बीकानेर में बीएसएफ जवानों के बीच पहुंचे गृह मंत्री अमित शाह: महिला बैरकों का किया ई-उद्घाटन; बोले— 'जवानों की मुस्तैदी से ही चैन की नींद सोता है देश'
नरेश सोनी प्रधान सम्पादक न्यूज़ प्रहरी।
बीकानेर। भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने और सीमा प्रहरियों का हौसला बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह राजस्थान के बीकानेर पहुंचे। बीकानेर स्थित बीएसएफ 179वीं वाहिनी (179 Battalion BSF) के मुख्यालय में आयोजित 'प्रहरी सम्मेलन' के दौरान गृह मंत्री ने देश की सीमाओं की रक्षा में चौबीसों घंटे मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों के साथ सीधा संवाद किया।
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| Amit Shah Bikaner BSF Jawan Samvad 2026 |
इस अवसर पर गृह मंत्री ने एक बड़ी सौगात देते हुए महिला प्रहरियों की सुविधाओं के लिए नवनिर्मित महिला बैरकों का ई-उद्घाटन (E-Inauguration) भी किया।
शहीद जवानों को किया नमन, विपरीत परिस्थितियों में प्रहरियों के जज्बे को सराहा
समारोह को संबोधित करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सबसे पहले बीएसएफ के इतिहास में देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 2,000 से अधिक शहीद जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। उन्होंने प्रहरियों के साहस की सराहना करते हुए कहा कि बीएसएफ के जवानों ने देश की सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व अत्यंत कुशलता से निभाया है। जवानों के इसी पराक्रम के कारण 140 करोड़ भारतीय आज अपने घरों में चैन की नींद सो पा रहे हैं।
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गृह मंत्री ने कहा कि हमारे सीमा प्रहरी शून्य से नीचे माइनस 45 डिग्री की कंपकंपाती ठंड से लेकर थार रेगिस्तान की 45 डिग्री वाली झुलसाती गर्मी, घने जंगलों और बर्फीली चोटियों जैसी हर विपरीत परिस्थिति में भी 'कर्तव्य से पहले जीवन' के ध्येय के साथ डटे रहते हैं।
महिला बैरकों की सौगात: सुरक्षा में बेटियां निभा रही हैं अग्रणी भूमिका
लैंगिक तटस्थता (Gender Neutrality) और महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा में देश की बेटियां लड़कों से दो कदम आगे बढ़कर अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। महिला प्रहरियों की कार्यप्रणाली और सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है:
- बैरक निर्माण: राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से 79 महिला बैरकों की स्वीकृति दी गई थी, जिनमें से 67 बैरकों का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और शेष 12 बैरकों का कार्य भी प्रगति पर है।
- 2030 तक का लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक देश की सीमाओं पर तैनात सभी महिला प्रहरियों के लिए शत-प्रतिशत मूलभूत सुविधाओं और बैरकों की व्यवस्था को पूरी तरह सुनिश्चित कर लिया जाए।
इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण: सीमांत क्षेत्रों में सड़कों का बिछेगा जाल
सीमा सुरक्षा बल की आवाजाही को त्वरित और सुगम बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बड़ी योजनाओं की घोषणा की गई:
- सड़कों का निर्माण: राजस्थान के रेगिस्तानी बॉर्डर पर कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 1,096 किलोमीटर लंबी लेटरल रोड (Lateral Road) और 520 किलोमीटर लंबी एक्सियल रोड (Axial Road) के निर्माण का कार्य तेजी से शुरू किया गया है।
- बुनियादी सुविधाएं: इसके अतिरिक्त बॉर्डर की लगभग 180 विंग चौकियों तक पीने का शुद्ध पानी पाइपलाइन के माध्यम से पहुंचाने का कार्य भी रिकॉर्ड समय में पूरा कर लिया गया है।
नई तकनीक और ड्रोन स्मगलिंग के खिलाफ 'चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड'
सीमा पार से होने वाली आधुनिक चुनौतियों और ड्रोन के माध्यम से हथियारों व नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स) की स्मगलिंग पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार अगले 6 महीनों के भीतर सभी संवेदनशील सीमाओं पर एंटी-ड्रोन सिस्टम (ड्रोन रोधी संयंत्र) लगाने का कार्य शुरू कर देगी।
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उन्होंने सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक 'चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड' (Four-Layer Security Grid) का मंत्र दिया, जिसमें:
- सीमा सुरक्षा बल (BSF) की मुस्तैदी।
- भारतीय सेना (Indian Army) का तकनीकी सहयोग।
- सीमांत गांवों के जागरूक नागरिकों की सक्रियता।
- स्थानीय राज्य सरकार और जिला प्रशासन (एसपी व कलेक्टर) के साथ जीवंत समन्वय।
इन चारों अंगों के एक साथ मिलकर काम करने से सीमा पार के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा के खतरों को भी पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जा सकेगा।
कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी रहे मौजूद
बीकानेर के इस ऐतिहासिक प्रहरी सम्मेलन के मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कानून मंत्री सह स्थानीय सांसद अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, आईबी निदेशक तपन कुमार डेका और बीएसएफ के महानिदेशक (DG) मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन गृह मंत्री द्वारा जवानों को अनंत शुभकामनाएं देने और 'वंदे मातरम' के नारों के साथ हुआ।



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