हजारीबाग की बेटी का कमाल: खेती-बाड़ी छोड़ शुरू किया सिलाई का काम, आज मुद्रा लोन और कड़ी मेहनत से खड़ी की करोड़ों की टर्नओवर वाली गारमेंट यूनिट
विष्णुगढ़ के छोटे से गांव बराय की अंजु कुमारी ने सिलाई मशीन से बुनी अपनी तकदीर, 20 महिलाओं को रोजगार देकर बनीं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
हजारीबाग: जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम बराय की एक साधारण महिला अंजु कुमारी ने साबित कर दिया है कि यदि हौसला बुलंद हो, तो परिस्थितियां कभी भी सफलता के आड़े नहीं आतीं।
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| Anju Kumari Hazaribagh Success Story Garment Manufacturing Unit |
कभी आर्थिक तंगी और खेती-बाड़ी पर निर्भर रहने वाला अंजु का परिवार आज न केवल आर्थिक रूप से सुदृढ़ है, बल्कि वह क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार का जरिया बन चुकी हैं। उनकी यह यात्रा संघर्ष, साहस और सरकारी योजनाओं के सटीक उपयोग की एक जीवंत कहानी है।
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संघर्ष और शून्य से शुरुआत
अंजु कुमारी एक समय आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से ताल्लुक रखती थीं। परिवार की आय का एकमात्र साधन पारंपरिक खेती थी, जिससे घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई का बोझ उठाना नामुमकिन सा हो गया था। पति के पास आय का कोई स्थायी स्रोत न होना उनकी चिंता को और बढ़ा रहा था। लेकिन अंजु ने हार मानने के बजाय कुछ नया करने की ठानी।
स्वयं सहायता समूह: सफलता की पहली सीढ़ी
साल 2022 अंजु के जीवन में बड़ा बदलाव लेकर आया। उन्होंने 'शांति आजीविका सखी मंडल' (SHG) की सदस्यता ली। समूह के माध्यम से उन्हें न केवल वित्तीय प्रबंधन की जानकारी मिली, बल्कि मात्र 1% ब्याज दर पर ऋण प्राप्त करने का अवसर भी मिला। उन्होंने छोटे ऋण से दो सिलाई मशीनें खरीदीं और घर के एक कोने से काम शुरू किया।
मुद्रा लोन से मिला व्यवसाय को विस्तार
अंजु की कार्यकुशलता और बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने अपने व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने विभिन्न वित्तीय संसाधनों का लाभ उठाया:
CIF ऋण: 1,80,000 रुपये
CCL ऋण: 1,50,000 रुपये
मुद्रा लोन: 10,00,000 रुपये
इन पैसों के निवेश से उन्होंने आधुनिक सिलाई मशीनों की एक पूरी यूनिट स्थापित की। आज उनकी यूनिट में 15 से 20 स्थानीय महिलाएं काम कर रही हैं, जो न केवल खुद स्वावलंबी बन रही हैं, बल्कि अपने परिवारों का सहारा भी बन रही हैं।
प्रतिष्ठित स्कूलों तक पहुंची पहचान
वर्तमान में अंजु कुमारी की यूनिट से तैयार यूनिफॉर्म और गारमेंट्स हजारीबाग और गिरिडीह जिले के बड़े स्कूलों में सप्लाई किए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से DAV स्कूल, स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन, ग्लोबल पब्लिक स्कूल, सेंट जेवियर, गुरुकुल, दिल्ली पब्लिक स्कूल (राजधनवार) और ग्रीन वैली पब्लिक स्कूल जैसे संस्थान शामिल हैं।
आर्थिक स्थिति में भारी बदलाव
आज अंजु कुमारी की मासिक आय लगभग 1 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। वह अपने बच्चों को बेहतरीन निजी स्कूलों में शिक्षा दिला रही हैं। उनकी यह सफलता जेएसएलपीएस (JSLPS) और सरकारी ऋण योजनाओं के सही क्रियान्वयन का परिणाम है। अंजु कहती हैं कि उनका अगला लक्ष्य अपनी यूनिट को और बड़ा करना है ताकि वह 50 से अधिक महिलाओं को सीधा रोजगार दे सकें।


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