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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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विभावि: राजनीति विज्ञान विभाग में 'हीट वेव' से बचाव पर कार्यशाला; सत्तू घोल और खीरे के सेवन से दिया सेहत का संदेश

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग में हीट वेव से बचाव पर कार्यशाला आयोजित। विशेषज्ञों ने सत्तू, ओआरएस और सूती कपड़ों के महत्व को बताय
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विभावि: राजनीति विज्ञान विभाग में 'हीट वेव' से बचाव पर कार्यशाला; सत्तू घोल और खीरे के सेवन से दिया सेहत का संदेश

बढ़ते तापमान और 'येलो अलर्ट' के बीच छात्रों को किया गया जागरूक; शोधार्थियों ने बताया— लू से बचने के लिए क्या खाएं और क्या पहनें।

हजारीबाग: झारखंड में बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के प्रकोप को देखते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) के स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग में मंगलवार को एक विशेष संवेदीकरण कार्यशाला (Sensitization Workshop) का आयोजन किया गया। "लू एवं गर्म हवा (Heat Wave) से बचाव" विषय पर केंद्रित इस कार्यशाला में शिक्षकों और शोधार्थियों ने छात्रों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने के गुर सिखाए।

सत्तू का घोल और खीरा का सेवन करते विद्यार्थी
 

स्वयं के साथ समाज को भी करें जागरूक: डॉ. सुकल्याण मोइत्रा विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा ने कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि वर्तमान में मीडिया और सरकारी तंत्र अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन अब हमारा दायित्व है कि हम स्वयं, अपने परिवार और संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति को लू के खतरों के प्रति सचेत करें।

झारखंड सरकार द्वारा जनहित में जारी विज्ञापन की व्याख्या करते वक्ता धर्मेंद्र कुमार

 
स्मार्ट बोर्ड पर 'येलो अलर्ट' का विश्लेषण कार्यशाला में आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए शोधार्थी

क्या अपनाएं सावधानियां? विभागीय प्राध्यापक डॉ. अजय बहादुर सिंह ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक सुझाव देते हुए बताया:

  • पहनावा: धूप में निकलते समय हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। छाता, गमछा और धूप के चश्मे का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।

  • खान-पान: ओआरएस (ORS) घोल, छाछ, लस्सी, नींबू पानी और आम के पन्ने का सेवन करें।

  • परहेज: धूप से तुरंत लौटकर फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बचें।

सत्तू और खीरे का सामूहिक सेवन इस कार्यशाला का मुख्य आकर्षण इसका व्यावहारिक संदेश रहा। सत्र के समापन पर सभी प्राध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से प्याज-नींबू मिश्रित सत्तू का घोल और खीरे का सेवन किया। इस गतिविधि के माध्यम से संदेश दिया गया कि स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थ ही इस मौसम में सबसे बेहतर सुरक्षा कवच हैं।

कार्यशाला का समापन शोधार्थी महेंद्र पंडित के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस दौरान विभाग के छात्र-छात्राएं और शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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