हजारीबाग रामनवमी 2026: तकनीक और सतर्कता के साये में सुरक्षा का अभेद्य चक्रव्यूह
HAZARIBAGH: झारखंड के हजारीबाग जिले में विश्व प्रसिद्ध रामनवमी उत्सव को लेकर इस वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा के ऐसे कड़े मापदंड स्थापित किए हैं जो पहले कभी नहीं देखे गए। हजारीबाग पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आस्था के इस महापर्व में खलल डालने वाले किसी भी शरारती तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को इतना चाक-चौबंद बनाया गया है कि शहर का कोना-कोना तीसरी आंख की जद में होगा। इस बार की रणनीति में केवल मानवीय बल ही नहीं बल्कि आधुनिकतम तकनीक का भी समावेश किया गया है जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और सटीक हो गई है। जिले के सभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ बाहरी जिलों से आए पुलिस पदाधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुरक्षित बनी रहे।
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| हजारीबाग कंट्रोल रूम में जीपीएस और ड्रोन के जरिए जुलूस की निगरानी करते पुलिस अधिकारी। |
हजारीबाग की रामनवमी में निकलने वाले भव्य जुलूसों की विशालता को देखते हुए इस बार पुलिस ने जीपीएस यानी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम का सहारा लिया है। जिले के उन सभी थाना क्षेत्रों को एक विशेष यूनिफॉर्म कोड दिया गया है जहाँ से रामनवमी की रैलियां और अखाड़े निकलते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर जुलूस के मुख्य रथों में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाई गई है। इस तकनीक के माध्यम से जिला मुख्यालय में बने कंट्रोल रूम से अधिकारी लाइव देख पाएंगे कि कौन सा जुलूस वर्तमान में किस स्थान पर है और उसे गंतव्य तक पहुँचने में कितना समय लगेगा। इससे भीड़ प्रबंधन में बड़ी मदद मिलेगी और किसी भी अप्रत्याशित स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी।
शहर की भौगोलिक स्थिति और संकरी गलियों को ध्यान में रखते हुए प्रकाश व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। अक्सर देखा जाता है कि रात के समय अंधेरे का लाभ उठाकर असामाजिक तत्व वारदातों को अंजाम देते हैं। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने न केवल मुख्य मार्गों बल्कि उन गलियों में भी भारी संख्या में जनरेटर और हाई-मास्ट लाइट की व्यवस्था की है जहाँ से रैलियां नहीं गुजरती हैं। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों का जाल पूरे शहर में बिछा दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि रोशनी और कैमरों की मौजूदगी ही आधे अपराधों को रोकने के लिए पर्याप्त होती है। सुरक्षा का घेरा इतना मजबूत है कि पांच हजार से अधिक पुलिस के जवान चौबीसों घंटे पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात रहेंगे।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी पुलिस अधीक्षक ने एक संवेदनतशील और त्वरित कार्ययोजना तैयार की है। भीड़भाड़ वाले इलाकों में बड़ी एम्बुलेंस का पहुँचना अक्सर कठिन होता है इसलिए इस बार दस बाइक एम्बुलेंस की विशेष व्यवस्था की गई है। यह बाइक एम्बुलेंस संकरी गलियों में फंसे घायल या बीमार व्यक्ति तक तुरंत पहुँचकर उसे प्राथमिक उपचार प्रदान करेगी। इसके अलावा जिले के लगभग साठ अस्पतालों को चिन्हित किया गया है जहाँ घायल व्यक्तियों को तुरंत फर्स्ट एड की सुविधा मिलेगी। प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि शुरुआती इलाज के बाद मरीज अपनी सुविधा और इच्छा अनुसार कहीं भी उच्च स्तरीय इलाज कराने के लिए स्वतंत्र होगा। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि किसी भी आपात स्थिति में जीवन की रक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होगी।
भीड़ पर नियंत्रण और जुलूस के सुगम संचालन के लिए मचानों की संख्या में इस वर्ष काफी वृद्धि की गई है। ऊँचे स्थानों पर तैनात पुलिस बल जुलूस के आगे और पीछे के रास्तों की स्थिति का जायजा लेंगे और वायरलेस सेट के माध्यम से नीचे तैनात टीम को रास्ता क्लियर करने के निर्देश देंगे। प्रशासन ने सूचना तंत्र को मजबूत करने के लिए दो विशाल डिजिटल डिस्प्ले स्क्रीन भी शहर के प्रमुख केंद्रों पर लगाई हैं। इन स्क्रीनों के माध्यम से आम जनता, मीडिया कर्मियों और अखाड़ों के गणमान्य व्यक्तियों को लाइव रूट मैप और जुलूस की वर्तमान स्थिति की जानकारी मिलती रहेगी। इससे न केवल अफवाहों पर लगाम लगेगी बल्कि लोगों को अपने आवागमन की योजना बनाने में भी आसानी होगी।
रात के समय निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए हजारीबाग पुलिस इस बार नाइट विजन दूरबीन और उन्नत ड्रोन कैमरों का बड़े पैमाने पर उपयोग करने जा रही है। अंधेरे में भी दूर तक देखने की क्षमता रखने वाले इन उपकरणों से पुलिस बल छतों और सुनसान रास्तों पर नजर रखेगा। साथ ही ध्वनि प्रदूषण और ड्यूटी पर तैनात जवानों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए प्रशासन ने पहली बार ध्वनि रोधक यंत्रों का उपयोग करने का निर्णय लिया है। यह यंत्र जवानों को डीजे और लाउडस्पीकर के कान फोड़ू शोर से बचाएंगे जिससे वे अपनी ड्यूटी अधिक एकाग्रता के साथ कर सकेंगे। हजारीबाग पुलिस का यह मास्टर प्लान दर्शाता है कि इस बार प्रशासन किसी भी छोटी से छोटी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता है ताकि श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ रामनवमी का त्यौहार मना सकें।
Naresh Soni Editor in Chief.

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