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आग से बचाव के लिए सिविल सर्जन कार्यालय में 'फायर मॉक ड्रिल'; विशेषज्ञों ने सिखाए आपात स्थिति से निपटने के गुर

आग से बचाव के लिए सिविल सर्जन कार्यालय में 'फायर मॉक ड्रिल'; विशेषज्ञों ने सिखाए आपात स्थिति से निपटने के गुर

सजगता ही सुरक्षा: अग्निशामक यंत्रों के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्वास्थ्यकर्मियों को दी गई आगजनी रोकने की विस्तृत जानकारी।

हजारीबाग (न्यूज़ प्रहरी डेस्क)।

अस्पतालों और सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा मानकों को पुख्ता करने के उद्देश्य से सोमवार को हजारीबाग सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में जिला स्तरीय अग्नि सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तहत न केवल विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान दिया गया, बल्कि 'फायर मॉक ड्रिल' के जरिए आगजनी जैसी आपात स्थितियों से निपटने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।

Jagrukta.

आपात स्थिति में 'त्वरित कार्रवाई' का प्रशिक्षण

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में कार्यरत अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को आगजनी की घटनाओं के प्रति सजग करना था। विशेषज्ञों ने बताया कि अक्सर आग लगने पर घबराहट के कारण नुकसान अधिक होता है। यदि कर्मी प्रशिक्षित हों, तो वे शुरुआती दौर में ही आग पर काबू पाकर बड़ी दुर्घटना को टाल सकते हैं।

अग्निशामक यंत्रों का सही उपयोग

मॉक ड्रिल के दौरान विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों को अग्निशामक यंत्रों (Fire Extinguishers) को चलाने का लाइव डेमो दिया। इसमें बताया गया कि:

आग के प्रकार (A, B, C श्रेणी) के अनुसार किस यंत्र का चुनाव करना चाहिए।

यंत्र को सुरक्षित तरीके से कैसे ऑपरेट करें।

आग लगने की स्थिति में निकासी (Evacuation) के सही रास्ते और प्राथमिक सावधानियां क्या हैं।

सावधानी से टलेंगी बड़ी दुर्घटनाएं

इस अवसर पर विशेषज्ञों ने कहा कि शॉर्ट सर्किट या लापरवाही से लगने वाली छोटी सी आग विकराल रूप ले सकती है। उन्होंने सभी कर्मियों से अपील की कि वे अपने कार्यस्थल और घरों में भी अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety Standards) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। "सूझबूझ और सही तकनीक का मेल ही जान-माल की रक्षा कर सकता है।"

स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भागीदारी

जागरूकता कार्यक्रम में सिविल सर्जन सहित स्वास्थ्य विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने इस ट्रेनिंग को अत्यंत उपयोगी बताया। स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में ऐसे प्रशिक्षण अन्य स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भी आयोजित किए जाएंगे ताकि मरीजों और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

संपादकीय संदेश:

गर्मियों के मौसम में आगजनी की घटनाएं बढ़ जाती हैं, ऐसे में हजारीबाग प्रशासन की यह पहल सराहनीय है। प्रत्येक नागरिक को अपने स्तर पर अग्निशमन यंत्रों के उपयोग की बुनियादी जानकारी रखनी चाहिए।

प्रस्तुति: जिला जनसंपर्क कार्यालय, हजारीबाग।

रिपोर्ट: न्यूज़ प्रहरी डेस्क।

Hazaribagh News : विश्व मलेरिया दिवस पर 'प्रभात फेरी' के जरिए जागरूकता की अलख, सिविल सर्जन ने दी सावधानी बरतने की सलाह

Hazaribagh News : विश्व मलेरिया दिवस पर 'प्रभात फेरी' के जरिए जागरूकता की अलख, सिविल सर्जन ने दी सावधानी बरतने की सलाह

मच्छर जनित रोगों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; शहरी सहिया और ANM छात्राओं ने शहर में निकाली जागरूकता रैली।

हजारीबाग : विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर आज हजारीबाग जिले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला स्वास्थ्य समिति और जिला भी.बी.डी. (VBD) कार्यालय के सौजन्य से एक भव्य 'प्रभात फेरी' का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को मलेरिया जैसी घातक बीमारी के प्रति सचेत करना और उससे बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करना था।

Vishwa Maleria Sivas.

