झारखंड में मानवता शर्मसार: विष्णुगढ़ की दरिंदगी ने हिलाया प्रदेश, न्याय की मांग तेज
हजारीबाग: जिले के अंतर्गत आने वाले विष्णुगढ़ प्रखंड के एक सुदूरवर्ती गांव में हाल ही में घटित हुई अत्यंत वीभत्स और हृदयविदारक घटना ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। एक 12 वर्षीय मासूम बालिका के साथ जिस प्रकार की बर्बरता और नृशंसता की गई, उसने सभ्य समाज के माथे पर कलंक लगा दिया है। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि प्रशासनिक विफलता और सामाजिक सुरक्षा पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। संसद सत्र की व्यस्तताओं के तत्काल बाद हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का पीड़ित परिवार के बीच पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि मामले की गंभीरता कितनी गहरी है। पीड़ित परिवार के आंसू और उनकी न्याय की गुहार आज पूरे हजारीबाग की आवाज बन चुकी है।
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| सांसद सेवा केंद्र हजारीबाग में प्रेस वार्ता को संबोधित करते सांसद मनीष जायसवाल और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी। |
विष्णुगढ़ की इस घटना के विवरण इतने भयावह हैं कि उन्हें सुनकर किसी भी व्यक्ति की रूह कांप सकती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगल जुलूस के पावन अवसर पर अपनी मां के साथ शामिल हुई वह मासूम बच्ची अचानक गायब हो गई। अगले दिन जब उसका शव बरामद हुआ, तो वह दृश्य अमानवीयता की सारी हदें पार कर चुका था। अपराधियों ने न केवल मासूम की जान ली, बल्कि उसके शरीर के साथ वह दरिंदगी की जिसकी कल्पना मात्र से सिहरन पैदा होती है। सांसद मनीष जायसवाल ने इस घटना को 'रेयरेस्ट ऑफ द रेयर' की श्रेणी में रखते हुए इसकी तुलना दिल्ली के चर्चित निर्भया कांड से की है। वास्तव में, एक अबोध बालिका के साथ की गई यह क्रूरता उससे भी कहीं अधिक जघन्य प्रतीत होती है क्योंकि इसमें अपराधी की मानसिकता पूरी तरह से राक्षसी नजर आती है।
इस पूरे प्रकरण में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के उपरांत भी सत्ता पक्ष के किसी बड़े प्रतिनिधि का पीड़ित परिवार तक न पहुंचना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। लोकतंत्र में जनता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है, परंतु यहां प्रशासन की चुप्पी और सुस्ती ने जनता के आक्रोश को और अधिक भड़काने का काम किया है। भाजपा ने इसी संवेदनहीनता के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट अल्टीमेटम दिया है कि यदि रविवार तक दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो सोमवार को 'हजारीबाग बंद' के माध्यम से जनता अपनी आवाज बुलंद करेगी। महिला सुरक्षा के मुद्दे पर झारखंड भाजपा महिला मोर्चा का प्रस्तावित उग्र प्रदर्शन भी सरकार की घेराबंदी करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
सांसद सेवा केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यह बात प्रमुखता से उभर कर आई कि पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। पीड़िता के पिता को आजीविका के लिए अक्सर घर से दूर रहना पड़ता है। ऐसे में भाजपा द्वारा दी गई तत्काल सहायता सराहनीय है, किंतु स्थायी समाधान के लिए सरकार को एक सम्मानजनक मुआवजा राशि की घोषणा करनी चाहिए। न्याय की प्रक्रिया में देरी अक्सर अपराधियों के मनोबल को बढ़ाती है, इसलिए मांग की गई है कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को तत्काल फांसी की सजा दी जाए। समाज में कानून का डर तभी कायम होगा जब ऐसे नरपिशाचों को उनके किए की कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।
इसी बीच, हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने एक अन्य महत्वपूर्ण विषय पर भी प्रकाश डाला जो सीधे तौर पर आम जनता की जेब और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। रामनवमी के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोलियम पदार्थों पर कस्टम ड्यूटी में की गई कटौती एक राहत भरी खबर के रूप में सामने आई है। वर्तमान में वैश्विक स्तर पर चल रहे युद्धों और अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। जहां दुनिया के विकसित राष्ट्र भी महंगाई की मार से त्रस्त हैं और वहां ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हो रही है, ऐसे समय में भारत सरकार का यह निर्णय आम आदमी को बड़ी राहत प्रदान करने वाला है।
पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाने का सीधा अर्थ यह है कि आने वाले समय में घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी या उनमें कमी आएगी। यह दूरदर्शितापूर्ण कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईंधन की कीमतों का सीधा असर माल ढुलाई और अंततः खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ता है। सांसद ने इस फैसले को प्रधानमंत्री की जनता के प्रति जवाबदेही और सेवा भावना का परिचायक बताया है। हजारीबाग की जनता के लिए एक तरफ जहां सुरक्षा और न्याय की लड़ाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियां उन्हें महंगाई के मोर्चे पर संबल प्रदान कर रही हैं।
अंततः, विष्णुगढ़ की घटना केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज की नैतिक गिरावट का भी संकेत है। अपराधियों को फांसी की सजा दिलाना और पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित करना अब पूरे जिले का संकल्प बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं का सामूहिक प्रयास इस बात को सुनिश्चित करने के लिए है कि भविष्य में किसी भी मासूम को ऐसी दरिंदगी का शिकार न होना पड़े। सरकार को अपनी नींद त्याग कर अब ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाना होगा, अन्यथा जनता का यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले सकता है।
Naresh Soni Editor in Chief.

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