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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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जी.एम. इंटर महाविद्यालय में विज्ञान प्रदर्शनी का जलवा; 125 छात्रों ने पेश किए 25 नवाचारी मॉडल, विजेताओं को मिला सम्मान

 जी.एम. इंटर महाविद्यालय में विज्ञान प्रदर्शनी का जलवा; 125 छात्रों ने पेश किए 25 नवाचारी मॉडल, विजेताओं को मिला सम्मान

'ह्यूमन एनाटॉमी' मॉडल ने जीता प्रथम पुरस्कार: सचिव विनय कुमार ने कहा- नवाचार और क्रिएटिविटी ही लक्ष्य प्राप्ति का असली मार्ग।

हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी डेस्क)।

हजारीबाग के प्रतिष्ठित जी.एम. इंटर महाविद्यालय के प्रांगण में विज्ञान विभाग द्वारा भव्य 'विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी' का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में छात्र-छात्राओं ने अपनी वैज्ञानिक सोच और तकनीकी कौशल का बेमिसाल प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ महाविद्यालय के सचिव विनय कुमार और प्राचार्य शंभू कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

Vigyan model pradarshani

नवाचार ही भविष्य की कुंजी: सचिव विनय कुमार

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के सचिव विनय कुमार ने कहा कि इन मॉडलों में नवाचार (Innovation) की स्पष्ट झलक दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा, "आपकी यह क्रिएटिविटी दर्शाती है कि आप केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं हैं। एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज हमारे जीवन में लक्ष्य पाने के लिए सहायक और मददगार साबित होती हैं।"

Sammait kiya gaya chhatro ko

वैज्ञानिक सोच का विकास: प्राचार्य शंभू कुमार

प्राचार्य शंभू कुमार ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में नवीन ज्ञान का संचार होता है। विज्ञान के प्रति छात्रों का यह लगाव भविष्य में उन्हें सफल वैज्ञानिक और शोधकर्ता बनाने में मदद करेगा।

प्रमुख मॉडल्स और विजेता

इस प्रदर्शनी में कुल 25 मॉडल्स प्रस्तुत किए गए, जिसमें 125 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। जजों के कठिन निर्णय के बाद विजेताओं के नामों की घोषणा की गई:

प्रथम पुरस्कार: 'ह्यूमन एनाटॉमी' मॉडल के लिए रितिका कुमारी, रिषिका कुमारी, सानिया ठाकुर और रानी कुमारी को मिला।

द्वितीय पुरस्कार: 'व्हीटस्टोन ब्रिज' मॉडल बनाने वाली आंचल कुमारी, खुशी कुमारी और प्रज्ञा कुमारी की टीम को दिया गया।

तृतीय पुरस्कार: 'हाइड्रोलिक ब्रिज' मॉडल के लिए आरती कुमारी, साइमा परवीन, पुष्पा कुमारी, ज्योति कुमारी और कीर्ति कुमारी को प्रदान किया गया।

आकर्षण का केंद्र रहे ये प्रोजेक्ट्स

विज्ञान प्रदर्शनी में स्मार्ट लॉक इंडिकेटर, स्मार्ट विलेज, वेस्ट एनर्जी टू यूजफुल एनर्जी, ज्वालामुखी, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, पीएच स्केल, डीएनए स्ट्रक्चर, एसिड रेन, कार्बन अब्जॉर्बर, चंद्रयान, बिजली प्लांट, पवन चक्की और सेंसर बेस्ड वर्किंग मॉडल आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे।

मार्गदर्शक और अतिथि

प्रदर्शनी का अवलोकन सीएम एक्सीलेंस के विज्ञान अध्यापक लक्ष्मण कुमार, सतीश कुमार, और रमेश पोद्दार ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के परीक्षा महानियंत्रक रंजन कुमार, शिक्षक नीतू कुमारी, उमेश कुमार, मणि रत्नम कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे। विद्यार्थियों ने यह सभी मॉडल्स विज्ञान शिक्षक सुशीला कुमारी, रंजीत कुमार, जयराज कुमार और नितेश कुमार के कुशल मार्गदर्शन में तैयार किए थे।

संपादकीय संदेश:

जी.एम. इंटर महाविद्यालय की यह पहल सराहनीय है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के छात्रों को एक बेहतर मंच प्रदान कर रही है।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी प्रधान सम्पादक।

जल संरक्षण की ओर बढ़ते कदम: जी.एम. महाविद्यालय इचाक में 'जल पखवाड़ा 2026' के तहत प्रजल शपथ का आयोजन

हजारीबाग: जी.एम. महाविद्यालय इचाक में गूंजा 'जल ही जीवन' का संकल्प; प्रजल शपथ से जल संरक्षण का आह्वान

 "जल पखवाड़ा 2026" के तहत प्राचार्य शंभू कुमार की अध्यक्षता में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, छात्रों ने लिया वर्षा जल संचयन का संकल्प।