सिविल सर्जन ने दिखाई हरी झंडी

इस कार्यक्रम की शुरुआत कार्यालय परिसर से हुई, जहाँ हजारीबाग के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने हरी झंडी दिखाकर प्रभात फेरी को रवाना किया। यह रैली शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए झंडा चौक तक पहुंची और पुनः कार्यालय पहुंचकर संपन्न हुई। रैली में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों की सहिया और ए.एन.एम.टी. (ANM) स्कूल की छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 'मलेरिया मुक्त भारत' के नारों के साथ पूरा शहर गूंज उठा।

Nikala jakrukta railir.

बचाव ही सबसे बड़ा इलाज: डॉ. अशोक कुमार

रैली के समापन पर सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हर साल 25 अप्रैल को पूरी दुनिया में 'विश्व मलेरिया दिवस' मनाया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा, "मलेरिया से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि जागरूक रहने की जरूरत है। मच्छरदानी का नियमित उपयोग और घर के आसपास साफ-सफाई रखकर हम इस बीमारी को जड़ से खत्म कर सकते हैं।" उन्होंने अपील की कि यदि किसी को भी बुखार के लक्षण महसूस हों, तो वे तुरंत मलेरिया की जांच कराएं।

मलेरिया के लक्षण और सरकारी सुविधाएं

जिला भी.बी.डी. पदाधिकारी डॉ. कपिलमुनि प्रसाद ने मलेरिया के तकनीकी पहलुओं और लक्षणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मलेरिया मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:

  • ​कंपकंपी के साथ तेज बुखार आना।
  • ​सिर दर्द और बदन दर्द।
  • ​अत्यधिक पसीना आना।
  • ​जी मिचलाना और उल्टी होना।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि हजारीबाग जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में मलेरिया की जांच और इलाज पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध है।

स्कूलों और गांवों में भी जागरूकता अभियान

स्वास्थ्य विभाग केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है। डॉ. प्रसाद ने बताया कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें स्कूली बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी (Quiz), और निबंध प्रतियोगिताएं शामिल हैं ताकि नई पीढ़ी जागरूक हो सके। साथ ही ग्रामीण स्तर पर 'ग्राम सभा' का आयोजन कर लोगों को जल-जमाव रोकने और स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जा रहा है।

​इस अवसर पर डॉ. राहुल, चिकित्सा पदाधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, शहरी स्वास्थ्य प्रबंधक सहित स्वास्थ्य विभाग के कई लिपिक और कर्मचारी उपस्थित थे।

फाइलेरिया उन्मूलन हेतु सिविल सर्जन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, 20 अप्रैल से चलेगा विशेष अभियान

फाइलेरिया उन्मूलन हेतु सिविल सर्जन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, 20 अप्रैल से चलेगा विशेष अभियान

जिले के 117 गांवों में 2 लाख लोगों को खिलाई जाएगी दवा, स्वास्थ्य कर्मियों को एमडीए (MDA) अभियान की सफलता के लिए दिए गए विशेष निर्देश।


नरेश सोनी प्रधान सम्पादक, न्यूज़ प्रहरी।

हज़ारीबाग: झारखंड के हज़ारीबाग जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को स्थानीय सिविल सर्जन कार्यालय स्थित सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (District TOT) का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला की अध्यक्षता हज़ारीबाग के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने की। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी 'फोकल मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन' (MDA) अभियान को सफल बनाना रहा।

Hazaribagh MDA Training Program

स्वास्थ्य कर्मियों का क्षमता वर्धन

इस एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में मुख्य रूप से जिले के सभी बीपीएम (BPM), एमटीएस (MTS) और बीटीटी (BTT) के सदस्य उपस्थित रहे। प्रशिक्षण सत्र का संचालन वीबीडीसी (VBDC) के मैमूर सुल्तान और पिरामल टीम (Piramal Team) के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को अभियान की बारीकियों, दवाओं के वितरण की सटीक प्रक्रिया और फील्ड स्तर पर आने वाली संभावित चुनौतियों के समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

