हजारीबाग के दारू अंचल में अतिक्रमण पर हंगामा: सीओ ने अतिक्रमणकारी को दी 'रविवार' तक की मौखिक मोहलत, नहीं तो लगेगा 40 हजार का जुर्माना; ग्रामीणों को लिखित प्रमाण न मिलने से असंतोष
पिछले 8 महीने से परेशान इरगाह पंचायत के ग्रामीणों ने मुखिया और युवा कांग्रेस नेता रिंकू कुमार के नेतृत्व में सौंपा ज्ञापन; कार्रवाई न होने पर मुखिया ने दी धरना प्रदर्शन की चेतावनी, सीओ ने मीडिया को बाइट देने से किया इनकार।
हजारीबाग। जिला अंतर्गत दारू प्रखंड सह अंचल कार्यालय में गुरुवार को इरगा पंचायत के ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पिछले 8 महीनों से गांव में अवैध अतिक्रमण और प्रशासनिक सुस्ती से परेशान ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और युवा कांग्रेस नेता रिंकू कुमार के नेतृत्व में दारू अंचल अधिकारी (सीओ) राम बालक कुमार को एक ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की गुहार लगाई है।
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| इरगाह पंचायत के ग्रामीणों ने सरकारी भूमि पर अवैध बाथरूम और पक्के निर्माण के खिलाफ दारू सीओ को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध मलबे के कारण रास्ता बंद हो चुका है।" |
सीओ की फटकार— "रविवार तक हटाओ, नहीं तो लगेगा 40 हजार का जुर्माना"
अंचल कार्यालय पहुंचे भारी संख्या में ग्रामीणों की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए दारू अंचल अधिकारी राम बालक कुमार ने अतिक्रमणकारी को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने मौखिक रूप से आदेश देते हुए कहा कि आगामी रविवार तक हर हाल में अतिक्रमण हटा लिया जाए, अन्यथा ₹40,000 का भारी जुर्माना भुगतना पड़ेगा।
मौखिक आश्वासन से ग्रामीण असमंजस में, सीओ ने मीडिया बाइट से किया इनकार
अंचल अधिकारी द्वारा दिए गए इस आदेश को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में एक बड़ा संशय बना हुआ है। दरअसल, सीओ द्वारा दी गई यह चेतावनी पूरी तरह से मौखिक है। ग्रामीणों को इस बात का कोई लिखित प्रमाण या आश्वासन पत्र नहीं दिया गया है कि रविवार को उनका क्षेत्र वास्तव में अतिक्रमण मुक्त हो जाएगा। इस पूरे मामले पर जब 'News Prahari' की टीम ने दारू सीओ से उनका आधिकारिक पक्ष (बाइट) जानना चाहा, तो उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने कुछ भी बोलने और बाइट देने से साफ इनकार कर दिया।
न्याय की आड़ में दूसरे ग्रामीण का हुआ बड़ा नुकसान, मुख्य आरोपी अब भी काबिज
स्थानीय ग्रामीणों ने अतिक्रमणकारी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मुख्य अतिक्रमणकारी ने चालाकी दिखाते हुए सामने वाले एक अन्य निर्दोष ग्रामीण पर अतिक्रमण का झूठा आरोप मढ़ दिया था। उस वक्त प्रशासनिक दबाव के कारण उस निर्दोष व्यक्ति ने अपने निजी रैयती प्लॉट में बना छज्जा और दीवार खुद ही तोड़ डाली, जिससे उसका भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
इसके विपरीत, मुख्य अतिक्रमणकारी ने सरकारी भूमि के एक बड़े हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा जमा रखा है, जहां उसने बाथरूम, घर और कई अन्य पक्के निर्माण कर लिए हैं। इतना ही नहीं, सड़क पर मलबे और डस्ट (धूल-मिट्टी) बाहर फेंक कर रखे गए हैं, जिससे पूरी पंचायत और ग्रामीणों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इरगा मुखिया की चेतावनी: "अतिक्रमण मुक्त नहीं हुआ तो बैठेंगे धरने पर"
मामले की गंभीरता को देखते हुए इरगाह पंचायत की मुखिया ने बताया कि 8 महीने पहले ग्रामीणों और पंचायत की समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि इस अतिक्रमण को हटा दिया जाएगा, लेकिन अतिक्रमणकारी अपनी जिद पर अड़ा रहा। मुखिया ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा:
"हम जनप्रतिनिधि हैं और हर कार्य सोच-समझकर विधिवत तरीके से करते हैं। लेकिन अगर इस बार रविवार और मंगलवार तक दारू प्रशासन द्वारा इस इलाके को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो हम ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे और आगे की कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।"
🎥 वीडियो बयान: युवा कांग्रेस नेता रिंकू कुमार ने दारू अंचल कार्यालय से क्या कहा?