जल संरक्षण की ओर बढ़ते कदम: जी.एम. महाविद्यालय इचाक में 'जल पखवाड़ा 2026' के तहत प्रजल शपथ का आयोजन

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।

इचाक (हजारीबाग): जल की हर एक बूंद को भविष्य के लिए सहेजने के उद्देश्य से आज जी.एम. महाविद्यालय, इचाक के प्रांगण में “जल पखवाड़ा: 2026” के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्राचार्य शंभू कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण 'प्रजल (प्रज्ञा + जल) शपथ' रहा, जिसमें कॉलेज के छात्र-छात्राओं सहित पूरे शैक्षणिक स्टाफ ने सक्रिय भूमिका निभाई।

आप अपने घर में जल बचाने के लिए क्या उपाय करते हैं? कमेंट में बताएं।

सामूहिक सहभागिता से बनेगा जन-आंदोलन

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्य शंभू कुमार ने जल संकट की गंभीरता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, "वर्तमान समय में जिस गति से जल स्तर नीचे जा रहा है, वह पूरी मानवता के लिए खतरे की घंटी है। जल ही जीवन का आधार है और इसके बिना अस्तित्व की कल्पना करना भी व्यर्थ है।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल संरक्षण को केवल एक सरकारी अभियान न मानकर एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी के रूप में अपनाना होगा।

शिक्षक रंजन कुमार ने दिलाई 'प्रजल शपथ'

समारोह के दौरान महाविद्यालय के शिक्षक रंजन कुमार ने सभी उपस्थित प्रतिभागियों को 'प्रजल शपथ' दिलाई। इस संकल्प के माध्यम से छात्रों और कर्मचारियों ने वचन दिया कि:

वे दैनिक जीवन में जल का दुरुपयोग नहीं करेंगे।

अपने घरों और आसपास वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) को बढ़ावा देंगे।

पारंपरिक जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाएंगे और उन्हें स्वच्छ रखेंगे।

समाज के अन्य लोगों को भी जल की महत्ता समझाकर जागरूक करेंगे।

सकारात्मक बदलाव की उम्मीद

कार्यक्रम का संचालन शिक्षक रत्नेश कुमार राणा ने अत्यंत प्रभावी ढंग से किया। इस अवसर पर अजीत हांसदा, संजीत कुमार यादव, रवि महतो और पार्वती कुमारी जैसे प्रमुख वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने आधुनिक तकनीक और पारंपरिक तरीकों के मेल से जल बचाने के सुझाव दिए।

अंत में, प्रभारी शिक्षक पंकज कुमार ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महाविद्यालय प्रशासन इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए छात्रों में सामाजिक चेतना जगाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि 'जल पखवाड़ा 2026' समाज में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।

इनकी रही मुख्य भूमिका

इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में बिनोद कुमार, कृष्ण कुमार, राजकुमार सिन्हा, सुनीता टोप्पो और सोनी कुमारी का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने सामूहिक रूप से जल बचाने के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में रामनवमी अवकाश में संशोधन और नए कुलपति प्रभार की विस्तृत रिपोर्ट

विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग में रामनवमी अवकाश में संशोधन और नए कुलपति प्रभार की विस्तृत रिपोर्ट

HAZARIBAGH: झारखंड के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शुमार विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग ने आगामी रामनवमी के त्यौहार को देखते हुए अपनी वार्षिक अवकाश तालिका में महत्वपूर्ण आंशिक संशोधन किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय राज्य सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग द्वारा प्राप्त निर्देशों के आलोक में लिया गया है। इस बदलाव का सीधा प्रभाव विश्वविद्यालय मुख्यालय सहित राज्य के विभिन्न जिलों में फैले इसके तमाम अंगीभूत और संबद्ध महाविद्यालयों पर पड़ेगा। विद्यार्थियों और शैक्षणिक कर्मचारियों के लिए यह जानना आवश्यक है कि पूर्व में निर्धारित तिथियों में अब बदलाव कर दिया गया है, ताकि त्यौहार की गरिमा और स्थानीय परंपराओं का उचित निर्वहन सुनिश्चित किया जा सके।
विनोबा भावे विश्वविद्यालय हजारीबाग का प्रशासनिक भवन जहाँ रामनवमी अवकाश के संबंध में नई अधिसूचना जारी की गई है।


विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, झारखंड सरकार के अवर सचिव द्वारा प्रेषित पत्रांक 1857, दिनांक 25 मार्च 2026 के संदर्भ में यह कार्रवाई की गई है। पूर्व में जारी की गई अवकाश तालिका में रामनवमी के लिए 26 मार्च को छुट्टी निर्धारित की गई थी, लेकिन अब संशोधित आदेश के तहत 26 मार्च के स्थान पर 27 मार्च को पूरे विश्वविद्यालय परिक्षेत्र में अवकाश रहेगा। इसका अर्थ यह है कि विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले सभी कॉलेज अब 27 मार्च को बंद रहेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह फेरबदल केवल रामनवमी के विशेष अवकाश के लिए है और अन्य दिनों की कार्यप्रणाली पहले की तरह ही संचालित की जाएगी।

