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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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MMDR Act 2026: CM हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र, खान एवं खनिज संशोधन विधेयक पर जताया कड़ा विरोध

 

खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026: CM हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखा पत्र; राज्यों की स्वायत्तता और आदिवासी अधिकारों पर जताया गंभीर संकट

राँची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार द्वारा संसद के दोनों सदनों से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक विस्तृत एवं औपचारिक पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने इस विधेयक से झारखंड, यहाँ के आदिवासी समुदायों, खनन प्रभावित क्षेत्रों तथा राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से अवगत कराया है और राष्ट्रपति से संविधान के तहत हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है।

Jharkhand CM Hemant Soren official letter to President Droupadi Murmu regarding MMDR Bill 2026

धारा 9D जोड़ने का विरोध: राज्यों के कर (Cess) लगाने के अधिकार पर बंदिश

​मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रस्तावित संशोधन में MMDR अधिनियम के तहत धारा 9D जोड़े जाने का प्रावधान किया गया है।

  • शर्तों के अधीन होगा कर: इस नए प्रावधान से राज्य सरकारें खनिज अधिकारों अथवा खनिज वहन भूमि पर किसी भी प्रकार का कर, उपकर (Cess) या अन्य लेवी (Levy) केवल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन ही लगा सकेंगी।
  • बकाया दावों पर असर: इसके अतिरिक्त, पूर्व में लगाए गए उपकरों के बकाया दावों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संविधान पीठ के फैसले का हवाला

​सीएम हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को ध्यान दिलाया कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने Mineral Area Development Authority बनाम Steel Authority of India Ltd. मामले में ऐतिहासिक निर्णय दिया था।

​अदालत ने स्पष्ट किया था कि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के तहत राज्यों को खनिज वहन भूमि पर कर या उपकर लगाने का पूर्ण अधिकार है। इसी फैसले के आधार पर झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस अधिनियम, 2024 पारित कर अधिसूचित किया था, ताकि प्राप्त राजस्व का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और सामाजिक सुरक्षा में किया जा सके।

झारखंड को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ के राजस्व नुकसान की आशंका

​पत्र में आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि:

  • ​आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, झारखंड के स्वयं के गैर-कर राजस्व का लगभग 84.9 प्रतिशत हिस्सा खनन क्षेत्र से प्राप्त होता है।
  • ​झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस से वर्ष 2024-25 में ₹1,379 करोड़, वर्ष 2025-26 में ₹7,488 करोड़ की प्राप्ति हुई है तथा 2026-27 में लगभग ₹13,215 करोड़ की प्राप्ति का अनुमान है।

​मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि यदि यह संशोधन प्रभावी हुआ, तो राज्य को प्रतिवर्ष हजारों करोड़ रुपये के राजस्व से वंचित होना पड़ेगा, जिससे 'मुख्यमंत्री मंइयां सम्मान योजना' (50 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक सहायता) जैसी प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

संघीय ढांचे और आदिवासियों के अधिकारों का सवाल

​मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा कि यह केवल राजस्व का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के संघीय ढांचे (Federal Structure), राज्यों की विधायी स्वायत्तता और विशेषकर आदिवासी समाज के हितों से जुड़ा है। दशकों से विस्थापन, प्रदूषण और पर्यावरणीय क्षति झेल रहे आदिवासी समाज को खनिज संपदा से उत्पन्न मूल्य का न्यायसंगत हिस्सा मिलना अत्यंत आवश्यक है।

Source of Information: मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) झारखंड / आधिकारिक पत्राचार (दिनांक: 13.08.2026)

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