारीबाग जिले के इचाक प्रखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत नियमों को ताक पर रखकर सरकारी खजाने की खुली लूट का एक बेहद संगीन मामला प्रकाश में आया है। इचाक प्रखंड के प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों की कथित मिलीभगत से पूर्व में पूरी तरह प्रतिबंधित और निषिद्ध तरीके से 'JCB मशीन' द्वारा खोदे गए एक पुराने डोभा को नया (नवीनीकरण) दिखाकर धड़ल्ले से सरकारी राशि की अवैध निकासी की जा रही है। इस घोटाले को छुपाने के लिए न केवल फर्जी भूमि प्रतिवेदन (लैंड रिपोर्ट) का सहारा लिया गया है, बल्कि मनरेगा मोबाइल अटेंडेंस सिस्टम (NMMS) पर सुबह और शाम को फर्जी फोटो व सेल्फी अपलोड कर मस्टरोल भरा जा रहा है।

Ichak MNREGA Pravesh Kumar Sani Doba Scam

प्रवेश कुमार सोनी के नाम पर स्वीकृत है योजना, वन विभाग की भूमि पर हुआ है निर्माण

साक्ष्यों और स्थानीय शिकायतों के अनुसार, इस पूरे भ्रष्टाचार को योजना संख्या 3416007021/IF/7080904120711 के तहत अंजाम दिया जा रहा है, जिसका आधिकारिक नाम "प्रवेश कुमार सोनी के जमीन पर डोभा निर्माण" दर्ज है। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इस योजना के सरकारी कागजातों में भूमि प्रतिवेदन किसी दूसरी जगह का संलग्न कर दिया गया है, जबकि वास्तव में यह डोभा पूरी तरह से वन विभाग (फॉरेस्ट लैंड) के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत निर्मित है। नियमों के मुताबिक, मनरेगा के तहत न तो वन विभाग की भूमि पर बिना एनओसी के काम हो सकता है और न ही डोभा निर्माण में JCB मशीन का उपयोग किया जा सकता है। इसके बावजूद इचाक प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (बीपीओ), सहायक अभियंता (एई), कनीय अभियंता (जेई) और संबंधित पंचायत सचिव के इस भ्रष्ट सिंडिकेट ने फर्जी कागजात तैयार कर मस्टरोल जारी करवा दिया।

व्हाट्सएप पर शिकायत के बाद एई मनीष रंजन ने लगाई थी रोक, अब दोबारा शुरू हुई लूट

इस मामले में पहले भी प्रशासनिक स्तर पर शिकायत की जा चुकी है। सजग नागरिकों द्वारा पूर्व में इचाक में तैनात मनरेगा सहायक अभियंता (एई) मनीष रंजन को इस योजना में हो रही धांधली के संबंध में व्हाट्सएप के माध्यम से पुख्ता सबूत भेजे गए थे। उस दौरान शिकायत को सही पाते हुए सहायक अभियंता मनीष रंजन ने त्वरित कार्रवाई की थी और इस अवैध निकासी व कार्य पर कुछ समय के लिए पूरी तरह विराम लगा दिया था। लेकिन जैसे ही तकनीकी अधिकारी की निगरानी शिथिल हुई, भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों के इस सिंडिकेट ने एक बार फिर सिर उठा लिया। अब पुनः उसी पुरानी योजना का फर्जी तरीके से नवीनीकरण कर धड़ल्ले से सरकारी पैसों की निकासी की जा रही है।

NMMS पर सुबह-शाम फर्जी सेल्फी का खेल, उच्चस्तरीय जांच और FIR की मांग

सरकार द्वारा मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता के लिए अनिवार्य किए गए नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) की धज्जियां उड़ाते हुए योजना स्थल पर बिना किसी मजदूर के काम किए, केवल सुबह और शाम को फर्जी तरीके से तस्वीरें और सेल्फी पोर्टल पर अपलोड की जा रही हैं ताकि कागजी तौर पर काम को चालू दिखाया जा सके। इचाक प्रखंड के ग्रामीणों ने इस संगठित वित्तीय अपराध के खिलाफ हजारीबाग उपायुक्त (डीसी) और उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से एक उच्चस्तरीय जांच टीम गठित करने की मांग की है, ताकि योजना स्थल की भौतिक मापी कराई जा सके, वन विभाग की जमीन के अतिक्रमण की जांच हो और दोषी अधिकारियों व संवेदक के खिलाफ सीधे प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जा सके।

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