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Editor: Naresh Prasad Soni
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आईजी और डीआईजी ने पुलिस बल को दी अनुशासन और मुस्तैदी की कड़ी नसीहत

हजारीबाग रामनवमी जुलूस की सुरक्षा को लेकर आईजी और डीआईजी ने पुलिस बल को दिए कड़े निर्देश। अनुशासन और मुस्तैदी के साथ तैनात रहेगा सुरक्षा घेरा।
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हजारीबाग रामनवमी की अभेद्य सुरक्षा

आईजी और डीआईजी ने पुलिस बल को दी अनुशासन और मुस्तैदी की कड़ी नसीहत

झारखंड के हजारीबाग में विश्व प्रसिद्ध रामनवमी जुलूस की भव्यता और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। शनिवार को हजारीबाग पुलिस केंद्र में आयोजित एक महत्वपूर्ण ब्रीफिंग सत्र के दौरान पुलिस के आला अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था का खाका खींचा। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि रामनवमी का यह महापर्व न केवल उत्साह के साथ मनाया जाए, बल्कि सुरक्षा के मानकों पर भी यह पूरी तरह खरा उतरे।

हजारीबाग पुलिस केंद्र में रामनवमी सुरक्षा को लेकर तैनात जवानों और पदाधिकारियों को ब्रीफिंग देते आईजी सुनील भास्कर, डीआईजी नौशाद आलम व अन्य अधिकारी।

बोकारो जोन के आईजी सुनील भास्कर, डीआईजी नौशाद आलम, डीआईजी अंजनी झा और हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक अंजनी अनजान ने संयुक्त रूप से मैदान में तैनात होने वाले पुलिस पदाधिकारियों, मजिस्ट्रेटों और जवानों को संबोधित किया। अधिकारियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि रामनवमी के दौरान पुलिस की भूमिका केवल भीड़ नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी उपस्थिति जनता में विश्वास और उपद्रवियों में भय पैदा करने वाली होनी चाहिए। सुरक्षा बल के हर सदस्य को यह समझाया गया कि उनकी एक छोटी सी लापरवाही पूरे शहर की शांति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है, इसलिए कर्तव्य के प्रति समर्पण ही इस समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

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आईजी सुनील भास्कर ने अपने संबोधन में अनुशासन को सर्वोपरि बताया। उन्होंने सख्त लहजे में निर्देश दिया कि सुरक्षा व्यवस्था में तैनात हर कर्मी को अपनी निर्धारित वर्दी में रहना अनिवार्य है। पुलिस की वर्दी न केवल उनकी पहचान है बल्कि उनके उत्तरदायित्व का प्रतीक भी है। ब्रीफिंग के दौरान यह भी साफ किया गया कि जब तक रामनवमी के सभी जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से होकर शांतिपूर्वक विसर्जित नहीं हो जाते, तब तक कोई भी पुलिसकर्मी या पदाधिकारी अपनी ड्यूटी पॉइंट को नहीं छोड़ सकता। इस बार की सुरक्षा व्यवस्था में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई गई है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस बार पुलिस प्रशासन ने मानवीय व्यवहार और संयम पर विशेष जोर दिया है। अधिकारियों ने जवानों को निर्देशित किया कि जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं और आम जनता के साथ उनका आचरण बेहद मर्यादित और सहयोगी होना चाहिए। अक्सर भीड़ के दौरान तनाव की स्थिति पैदा होती है, ऐसे में पुलिस को उत्तेजित होने के बजाय ठंडे दिमाग से स्थिति को संभालना होगा। प्रशासन ने यह भी हिदायत दी है कि किसी भी सूरत में अभद्र भाषा या अनावश्यक बल प्रयोग न किया जाए। पुलिस का मुख्य लक्ष्य भीड़ को नियंत्रित करना और आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की मदद करना है, न कि भय का माहौल बनाना।

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सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत प्रशासन द्वारा जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। पुलिस बल को यह ट्रेनिंग दी गई है कि भीड़ नियंत्रण और किसी भी आकस्मिक स्थिति में किस प्रकार नियमों के दायरे में रहकर कार्य करना है। आईजी और डीआईजी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि क्षेत्र में कोई भी संदिग्ध गतिविधि या अप्रिय घटना घटती है, तो उसकी सूचना तुरंत वायरलेस या मोबाइल के माध्यम से वरीय अधिकारियों को दी जाए। कोई भी बड़ा निर्णय लेने या बल प्रयोग जैसी कार्रवाई करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है, ताकि स्थिति को रणनीतिक रूप से संभाला जा सके।

हजारीबाग की रामनवमी अपने अखाड़ों और विशाल जनसमूह के लिए जानी जाती है, जिसके कारण यहां की सुरक्षा व्यवस्था किसी चुनौती से कम नहीं होती। पुलिस मुख्यालय ने इस बार तकनीक और मानव बल का बेहतर तालमेल बिठाने की कोशिश की है। संवेदनशील इलाकों में विशेष नजर रखने के साथ-साथ सादे लिबास में भी पुलिस बल की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि वे समाज के रक्षक हैं और इस महापर्व को शांतिपूर्ण संपन्न कराना उनकी नैतिक और पेशेवर जिम्मेदारी है। इस पूरी ब्रीफिंग का सार यही था कि पुलिस की मुस्तैदी और जनता का सहयोग मिलकर हजारीबाग की गौरवशाली परंपरा को सुरक्षित बनाए रखेंगे।

Naresh Soni Editor in Chief.

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