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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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Hazaribagh: हूल दिवस पर प्रकृति संरक्षण की अद्भुत मिसाल; आदिवासी समाज ने सागवान के पत्ते पर लिखकर सांसद मनीष जायसवाल को दिया न्योता!

हूल दिवस पर हजारीबाग में अनोखी पहल। आदिवासी समाज ने सागवान के पत्ते पर आमंत्रण लिखकर सांसद मनीष जायसवाल को दिया पारंपरिक न्योता।
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🍃 हजारीबाग: हूल दिवस पर प्रकृति संरक्षण का अनोखा संदेश; आदिवासी समाज ने सागवान के पत्ते पर लिखकर सांसद मनीष जायसवाल को दिया आमंत्रण

हजारीबाग: हूल दिवस के पावन अवसर पर खोड़ाहार आदिवासी समाज ने परंपरा, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का एक अद्भुत व प्रेरणादायक संगम प्रस्तुत किया है। समाज के पदाधिकारी सुनील टोप्पो ने सांसद प्रतिनिधि रंजीत चन्द्रवंशी की विशेष पहल पर हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल को सागवान के हरे-भरे पत्ते पर लिखकर पारंपरिक शैली में आमंत्रण पत्र भेंट किया। इस अनूठे प्राकृतिक पत्र के माध्यम से सांसद को 30 जून (मंगलवार) को आयोजित होने वाले हूल दिवस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का सादर निमंत्रण दिया गया।

Tribal society secretary Sunil Toppo and MP representative Ranjit Chandravanshi presenting a unique invitation written on a teak leaf to MP Manish Jaiswal for Hool Diwas.

यह पहल केवल एक औपचारिक आमंत्रण नहीं है, बल्कि आधुनिक दौर में प्रकृति के प्रति गहरे जुड़ाव और पर्यावरण संरक्षण का एक बेहद मजबूत और दूरगामी संदेश भी है। सागवान के पत्ते का उपयोग कर यह दिखाया गया कि कैसे बिना डिजिटल या कागज के उपयोग के भी पारंपरिक तरीकों से महत्वपूर्ण संदेश प्रसारित किए जा सकते हैं, जिससे कागज की बर्बादी और पेड़ों की कटाई को रोका जा सके।

📜 सांस्कृतिक धरोहर और आधुनिक पर्यावरण चेतना का संगम

सांसद सेवा कार्यालय में आदिवासी समाज के सचिव सुनील टोप्पो व सांसद प्रतिनिधि रंजीत चन्द्रवंशी ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर संयुक्त रूप से सागवान के पत्ते पर उकेरा गया यह आमंत्रण पत्र सांसद मनीष जायसवाल को सौंपा और हूल दिवस कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा की।

इस बेहद अनूठी और रचनात्मक पहल की खुले मन से सराहना करते हुए सांसद मनीष जायसवाल ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति का वास्तविक संरक्षक रहा है। आदिवासियों की जीवनशैली और जल, जंगल, जमीन के प्रति उनका प्रेम हमेशा से पर्यावरण के प्रति गहरी समझ और संवेदनशीलता को दर्शाता है, जो आज के आधुनिक समाज के लिए एक महान प्रेरणा है।

🌳 प्राकृतिक विकल्पों से कम की जा सकती है पेड़ों की कटाई: मनीष जायसवाल

सांसद मनीष जायसवाल ने इस पहल के गहरे संदेश को रेखांकित करते हुए कहा:

"वर्तमान समय में जब ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर संकट बनता जा रहा है, ऐसे दौर में प्राकृतिक और डिक्रेडेबल संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। सागवान के पत्ते पर आमंत्रण देना देखने में एक छोटा प्रयास जरूर लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की सोच बहुत बड़ी और दूरगामी है। यदि हम अपनी पारंपरिक और प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली को दोबारा अपनाएं, तो पृथ्वी पर बढ़ते प्रदूषण और दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सागवान के पत्ते पर आमंत्रण लिखने की यह परंपरा न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखती है, बल्कि कागज की खपत को घटाकर अनगिनत पेड़ों की रक्षा में भी अमूल्य योगदान देती है।"

📢 आम जनता से कागज का अनावश्यक उपयोग रोकने की अपील

इस अवसर पर सांसद ने आम नागरिकों, युवाओं और विभिन्न संस्थाओं से भी भावुक अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में कागज के अनावश्यक उपयोग से पूरी तरह बचें और जहां भी व्यावहारिक रूप से संभव हो, वहां प्राकृतिक और पुनर्चक्रण योग्य (Recyclable) विकल्पों को प्राथमिकता दें। ऐसा करने से न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित प्रकृति भी सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि पूरा समाज सामूहिक रूप से ऐसे छोटे-छोटे लेकिन दृढ़ कदम उठाए, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव संभव है।

हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने इस अनूठे और पारंपरिक आमंत्रण को सहर्ष व आदरपूर्वक स्वीकार करते हुए हूल दिवस के इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराने की पूर्ण सहमति दी है।

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