JPSC व JSSC धांधली पर बोले पूर्व CM चंपाई सोरेन: "दागी एजेंसियों को टेंडर देने की जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती सरकार; युवाओं के भविष्य के साथ हुआ विश्वासघात"
राँची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए JPSC और JSSC की परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों को लेकर तीखा हमला बोला है। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए चंपाई सोरेन ने सरकार की कार्यप्रणाली, दागी कंपनियों को टेंडर देने और युवाओं के साथ हो रहे कथित विश्वासघात पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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| Former Jharkhand CM Champai Soren addressing JPSC JSSC controversy |
"ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों को कॉन्ट्रैक्ट क्यों?"
पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए बयानों और धरातल की सच्चाई में जमीन-आसमान का अंतर है।
- उत्तर प्रदेश की एजेंसी का मामला: उन्होंने कहा कि सरकार सदन में एजेंसी के उत्तर प्रदेश की होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रही है। यदि एजेंसी पहले से ही यूपी में ब्लैकलिस्टेड थी, तो जून 2025 में JPSC ने उसे कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया?
- JSSC और JPSC का विरोधाभास: उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब झारखंड सरकार की ही एजेंसी JSSC ने मई 2025 में TDPL को ब्लैकलिस्ट किया था, तो अगले ही महीने जून 2025 में JPSC द्वारा उसी कंपनी को निविदा (टेंडर) कैसे दे दी गई?
कार्मिक विभाग और शीर्ष नेतृत्व पर साधा निशाना
चंपाई सोरेन ने स्पष्ट किया कि JPSC और JSSC दोनों ही संस्थान कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के अधीन आते हैं, जिसका प्रभार सीधे मुख्यमंत्री के पास होता है।
- विभागीय जवाबदेही: ब्लैकलिस्ट होने और नया कॉन्ट्रैक्ट मिलने, दोनों प्रक्रिया से जुड़ी फाइलें विभागीय स्तर से होकर गुजरती हैं।
- पारदर्शिता का अभाव: उन्होंने आरोप लगाया कि TCS और Sifi जैसी स्थापित और प्रतिष्ठित कंपनियों को दरकिनार कर दागी कंपनियों को प्राथमिकता दी गई, जो पूरी प्रक्रिया की नीयत पर सवाल उठाता है।
झारखंड आंदोलन के मूल उद्देश्यों पर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य गठन के मूल सिद्धांतों की याद दिलाते हुए कहा:
- आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकार: झारखंड राज्य का निर्माण यहाँ के भूमिपुत्रों, आदिवासियों और मूलवासियों को उनके हक और रोजगार में प्राथमिकता देने के लिए हुआ था।
- अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन: उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के बाहर के अभ्यर्थियों के बड़े पैमाने पर चयन की खबरें यहाँ के युवाओं के संघर्षों का अपमान हैं।
- JSSC CGL और CID जाँच: JSSC CGL मामले में अभ्यर्थियों को नेपाल ले जाकर प्रश्न रटवाने की CID जाँच रिपोर्ट और बाद में जांच टीम बदले जाने के घटनाक्रम पर भी उन्होंने सरकार की मंशा पर संदेह व्यक्त किया।
छात्र आंदोलन और सरकार की कार्रवाई पर तंज
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि अधिकार मांगने के लिए राँची आ रहे युवाओं और छात्रों को जगह-जगह (हजारीबाग, जमशेदपुर आदि) गाड़ियों को रोककर बाधित किया गया। उन्होंने कहा कि युवाओं पर झूठे आरोप मढ़ने और बाहरी साजिश बताने की जगह सरकार को अपने फैसलों का निष्पक्ष आकलन करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्य के युवा अब अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।
Source of Information: पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन का आधिकारिक सोशल मीडिया/फेसबुक पेज।

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