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Editor EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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हजारीबाग: डीसी शशि प्रकाश सिंह की पहल लाई रंग, समाहरणालय में रक्तदान शिविर लगाकर जुटाया गया 36 यूनिट ब्लड

हजारीबाग: डीसी शशि प्रकाश सिंह की पहल लाई रंग, समाहरणालय में रक्तदान शिविर लगाकर जुटाया गया 36 यूनिट ब्लड

हजारीबाग: जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और आपात स्थिति में मरीजों को जीवनदान देने के उद्देश्य से हजारीबाग जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय कदम उठाया है। उपायुक्त (DC) श्री शशि प्रकाश सिंह के विशेष निर्देश पर शनिवार को समाहरणालय परिसर में स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक बार फिर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस मानवीय पहल में जिला प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उत्साहपूर्वक स्वैच्छिक रक्तदान किया।

"हजारीबाग समाहरणालय परिसर में आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में रक्त दान करते अधिकारी व कर्मी।"

अब तक कुल 36 यूनिट रक्त हुआ संग्रहित

जानकारी के अनुसार, शनिवार को आयोजित इस शिविर में कुल 8 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। इससे पहले भी समाहरणालय परिसर में इसी तरह का शिविर लगाया गया था, जिसमें 28 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ था। इस तरह दोनों शिविरों के आंकड़ों को मिला दें, तो अब तक कुल 36 यूनिट रक्त का सफलतापूर्वक संग्रहण किया जा चुका है। यह ब्लड बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा और जिले के गंभीर रूप से बीमार व आपातकालीन स्थिति में इलाज करा रहे मरीजों के लिए संजीवनी का काम करेगा।

'रक्तदान केवल सेवा नहीं, जीवन रक्षा का संकल्प है' - उपायुक्त

इस मौके पर हजारीबाग के उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने सभी रक्तदाताओं की सराहना करते हुए उनके प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, "रक्तदान कोई सामान्य सेवा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर किसी की जीवन रक्षा करने का एक पुनीत संकल्प है।" उपायुक्त ने जिले के सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें और इस महादान रूपी मानवीय अभियान से निरंतर जुड़े रहें।

भविष्य में भी जारी रहेगा यह अभियान: उपविकास आयुक्त

यह पूरा रक्तदान शिविर उपविकास आयुक्त (DDC)  रिया सिंह की देखरेख में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शिविर के सफल आयोजन पर खुशी जताते हुए उपविकास आयुक्त ने कहा कि भविष्य में भी समाहरणालय परिसर के साथ-साथ जिले के अन्य सरकारी संस्थानों में नियमित अंतराल पर ऐसे रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य हजारीबाग जिले में रक्त की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी जरूरतमंद को ऐन मौके पर खून की कमी के कारण जान न गंवानी पड़े।

शिविर को सफल बनाने में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अहम भूमिका निभाई। टीम द्वारा पूरी व्यवस्था को सुव्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया। जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़ी यह मुहिम आगे भी सतत रूप से जारी रहेगी।

हजारीबाग उपायुक्त की अनूठी पहल: समाहरणालय में लगा रक्तदान शिविर, DC सहित कई अधिकारियों ने किया रक्तदान

हजारीबाग उपायुक्त की अनूठी पहल: समाहरणालय में लगा रक्तदान शिविर, DC सहित कई अधिकारियों ने किया रक्तदान

रक्तदान महादान: हजारीबाग समाहरणालय में 28 यूनिट रक्त संग्रहित, उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने पेश की मिसाल
"हजारीबाग समाहरणालय में रक्तदान करते उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह एवं अन्य अधिकारी।"


हजारीबाग: समाज में मानवता की सेवा और जरूरतमंदों की मदद के उद्देश्य से हजारीबाग जिला प्रशासन ने एक सराहनीय कदम उठाया है। उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह के दिशा-निर्देश पर गुरुवार को समाहरणालय परिसर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक विशेष रक्तदान शिविर का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर की खास बात यह रही कि स्वयं उपायुक्त ने आगे बढ़कर रक्तदान किया और समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।

पदाधिकारियों और कर्मियों में दिखा भारी उत्साह

समाहरणालय परिसर में आयोजित इस शिविर में प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागों के कर्मियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उपायुक्त के साथ-साथ जिले के कई बड़े पदाधिकारियों ने भी रक्तदान कर इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दिया। स्वास्थ्य विभाग की टीम की देखरेख में चले इस अभियान के दौरान कुल 28 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया, जिसका उपयोग आपात स्थिति में जरूरतमंद मरीजों के लिए किया जाएगा।

रक्तदान जीवन बचाने का संकल्प: उपायुक्त

इस अवसर पर उपायुक्त शशि प्रकाश सिंह ने सभी रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान केवल एक दान नहीं, बल्कि जीवन बचाने का एक संकल्प है। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ व्यक्ति द्वारा दिया गया एक यूनिट रक्त किसी जरूरतमंद को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें ताकि जिले में रक्त की कमी के कारण किसी की जान न जाए।

जागरूकता बढ़ाने की कोशिश

जिला प्रशासन का उद्देश्य इस तरह के आयोजनों के माध्यम से समाज में रक्तदान के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को इस मानवीय अभियान का हिस्सा बनाना है। शिविर के सफल संचालन में स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम और संबंधित अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


अस्पताल में मरीजों से बदसलूकी अब नहीं चलेगी; DDC रिया सिंह ने सिविल सर्जन और डॉक्टरों के साथ की मैराथन बैठक

अस्पताल में मरीजों से बदसलूकी अब नहीं चलेगी; DDC रिया सिंह ने सिविल सर्जन और डॉक्टरों के साथ की मैराथन बैठक

हजारीबाग:

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में उप विकास आयुक्त (DDC) श्रीमती रिया सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और विशेष रूप से DMFT (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) के तहत कार्यरत डॉक्टरों व कर्मियों के साथ एक समीक्षा बैठक की।

"स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ बैठक करतीं हजारीबाग DDC रिया सिंह (फाइल फोटो)"

​बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य (Biometric Mandatory)

बैठक का सबसे अहम मुद्दा 'उपस्थिति' रहा। DDC रिया सिंह ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक सिस्टम से ही मान्य होगी।

प्रशासन को शिकायतें मिल रही थीं कि कई बार डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहते हैं। DDC ने अधिकारियों को बायोमेट्रिक मशीनों में आ रही तकनीकी खराबी को तुरंत ठीक करने का आदेश दिया, ताकि अनुशासन और पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे।

​लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मरीजों से हो अच्छा व्यवहार

अक्सर सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ रूखे व्यवहार की शिकायतें आती हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए DDC ने स्पष्ट निर्देश दिया:

​"स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा हर कर्मी मरीजों के साथ शालीनता और संवेदनशीलता से पेश आए। सेवा भाव ही आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।"


​वेतन, छुट्टी और एम्बुलेंस पर चर्चा

बैठक में प्रशासन ने सिर्फ सख्ती ही नहीं दिखाई, बल्कि कर्मियों की समस्याएं भी सुनीं। DMFT के तहत कार्यरत कर्मियों के वेतन वृद्धि (Increment), HRA (House Rent Allowance) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) जैसे मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।

इसके अलावा, अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता और एम्बुलेंस सेवाओं को सुचारू करने के लिए भी रणनीति बनाई गई, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भटकना न पड़े।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में सिविल सर्जन, जिला योजना पदाधिकारी, डीपीएम (DPM) और जिले के कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।

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