20 अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान

कार्यशाला को संबोधित करते हुए वीबीडी पदाधिकारी डॉ. कपिलमुनि ने अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि यह फोकल एमडीए अभियान 20 अप्रैल से 5 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। विभाग ने जिले के उन 117 गांवों को चिन्हित किया है जो फाइलेरिया से अति-प्रभावित हैं। इस 15 दिवसीय अभियान के दौरान कुल 2 लाख लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।

गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर जोर

सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने उपस्थित प्रतिभागियों को निर्देशित करते हुए कहा कि एमडीए अभियान की सफलता स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता पर निर्भर करती है। उन्होंने दवा वितरण के दौरान पारदर्शिता और शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने की बात कही। प्रशिक्षण में डीपीएम समरेश सिंह और महेंद्र पाल ने भी अपने विचार रखे और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।

अभियान का उद्देश्य और रणनीति

इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता का विकास करना है ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को दवा के महत्व के प्रति जागरूक कर सकें। कार्यशाला के अंत में सिविल सर्जन द्वारा सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में मिशन मोड में काम करने और अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि सामूहिक दवा सेवन के माध्यम से फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी की चेन को तोड़ा जा सके, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इस शारीरिक अक्षमता से बचाया जा सके।

अस्पताल में मरीजों से बदसलूकी अब नहीं चलेगी; DDC रिया सिंह ने सिविल सर्जन और डॉक्टरों के साथ की मैराथन बैठक

अस्पताल में मरीजों से बदसलूकी अब नहीं चलेगी; DDC रिया सिंह ने सिविल सर्जन और डॉक्टरों के साथ की मैराथन बैठक

हजारीबाग:

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने और अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। सोमवार को समाहरणालय सभाकक्ष में उप विकास आयुक्त (DDC) श्रीमती रिया सिंह ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और विशेष रूप से DMFT (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) के तहत कार्यरत डॉक्टरों व कर्मियों के साथ एक समीक्षा बैठक की।

"स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ बैठक करतीं हजारीबाग DDC रिया सिंह (फाइल फोटो)"

बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य (Biometric Mandatory)

बैठक का सबसे अहम मुद्दा 'उपस्थिति' रहा। DDC रिया सिंह ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिया कि सभी डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति अब बायोमेट्रिक सिस्टम से ही मान्य होगी।

प्रशासन को शिकायतें मिल रही थीं कि कई बार डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहते हैं। DDC ने अधिकारियों को बायोमेट्रिक मशीनों में आ रही तकनीकी खराबी को तुरंत ठीक करने का आदेश दिया, ताकि अनुशासन और पारदर्शिता (Transparency) बनी रहे।

लापरवाही बर्दाश्त नहीं, मरीजों से हो अच्छा व्यवहार

अक्सर सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ रूखे व्यवहार की शिकायतें आती हैं। इस पर संज्ञान लेते हुए DDC ने स्पष्ट निर्देश दिया:

"स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा हर कर्मी मरीजों के साथ शालीनता और संवेदनशीलता से पेश आए। सेवा भाव ही आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।"


वेतन, छुट्टी और एम्बुलेंस पर चर्चा

बैठक में प्रशासन ने सिर्फ सख्ती ही नहीं दिखाई, बल्कि कर्मियों की समस्याएं भी सुनीं। DMFT के तहत कार्यरत कर्मियों के वेतन वृद्धि (Increment), HRA (House Rent Allowance) और मैटरनिटी लीव (Maternity Leave) जैसे मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।

इसके अलावा, अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता और एम्बुलेंस सेवाओं को सुचारू करने के लिए भी रणनीति बनाई गई, ताकि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को भटकना न पड़े।

​इस महत्वपूर्ण बैठक में सिविल सर्जन, जिला योजना पदाधिकारी, डीपीएम (DPM) और जिले के कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।

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