विश्व रक्तदाता दिवस पर हजारीबाग जिला प्रशासन की बड़ी पहल: सदर अस्पताल के नए ओपीडी भवन में आज महा-रक्तदान शिविर
"जिले में 280 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए आगे आएं युवा और सामाजिक संगठन; सुबह 10 बजे से होगा शुभारंभ"— विशेष प्रशासनिक रिपोर्ट
प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य ब्यूरो, हजारीबाग:
- रिपोर्टर: जिला संवाददाता (News Prahari)
- समाचार स्रोत (Source): सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालय (IPRD), हजारीबाग प्रेस विज्ञप्ति संख्या - 367 (दिनांक: 13 जून 2026)
हजारीबाग:
विश्व रक्तदाता दिवस के शुभ अवसर पर हजारीबाग जिला प्रशासन के तत्वावधान में 14 जून 2026, दिन रविवार को सदर अस्पताल परिसर स्थित नवनिर्मित नई ओपीडी (OPD) भवन में एक विशाल स्वैच्छिक रक्तदान शिविर (Voluntary Blood Donation Camp) का आयोजन किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा बुलाई गई इस जीवन रक्षक मुहिम की सभी तैयारियां पूरी तरह से पूर्ण कर ली गई हैं तथा संबंधित स्वास्थ्य विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक जिम्मेदारियां व विधिक दायित्व सौंप दिए गए हैं। इस महा-शिविर का विधिवत शुभारंभ सुबह 10:00 बजे से किया जाएगा। जिला प्रशासन ने हजारीबाग जिले के सभी प्रबुद्ध नागरिकों, युवाओं, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) एवं जनप्रतिनिधियों से इस पुनीत व जनकल्याणकारी अभियान में बढ़-चढ़कर अपनी विधिक और नैतिक सहभागिता निभाने की पुरजोर अपील की है।
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| "हजारीबाग में आज महा-रक्तदान शिविर! 280 से अधिक बच्चों की जिंदगी बचाने की बड़ी प्रशासनिक मुहिम।" |
भीषण गर्मी में रक्त की कमी दूर करने की कवायद, थैलेसीमिया पीड़ितों के लिए संजीवनी बनेगा यह शिविर
जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में हजारीबाग जिले में 280 से अधिक थैलेसीमिया (Thalassemia) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चे पंजीकृत हैं, जो पूरी तरह से नियमित रूप से मिलने वाले सुरक्षित रक्त पर निर्भर हैं। इन बच्चों के अलावा आपातकालीन दुर्घटनाओं, प्रसव (डिलीवरी) के मामलों और अन्य गंभीर ऑपरेशन व बीमारियों से ग्रसित मरीजों को भी समय-समय पर तत्काल रक्त की भारी आवश्यकता होती है। वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी के मौसम में आमतौर पर ब्लड बैंकों में स्वैच्छिक रक्तदाताओं की कमी के कारण रक्त की उपलब्धता में भारी गिरावट दर्ज की जाती है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को अत्यंत कठिन परिस्थितियों व कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसी विकट स्थिति में स्वैच्छिक रक्तदान की यह विधिक और प्रशासनिक पहल थैलेसीमिया पीड़ितों और जरूरतमंद मरीजों के लिए संजीवनी साबित होगी।
एक यूनिट रक्त से बच सकती है किसी की जान, प्रशासन ने युवाओं से की आगे आने की अपील
हजारीबाग जिला प्रशासन ने जिले के सभी स्वस्थ और योग्य नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि वे 14 जून को आयोजित इस रक्तदान शिविर में भारी संख्या में शामिल होकर मानवता की सेवा के इस पुनीत व ऐतिहासिक कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दान किया गया महज एक यूनिट रक्त किसी मरते हुए जरूरतमंद इंसान के लिए जीवनदान साबित हो सकता है। प्रशासन ने कहा है कि रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं होता, इसे केवल इंसानी दान के जरिए ही हासिल किया जा सकता है। इसलिए अधिक से अधिक लोग रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी विधिक व सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करें तथा अपने आसपास के अन्य लोगों को भी इस महादान के लिए प्रेरित करें।
📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (स्वास्थ्य नियमावली एवं नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम / Clinical Establishment Act)
📌 जानिए स्वैच्छिक रक्तदान और ब्लड बैंक प्रबंधन के विधिक व वैज्ञानिक नियम क्या हैं?
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 (Drugs and Cosmetics Act): भारत में रक्त (Blood) को विधिक रूप से एक 'ड्रग' (दवा) की श्रेणी में रखा गया है। इसलिए, किसी भी रक्तदान शिविर का आयोजन केवल मान्यता प्राप्त और विधिक रूप से लाइसेंसी सरकारी या निजी ब्लड बैंक के डॉक्टरों और कुशल चिकित्सा तकनीशियनों की प्रत्यक्ष देखरेख में ही किया जा सकता है।
- रक्तदाता की विधिक पात्रता: राष्ट्रीय रक्त संचरण परिषद (NBTC) के नियमानुसार, केवल वही व्यक्ति रक्तदान कर सकता है जिसकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच हो, वजन कम से कम 45 किलोग्राम हो और उसका हीमोग्लोबिन स्तर न्यूनतम 12.5 ग्राम प्रतिशत विधिक रूप से प्रमाणित हो।
🔍 संपादकीय विश्लेषण: थैलेसीमिया पीड़ितों के दर्द को समझना होगा, केवल एक दिन का दिखावा नहीं बने यह मुहिम (Editorial)
जिला प्रशासन की 14 जून की पहल सराहनीय, लेकिन ब्लड बैंकों में रक्त की साल भर उपलब्धता सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती
विश्व रक्तदाता दिवस पर हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा सदर अस्पताल की नई ओपीडी में शिविर लगाना एक बेहद संवेदनशील और स्वागत योग्य प्रशासनिक कदम है। विशेषकर तब, जब जिले के 280 से अधिक थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे जिंदगी और मौत के बीच झूलते हुए हर महीने रक्त की आस लगाए रहते हैं। भीषण गर्मी में रक्त की भारी किल्लत हो जाती है, ऐसे में यह शिविर समय की मांग है। हालांकि, 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि रक्तदान को केवल 14 जून के एक दिवसीय सरकारी आयोजन या रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को एक ऐसी विधिक और डिजिटल प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जिससे जिले के सभी प्रखंडों के युवाओं का एक ऑनलाइन ब्लड डोनर डेटाबेस तैयार हो। जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान को लेकर फैली भ्रांतियों को जागरूकता अभियानों के जरिए खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक ब्लड बैंकों में रक्त का संकट पूरी तरह दूर नहीं हो सकता।

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