कुलसचिव डॉ. प्रणिता ने इस विषय पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि केवल सामान्य अवकाश ही नहीं, बल्कि प्रतिबंधित अवकाशों की सूची में भी कुछ सुधार किए गए हैं। 19 मार्च 2026 को जो अधिसूचना जारी हुई थी, उसमें अब आंशिक बदलाव कर दिया गया है। हजारीबाग जिले में स्थित विश्वविद्यालय के मुख्यालय और इसकी अन्य महत्वपूर्ण इकाइयों के लिए पहले 25, 26 और 28 मार्च को प्रतिबंधित अवकाश घोषित था। नई अधिसूचना के प्रभावी होने के बाद, अब यह प्रतिबंधित अवकाश 25, 27 और 28 मार्च को मान्य होगा। इस स्पष्टीकरण से कर्मचारियों के बीच बनी असमंजस की स्थिति समाप्त हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि इन विशेष तिथियों के अलावा बाकी सभी कार्य दिवस और छुट्टियां अपनी पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार ही रहेंगी।
इसी बीच, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ढांचे में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। विश्वविद्यालय के समाज विज्ञान संकाय की वर्तमान अध्यक्षा और गृह विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. रेणु बोस को विश्वविद्यालय के कुलपति का प्रभार सौंपा गया है। वर्तमान कुलपति प्रोफेसर चंद्र भूषण शर्मा के अवकाश पर जाने के कारण यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी डॉ. रेणु बोस को दी गई है। डॉ. बोस ने पदभार ग्रहण करने की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्हें 6 अप्रैल 2026 तक के लिए यह प्रभार दिया गया है। यह नियुक्ति स्वयं कुलपति द्वारा उनके अवकाश पर प्रस्थान करने से पूर्व की गई है, ताकि विश्वविद्यालय के दैनिक प्रशासनिक कार्यों और शैक्षणिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न हो।

डॉ. रेणु बोस की पहचान विश्वविद्यालय परिसर में एक बेहद अनुशासित और नियमों के प्रति सजग अधिकारी के रूप में रही है। उनके कार्यकाल के दौरान गृह विज्ञान विभाग ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं और अब कुलपति के रूप में उनके अनुभव का लाभ पूरे विश्वविद्यालय को मिलने की उम्मीद है। वह अपनी कार्यशैली में परिनियमें और संवैधानिक प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करने के लिए जानी जाती हैं, जो विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य है। उनके इस नए दायित्व को लेकर विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है।

यहाँ यह उल्लेख करना आवश्यक है कि डॉ. रेणु बोस के नाम की वर्तनी को लेकर पूर्व में कुछ तकनीकी त्रुटियाँ हुई थीं, जिसे अब सुधार लिया गया है। वरिय ब्यूरो चीफ प्रसन्न मिश्रा के सहयोग से प्राप्त जानकारी के आधार पर नाम की शुद्धता सुनिश्चित की गई है। विश्वविद्यालय की ओर से जारी सभी आगामी दस्तावेजों में अब 'रेणु बोस' नाम का ही प्रयोग किया जाएगा। इस तरह के प्रशासनिक बदलाव और अवकाश संशोधनों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराना छात्रों के हित में अत्यंत आवश्यक होता है, विशेषकर तब जब विश्वविद्यालय परीक्षाओं या नामांकन की प्रक्रिया के बीच से गुजर रहा हो।
रामनवमी का पर्व हजारीबाग और आसपास के क्षेत्रों में बहुत ही हर्षोल्लास और व्यापक स्तर पर मनाया जाता है। ऐसे में विश्वविद्यालय द्वारा अवकाश की तिथि में किया गया यह बदलाव स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए व्यवहारिक प्रतीत होता है। छात्र-छात्राओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने संबंधित विभागों और महाविद्यालयों के सूचना पट्ट का अवलोकन करते रहें ताकि किसी भी प्रकार की दुविधा न रहे। डॉ. रेणु बोस के नेतृत्व में विश्वविद्यालय प्रशासन वर्तमान में सत्र को नियमित करने और लंबित परिणामों को शीघ्र घोषित करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों को त्यौहार मनाने की सुविधा मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी पारदर्शिता बनी रहेगी। कुलपति के प्रभार में आए इस बदलाव से यह भी सुनिश्चित हुआ है कि शीर्ष पद रिक्त न रहे और फाइलों का निष्पादन समय पर होता रहे। आगामी 6 अप्रैल तक डॉ. बोस विश्वविद्यालय के सभी महत्वपूर्ण निर्णयों की निगरानी करेंगी।

Naresh Soni Editor in Chief.

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