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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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शिक्षा के बिना विकास अधूरा, मुखिया सम्मेलन में गूंजा जन-भागीदारी का संकल्प

हजारीबाग में झारखंड शिक्षा परियोजना का मुखिया सम्मेलन संपन्न। शिक्षा में जन-भागीदारी, शत-प्रतिशत नामांकन और सामाजिक बदलाव पर दिया गया जोर।
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शिक्षा के बिना विकास अधूरा, मुखिया सम्मेलन में गूंजा जन-भागीदारी का संकल्प

हजारीबाग। झारखंड शिक्षा परियोजना द्वारा आयोजित 'मुखिया सम्मेलन 2025-26' ने जिले में शिक्षा की नई अलख जगा दी है। नगर भवन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में जिले भर के जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहाँ मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि कैसे ग्रामीण स्तर पर मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि स्कूलों की कायाकल्प कर सकते हैं।

हजारीबाग नगर भवन में आयोजित 'मुखिया सम्मेलन 2025-26' के दौरान दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं अन्य अतिथि।

शिक्षा ही समाज का आधार: मुखिया उत्तम महतो

कार्यक्रम के दौरान विष्णुगढ़ प्रखंड के सारुकुदर पंचायत के मुखिया  उत्तम महतो ने एक अत्यंत प्रभावशाली बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी समाज या राज्य का विकास तब तक संभव नहीं है जब तक वहां की शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ न हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनप्रतिनिधियों को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें स्कूलों के दैनिक संचालन और बच्चों की उपस्थिति में भी सक्रिय रुचि लेनी चाहिए।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ सम्मेलन का आगाज

सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO), जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE), और अतिरिक्त कार्यक्रम पदाधिकारी (APO) द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की गई। यह सम्मेलन केवल एक बैठक नहीं बल्कि एक कार्यशाला के रूप में उभरा, जिसमें हजारीबाग की शिक्षा व्यवस्था को राज्य के लिए एक मॉडल बनाने की चर्चा हुई।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका: निरीक्षण से लेकर मूल्यांकन तक

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अपने संबोधन में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूलों के लिए जो भी विकास योजनाएं बनती हैं, उनका जमीन पर उतरना पूरी तरह से जनप्रतिनिधियों के सहयोग पर निर्भर करता है। जब एक मुखिया स्कूल का नियमित निरीक्षण करता है, तो शिक्षकों और छात्रों में अनुशासन बढ़ता है। अधिकारियों ने अपील की कि जनप्रतिनिधि स्कूलों के 'प्रमुख हितधारक' (Stakeholders) के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

'ठहराव' और 'नामांकन' पर विशेष जोर

जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा कि विभाग का प्राथमिक लक्ष्य बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना है। अक्सर देखा जाता है कि बच्चे स्कूल में नाम तो लिखा लेते हैं, लेकिन कुछ समय बाद आना छोड़ देते हैं। इस 'ड्रॉपआउट' समस्या को रोकने के लिए 'ठहराव हेतु प्रयास' कार्यक्रम और 'सिटी बजाओ-बच्चा बुलाओ' जैसे अभियानों को जन-भागीदारी के माध्यम से सफल बनाने का आह्वान किया गया।

तकनीकी सत्र और सामाजिक कुरीतियां

सम्मेलन में एक पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के जरिए मुखियाओं को उनके कानूनी और नैतिक कर्तव्यों के बारे में बताया गया। इसके अलावा, शिक्षा के मार्ग में आने वाली बाधाओं जैसे:

नशा मुक्ति: ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को नशे से बचाना।

बाल विवाह उन्मूलन: कम उम्र में शादी रोकने के लिए जागरूकता।

पर्यावरण संरक्षण: इको क्लब और जल सेना के माध्यम से बच्चों को प्रकृति से जोड़ना।

इन विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई ताकि स्कूल केवल किताबी ज्ञान के केंद्र न रहकर सामाजिक परिवर्तन के केंद्र बनें।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले जनप्रतिनिधि सम्मानित

सम्मेलन का एक मुख्य आकर्षण उन मुखियाओं का सम्मान रहा जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए असाधारण कार्य किए हैं। उन्हें मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया, ताकि अन्य जनप्रतिनिधि भी उनसे प्रेरणा ले सकें।

सफल आयोजन की टीम

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में अजय कुंडू (प्रभाग प्रभारी), सी-3 संस्था के अभिनव कुमार, कुमार पी. गौरव, प्रविंद कुमार सिंह, अजय नारायण दास, ओम प्रकाश कुमार, आनंद कुमार, मीनाक्षी अनुष्का और प्रभु कुमार साव का विशेष योगदान रहा।

न्यूज़ प्रहरी नरेश सोनी प्रधान सम्पादक भारत।

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