सरना स्थल हमारी आस्था, पहचान और पूर्वजों की धरोहर, अस्तित्व की रक्षा के लिए आदिवासी समाज पूरी तरह एकजुट: विक्की धान
संवाददाता, हजारीबाग:
हजारीबाग जिले के शहरी क्षेत्र अंतर्गत लाखे सरना समिति की महिलाओं की समस्याओं और जनजातीय समाज के विभिन्न महत्वपूर्ण नीतिगत मुद्दों को लेकर आदिवासी नेता विक्की धान के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय शिष्टमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान शिष्टमंडल ने हजारीबाग के उपायुक्त, कल्याण विभाग के वरीय अधिकारियों तथा जिला पुलिस प्रशासन के समक्ष अपनी मांगों को दृढ़ता से रखा और एक ज्ञापन सौंपा।
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मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सरना स्थल से अतिक्रमण हटाने पर जोर
मुलाकात के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए विक्की धान ने बताया कि वार्ता के दौरान मुख्य रूप से मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरना स्थल की भूमि का मुद्दा उठाया गया। प्रशासन से मांग की गई है कि उक्त धार्मिक और सांस्कृतिक भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को हटाने की दिशा में पुलिस बल अविलंब और ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करे। भूमि के अतिक्रमण मुक्त होने से कल्याण विभाग द्वारा प्रस्तावित 'घुमकुड़िया भवन' का निर्माण कार्य बिना किसी प्रशासनिक या सामाजिक बाधा के शीघ्रता से प्रारंभ किया जा सकेगा।
सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का केंद्र बनेगा घुमकुड़िया भवन
विक्की धान और सरना समिति के प्रतिनिधियों ने सरना स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि:
- आस्था और विरासत: सरना स्थल केवल जमीन का कोई सामान्य टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण आदिवासी समाज की अटूट आस्था, विशिष्ट पहचान, जीवंत संस्कृति और पूर्वजों की अनमोल विरासत है। इसकी रक्षा और पवित्रता बनाए रखना समाज और प्रशासन दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
- भाषाई और सांस्कृतिक संरक्षण: प्रस्तावित घुमकुड़िया भवन आगामी पीढ़ी के लिए एक सुदृढ़ मार्गदर्शक केंद्र साबित होगा। यह केंद्र नई पीढ़ी को अपनी मूल भाषा, संस्कृति, विशिष्ट परंपराओं और सामाजिक नैतिक मूल्यों से जोड़ने का एक मजबूत आधार बनेगा।
संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प
समिति और विक्की धान ने जिला प्रशासन से इस संवेदनशील विषय पर सकारात्मक और त्वरित विधिक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि आदिवासी समाज अपने जल, जंगल, जमीन और सरना की पहचान व अस्तित्व की रक्षा के लिए हमेशा से एकजुट रहा है और आगे भी संगठित रहेगा। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना ही समाज का मुख्य संकल्प है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय आदिवासी छात्र संघ हजारीबाग के सदस्य, लाखे सरना समिति की महिला पदाधिकारी और स्थानीय जनजातीय समाज के प्रबुद्ध नागरिक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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