अंचल कार्यालय में ग्रामीणों की आवाज बुलंद करने पहुंचे युवा कांग्रेस नेता रिंकू कुमार ने अंचल अधिकारी से मुलाकात के बाद 'News Prahari' के कैमरे पर पूरी स्थिति को स्पष्ट किया।
रिंकू कुमार का आधिकारिक वीडियो बयान यहाँ देखें:
वीडियो बयान के मुख्य बिंदु:
- वादे से मुकरा अतिक्रमणकारी: रिंकू कुमार ने बताया कि अतिक्रमणकारी ने पूर्व में स्वेच्छा से लिखित तौर पर अतिक्रमण हटाने की बात स्वीकार की थी, लेकिन बाद में वह अपनी बात से मुकर गया।
- प्रशासन का अल्टीमेटम: सीओ से सकारात्मक वार्ता हुई है, जिन्होंने रविवार तक का समय दिया है। यदि रविवार तक अतिक्रमण नहीं हटता है, तो मंगलवार को सरकारी अमीन और मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति कर बलपूर्वक निर्माण को ध्वस्त किया जाएगा।
- एसडीओ और डीसी तक जाएगी लड़ाई: कांग्रेस नेता ने साफ कहा कि किसी को भी सरकारी जमीन हड़पने का अधिकार नहीं है। यदि अंचल अधिकारी के इस मौखिक आश्वासन का असर नहीं हुआ, तो वे इस मामले को लेकर हजारीबाग एसडीओ (SDO) और डीसी (DC) हेमंत सती के समक्ष जाएंगे और दारू अंचल प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: मौखिक आदेशों का 'भरोसा' और नौकरशाही की जवाबदेही (Editorial)
बिना लिखित आदेश के अतिक्रमण हटाना दारू प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
हजारीबाग के दारू अंचल में उपजा यह विवाद झारखंड की स्थानीय नौकरशाही की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब मामला पिछले 8 महीने से लंबित है और ग्रामीण लगातार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो अंचल अधिकारी द्वारा केवल 'मौखिक' रूप से रविवार तक का समय देना और मीडिया के कैमरों से भागना प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है। ₹40,000 के जुर्माने की बात सुनने में जितनी सख्त लगती है, बिना किसी लिखित आदेश के कानूनी रूप से उसे लागू करना उतना ही पेचीदा है।
इसके अलावा, जांच के अभाव में एक ग्रामीण का रैयती मकान टूट जाना और मुख्य आरोपी का सरकारी जमीन पर काबिज रहना स्थानीय स्तर पर पक्षपात की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि क्या दारू सीओ अपने मौखिक अल्टीमेटम को अमलीजामा पहना पाते हैं, या रविवार के बाद इरगाह पंचायत की जनता को अपनी ही जमीन के लिए प्रखंड मुख्यालय पर धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
विशेष संवाददाता, दारू (हजारीबाग)
- रिपोर्टर: नरेश सोनी (Editor-in-Chief, News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): ग्राउंड जीरो रिपोर्टिंग, दारू अंचल कार्यालय (दिनांक: 04.06.2026)

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