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Editor: Naresh Prasad Soni
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हजारीबाग रामनवमी उत्सव के बीच मातम: झंडा चौक पर युवक की हत्या, मानवता शर्मसार

हजारीबाग रामनवमी जुलूस के दौरान झंडा चौक पर युवक अभिषेक कुमार की हत्या। मां का इकलौता चिराग बुझा। पुलिस से हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग।
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हजारीबाग रामनवमी उत्सव के बीच मातम: झंडा चौक पर युवक की हत्या, मानवता शर्मसार

हजारीबाग: खुशियों के बीच पसरा सन्नाटा

झारखंड के हजारीबाग में विश्वप्रसिद्ध रामनवमी और विजयादशमी का उत्साह उस समय मातम में बदल गया, जब एक होनहार युवक की नृशंस हत्या कर दी गई। शहर के हृदय स्थल झंडा चौक पर घटी इस घटना ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ा बाजार ग्वालटोली मोहल्ले के रहने वाले संजू वर्मा के इकलौते पुत्र अभिषेक कुमार अब इस दुनिया में नहीं रहे। इस हृदय विदारक घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

Nayay ki guhaar lagate mritak ke parivar 

कैसे घटी यह अमानवीय घटना?

जानकारी के अनुसार, विजयादशमी की रात्रि जब पूरा शहर जुलूस और उत्सव के माहौल में डूबा हुआ था, तभी झंडा चौक के पास अज्ञात असामाजिक तत्वों ने भीड़ का फायदा उठाकर अभिषेक कुमार पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और तेज धारदार औजारों का इस्तेमाल किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला इतना अचानक और भीषण था कि अभिषेक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गंभीर रूप से घायल अवस्था में उसे तुरंत स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए रांची रिम्स (RIMS) रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, रांची ले जाने के दौरान रास्ते में ही अभिषेक ने दम तोड़ दिया।

एक मां का छिन गया इकलौता सहारा

अभिषेक अपने माता-पिता का इकलौता चिराग था। जिस मां ने अपने आंचल की छांव में बेटे को पाल-पोसकर बड़ा किया, आज वह असहनीय पीड़ा में बिलख रही है। ग्वालटोली स्थित उनके आवास पर चीख-पुकार मची है। मोहल्ले के लोग स्तब्ध हैं कि आखिर एक साधारण से युवक की किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है कि उसकी जान ले ली गई। यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार के अंत की शुरुआत है।

पोस्टमार्टम के दौरान उमड़ी भारी भीड़

घटना की सूचना मिलते ही शहर के प्रबुद्ध नागरिक और जनप्रतिनिधि सदर अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के दौरान संपादक नरेश प्रसाद सोनी, डिप्टी मेयर  अविनाश कुमार यादव, रंजन चौधरी, दीपू गोप,  मनोज गुप्ता सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में इस अमानवीय कृत्य की निंदा की और जिला प्रशासन से हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है।

प्रशासनिक विफलता या असामाजिक तत्वों का दुस्साहस?

रामनवमी जैसे संवेदनशील मौके पर जब हजारों की संख्या में पुलिस बल तैनात रहता है, तब झंडा चौक जैसे प्रमुख स्थान पर ऐसी घटना होना सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस मुस्तैद होती तो शायद अभिषेक की जान बच सकती थी। अब सबकी निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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