विभावि में पीएम ऊषा FDP: आधुनिक शिक्षा में डेटा विश्लेषण और AI की बढ़ती भूमिका पर विशेषज्ञों ने दी विस्तृत जानकारी, कुलपति ने किया सम्मानित
"विद्यार्थियों की पृष्ठभूमि और क्षमता को ध्यान में रखकर हो समावेशी व न्यायसंगत मूल्यांकन"— FDP में बोले शिक्षाविद
विशेष संवाददाता, हजारीबाग
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) परिसर
हजारीबाग:
विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) में पीएम ऊषा (PM-USHA) के अंतर्गत आयोजित “Equity-Centred Higher Education: Integrating Bhartiya Jnana Parampara and Artificial Intelligence (AI)” विषयक संकाय विकास कार्यक्रम (FDP) के तीसरे एवं चौथे दिन आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित नवाचारों तथा समावेशी मूल्यांकन प्रणाली पर देश के विभिन्न राज्यों से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।
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| 🤖 स्मार्ट होगी शिक्षा प्रणाली: ऑनलाइन-ऑफलाइन शिक्षण की चुनौतियों, Active Learning और शिक्षा में 'एआई एनालिटिक्स' (डेटा विश्लेषण) के बढ़ते कदमों पर हुआ गहन मंथन। |
ऑनलाइन बनाम ऑनलाइन शिक्षण की चुनौतियों पर चर्चा
कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए पीएम-ऊषा के निदेशक डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि FDP के तीसरे दिन के प्रथम सत्र में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. मधुसूदन ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन शिक्षण की विशेषताओं और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की।
इसके बाद आयोजित द्वितीय सत्र में इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन (IUCTE), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी के सहायक प्रोफेसर डॉ. कुशाग्री सिंह ने “AI आधारित शिक्षण एवं Active Learning” विषय पर अपना व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए शिक्षण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
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| स्मार्ट होगी शिक्षा प्रणाली: ऑनलाइन-ऑफलाइन शिक्षण की चुनौतियों, Active Learning और शिक्षा में 'एआई एनालिटिक्स' (डेटा विश्लेषण) के बढ़ते कदमों पर हुआ गहन मंथन। |
मूल्यांकन में भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और AI का समावेश
FDP के चौथे दिन का मुख्य फोकस मूल्यांकन में भारतीय ज्ञान परंपरा, एआई और समानता पर रहा। इस दौरान अमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ की एसोसिएट प्रोफेसर एवं बी.एड. प्रोग्राम लीडर डॉ. ऋतु त्रिपाठी चक्रवर्ती ने “IKS & AI in Assessment” तथा “Equity in Evaluation” विषयों पर सारगर्भित व्याख्यान दिया।
डॉ. चक्रवर्ती ने समावेशी एवं न्यायसंगत मूल्यांकन की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि:
"आज के दौर में प्रत्येक विद्यार्थी की पृष्ठभूमि, उनकी व्यक्तिगत क्षमता और अधिगम (सीखने की) शैली को ध्यान में रखकर ही मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी छात्र के साथ असमानता न हो।"
शिक्षा में डेटा विश्लेषण और एआई एनालिटिक्स की भूमिका
इसके पश्चात आयोजित सत्र में डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने “AI Analytics in Education” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने आधुनिक शिक्षा प्रणाली में डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की लगातार बढ़ती भूमिका पर व्यावहारिक प्रकाश डाला।
समारोह के दौरान विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा एवं सीसीडीसी (CCDC) प्रो. मिथिलेश कुमार सिंह ने संयुक्त रूप से बाहर से आए सभी विषय विशेषज्ञों को अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया तथा FDP में भाग ले रहे सभी शिक्षक-प्रतिभागियों को भविष्य के शिक्षण के लिए प्रोत्साहित किया।
📋 न्यूज प्रहरी एजुकेशन गाइड (AI in Modern Education)
📌 उच्च शिक्षा में AI: प्राध्यापकों और छात्रों के लिए क्यों जरूरी है कृत्रिम बुद्धिमत्ता?
- पर्सनलाइज्ड लर्निंग: एआई की मदद से शिक्षक हर छात्र की सीखने की क्षमता के अनुसार कस्टमाइज्ड कंटेंट तैयार कर सकते हैं, जिससे कमजोर छात्रों को समझने में आसानी होती है।
- डेटा संचालित मूल्यांकन (AI Analytics): डेटा विश्लेषण के जरिए छात्रों के टेस्ट रिजल्ट, उपस्थिति और क्लास परफॉर्मेंस का सटीक आकलन किया जा सकता है, जिससे निष्पक्ष परिणाम मिलते हैं।
- समय की बचत: असाइनमेंट ट्रैकिंग और बेसिक ग्रेडिंग जैसे प्रशासनिक कार्यों को एआई के जरिए ऑटोमेट करके प्रोफेसर अपना मुख्य समय शोध (Research) और छात्रों के व्यक्तिगत मार्गदर्शन में लगा सकते हैं।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: भारतीय ज्ञान परंपरा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भविष्य (Editorial)
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विनोबा भावे विश्वविद्यालय में पीएम ऊषा के तहत आयोजित यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) समसामयिक और बेहद दूरदर्शी है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया तकनीकी बदलावों से गुजर रही है, तब उच्च शिक्षा में 'भारतीय ज्ञान परंपरा' (IKS) और 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) को एक साथ जोड़ना भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के मूल उद्देश्यों को दर्शाता है।
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, बीएचयू और अमिटी यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विद्वानों का जुटना विभावि के शैक्षणिक स्तर को मजबूती प्रदान करता है। शिक्षा में एआई एनालिटिक्स का उपयोग और मूल्यांकन में समानता (Equity) ऐसे विषय हैं, जिन्हें हर कॉलेज स्तर पर लागू करने की जरूरत है। कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा की देखरेख में ऐसे कार्यक्रमों का निरंतर होना हजारीबाग के लिए गर्व की बात है।


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