-->
होम राशिफल
YouTube
ई-पेपर राज्य चुनें
EDITOR: NARESH PRASAD SONI
--:--
...
🌤
--°C
Special Offer
🎙️ न्यूज़ प्रहरी रिपोर्टर बनें
क्या आप अपने क्षेत्र की आवाज बनना चाहते हैं?
मात्र 5 मिनट में अपनी पत्रकार ID एवं अपॉइंटमेंट लेटर प्राप्त करें!

क्या नेताओं को 'फायर' करने का हक जनता को मिलेगा? राघव चड्ढा ने राज्यसभा में की 'राइट टू रिकॉल' कानून की बड़ी मांग

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने 'राइट टू रिकॉल' कानून की मांग करते हुए कहा कि जनता को नेताओं को 5 साल से पहले हटाने का हक मिलना चाहिए। उन्होंने अमेरिका के
0


क्या नेताओं को 'फायर' करने का हक जनता को मिलेगा? राघव चड्ढा ने राज्यसभा में की 'राइट टू रिकॉल' कानून की बड़ी मांग

New Delhi: भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा में चुनाव सुधारों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी मांग उठी है आम आदमी पार्टी के युवा सांसद राघव चड्ढा ने सदन के पटल पर 'राइट टू रिकॉल' यानी चुने हुए प्रतिनिधियों को वापस बुलाने के अधिकार की पुरजोर वकालत की है उनका कहना है कि जिस तरह देश का मतदाता अपने नेताओं को चुनने यानी 'हायर' करने का अधिकार रखता है ठीक उसी तरह काम न करने वाले नेताओं को पद से हटाने यानी 'फायर' करने का अधिकार भी जनता के पास सुरक्षित होना चाहिए राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि चुनाव जीतने के बाद कई बार जनप्रतिनिधि अपने वादों से मुकर जाते हैं और जनता से दूरी बना लेते हैं ऐसे में लोकतंत्र में पांच साल का लंबा इंतजार जनता के साथ अन्याय जैसा है उन्होंने सदन को याद दिलाया कि भारतीय संविधान में राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के जजों को भी महाभियोग के जरिए कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का प्रावधान मौजूद है तो फिर सांसदों और विधायकों के लिए ऐसी जवाबदेही क्यों नहीं होनी चाहिए अपनी बात को मजबूती देने के लिए राघव चड्ढा ने दुनिया के पुराने लोकतंत्रों का हवाला दिया उन्होंने अमेरिका के कैलिफोर्निया का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे वहां की जनता ने गवर्नर ग्रे डेविस को काम न करने पर पद से हटा दिया था और उनकी जगह नया गवर्नर चुना गया था भारत में भी इस कानून की सख्त जरूरत बताते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए एक बीमा पॉलिसी की तरह काम करेगा उन्होंने इस कानून के दुरुपयोग की आशंकाओं पर भी विराम लगाते हुए सुझाव दिया कि रिकॉल की प्रक्रिया तभी शुरू होनी चाहिए जब एक बड़ी संख्या में मतदाता इसकी लिखित मांग करें और नेता को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिले साथ ही उन्होंने अठारह महीने के 'कूलिंग पीरियड' का भी प्रस्ताव रखा ताकि नवनिर्वाचित नेता को काम करने का पर्याप्त समय मिल सके राघव चड्ढा का मानना है कि अगर यह कानून लागू होता है तो राजनीतिक दलों में अच्छे उम्मीदवारों को टिकट देने की होड़ लगेगी और भारतीय लोकतंत्र और अधिक परिपक्व होकर उभरेगा।

कोई टिप्पणी नहीं

एक टिप्पणी भेजें

© 2025 News Prahari. All Rights Reserved. | Reg No: JH-11-0021972