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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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पेट्रोल-डीजल की खुदरा खरीद पर केंद्र सरकार का नया कानून लागू: आम जनता के ईंधन पर उद्योगों के 'डाके' को रोकने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी

 

पेट्रोल-डीजल की खुदरा खरीद पर केंद्र सरकार का नया कानून लागू: आम जनता के ईंधन पर उद्योगों के 'डाके' को रोकने के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी

"आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत थोक खरीदारों पर पूर्ण प्रतिबंध; ड्रम या कंटेनर में प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर तेल देने की सीमा तय, उल्लंघन पर सीधे जेल"— विशेष रिपोर्ट

प्रशासनिक एवं राष्ट्रीय ब्यूरो, नई दिल्ली / हजारीबाग

  • रिपोर्टर: राष्ट्रीय मामलों के ब्यूरो प्रमुख (News Prahari)
  • समाचार स्रोत (Source): भारत का राजपत्र (The Gazette of India), पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, अधिसूचना संख्या G.S.R. 474(E) (दिनांक: 11 जून 2026)

नई दिल्ली / हजारीबाग:

देश के आम उपभोक्ताओं, वाहन चालकों और किसानों को पेट्रोल-डीजल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा इसकी जमाखोरी व कालाबाजारी को पूरी तरह रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक विधिक कदम उठाया है। भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारत के राजपत्र (The Gazette of India) में एक असाधारण अधिसूचना जारी की है। मंत्रालय के निदेशक अरुण कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस नए और कड़े कानून को 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (Temporary Regulation of Supply through Retail Outlets) ऑर्डर, 2026' नाम दिया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से पूरे देश में लागू कर दिया गया है।

  • ⛽📜 केंद्र का बड़ा फैसला: पेट्रोल-डीजल की खुदरा खरीद पर देश में नया कानून लागू; उद्योगों की मुनाफाखोरी रोकने को जारी हुआ गजट नोटिफिकेशन!
वैश्विक संकट और कीमतों के अंतर के कारण उठाना पड़ा यह कड़ा कदम

​सरकारी अधिसूचना के प्रस्तावना खंड में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Crisis) के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति श्रृंखला और शिपिंग लॉजिस्टिक्स पर विपरीत असर पड़ा है। इस संवेदनशील स्थिति में घरेलू स्तर पर तेल का विवेकपूर्ण प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया था।

​सबसे बड़ी वजह यह सामने आई कि थोक (Bulk) और खुदरा (Retail) कीमतों में बड़ा अंतर होने के कारण औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत खरीदारों (जैसे बड़ी फैक्ट्रियां, निजी मॉल, कंस्ट्रक्शन कंपनियां) ने अपनी खुद की 'कंज्यूमर पंप' व्यवस्था से महंगे दाम पर तेल न खरीदकर, आम जनता के लिए बने सामान्य पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में डीजल-पेट्रोल उठाना शुरू कर दिया था। इससे देश के कई हिस्सों में कृत्रिम किल्लत और आम जनता के लिए ईंधन संकट पैदा होने का गंभीर खतरा मंडरा रहा था।

नए कानून की 5 सबसे बड़ी और ठोस बातें:

  • 1. थोक खरीदारों पर पूर्ण विधिक प्रतिबंध: सभी संस्थागत, प्रत्यक्ष, औद्योगिक और वाणिज्यिक ग्राहकों को अब सामान्य पेट्रोल पंपों (Retail Outlets) से पेट्रोल या डीजल (MS/HSD) खरीदने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। उन्हें अपनी ईंधन जरूरत सिर्फ अपने अधिकृत कंज्यूमर पंपों से ही महंगी दरों पर पूरी करनी होगी।
  • 2. खुदरा बिक्री पर सख्त सीमा: आम पेट्रोल पंप डीलर अब किसी भी ग्राहक या वाहन को केवल उनके वाहनों के ईंधन टैंक में ही सीधे डीजल-पेट्रोल भर सकेंगे। इसके अलावा, यदि किसी को कंटेनर में डीजल चाहिए, तो वह केवल PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) द्वारा स्वीकृत सुरक्षित कंटेनर में ही दिया जा सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रतिदिन प्रति ग्राहक 200 लीटर से अधिक नहीं होगी।
  • 3. रीसेल (फिर से बेचने) पर पूर्ण रोक: पेट्रोल पंपों से खुदरा दर पर खरीदे गए इस ईंधन को आगे किसी भी व्यावसायिक लाभ के लिए दोबारा बेचा (Resold) नहीं जा सकेगा।
  • 4. 90 दिनों की वैधता अवधि: यह सख्त आदेश शुरुआती तौर पर 90 दिनों की अवधि के लिए जारी किया गया है। यदि सरकार आवश्यक समझेगी, तो इसकी समीक्षा कर इसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
  • 5. छापेमारी और जब्ती के असीमित अधिकार (Power of Search and Seizure): इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के राजपत्रित अधिकारियों (Gazetted Officers), पुलिस उपाधीक्षक (DSP) या उससे ऊपर के रैंक के पुलिस अधिकारियों, और तेल कंपनियों के सेल्स ऑफिसर (जो कम से कम रेंट ऑफिसर रैंक के हों) को सघन चेकिंग, औचक छापेमारी और नियम उल्लंघन पर ईंधन व वाहनों को ऑन-द-स्पॉट जब्त करने के सीधे विधिक अधिकार दिए गए हैं।

नियम तोड़ा तो आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मिलेगी सख्त सजा

​अधिसूचना के क्लॉज 7 के अनुसार, यदि कोई भी पेट्रोल पंप डीलर या वाणिज्यिक उपभोक्ता इन नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) की धारा 3 और अन्य संबंधित कड़े विधिक प्रावधानों के तहत तत्काल मुकदमा दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ तत्काल विशेष टास्क फोर्स बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

📋 न्यूज़ प्रहरी एडमिनिस्ट्रेटिव व विधिक गाइड (विद्युत एवं ईंधन अधिकार / Essential Commodities Legal Framework)

​📌 जानिए क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और इसके तहत सजा के नियम?

  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Section 3): यह कानून केंद्र सरकार को किसी भी आवश्यक वस्तु (जैसे पेट्रोल, डीजल, खाद्य तेल, दवाएं) के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और व्यापार को नियंत्रित करने का असीमित विधिक अधिकार देता है। यदि कोई भी इकाई या डीलर सरकार द्वारा तय की गई खुदरा बिक्री सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसे इस अधिनियम के तहत अवैध माना जाता है।
  • सजा और जुर्माने के प्रावधान: इस कानून की धारा 7 के तहत दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 3 महीने से लेकर अधिकतम 7 वर्ष तक के कठोर कारावास (जेल) का विधिक प्रावधान है। इसके साथ ही संबंधित पेट्रोल पंप का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) करने और पूरे स्टॉक को राजसात (जब्त) करने का विधिक नियम है।

🔍 संपादकीय विश्लेषण: उद्योगों की मुनाफाखोरी पर लगाम से बचेगी आम जनता और किसानों की गाढ़ी कमाई (Editorial)

सस्ते खुदरा तेल पर डाका डाल रहे उद्योगों पर सरकार का यह प्रहार स्वागत योग्य है

पेट्रोल और डीजल देश की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन हैं। थोक और खुदरा कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों और मॉल संचालकों द्वारा आम जनता के पेट्रोल पंपों से हजारों लीटर डीजल ड्रमों में भरकर ले जाना एक गंभीर आर्थिक अपराध था। इससे न केवल सरकारी तेल कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान हो रहा था, बल्कि सुदूर जिलों (जैसे हजारीबाग, बोकारो और चतरा) के ग्रामीण इलाकों में खेती के सीजन में किसानों को ट्रैक्टरों के लिए डीजल नहीं मिल पा रहा था। मंत्रालय का यह नया गजट नोटिफिकेशन सीधे तौर पर इस सिंडिकेट की कमर तोड़ेगा। 'न्यूज़ प्रहरी' का मानना है कि अब असली जिम्मेदारी स्थानीय जिला प्रशासनों और पुलिस उपाधीक्षक (DSP) स्तर के अधिकारियों की है, जिन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले पेट्रोल पंपों पर चोरी-छिपे उद्योगों को तेल की सप्लाय न हो।

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