फाइलेरिया उन्मूलन हेतु सिविल सर्जन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित, 20 अप्रैल से चलेगा विशेष अभियान
जिले के 117 गांवों में 2 लाख लोगों को खिलाई जाएगी दवा, स्वास्थ्य कर्मियों को एमडीए (MDA) अभियान की सफलता के लिए दिए गए विशेष निर्देश।
हज़ारीबाग: झारखंड के हज़ारीबाग जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को स्थानीय सिविल सर्जन कार्यालय स्थित सभागार में जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (District TOT) का सफल आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यशाला की अध्यक्षता हज़ारीबाग के सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने की। कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी 'फोकल मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन' (MDA) अभियान को सफल बनाना रहा।
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| Hazaribagh MDA Training Program |
स्वास्थ्य कर्मियों का क्षमता वर्धन
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में मुख्य रूप से जिले के सभी बीपीएम (BPM), एमटीएस (MTS) और बीटीटी (BTT) के सदस्य उपस्थित रहे। प्रशिक्षण सत्र का संचालन वीबीडीसी (VBDC) के मैमूर सुल्तान और पिरामल टीम (Piramal Team) के विशेषज्ञों द्वारा किया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों को अभियान की बारीकियों, दवाओं के वितरण की सटीक प्रक्रिया और फील्ड स्तर पर आने वाली संभावित चुनौतियों के समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
20 अप्रैल से शुरू होगा महा-अभियान
कार्यशाला को संबोधित करते हुए वीबीडी पदाधिकारी डॉ. कपिलमुनि ने अभियान की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि यह फोकल एमडीए अभियान 20 अप्रैल से 5 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। विभाग ने जिले के उन 117 गांवों को चिन्हित किया है जो फाइलेरिया से अति-प्रभावित हैं। इस 15 दिवसीय अभियान के दौरान कुल 2 लाख लोगों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन पर जोर
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने उपस्थित प्रतिभागियों को निर्देशित करते हुए कहा कि एमडीए अभियान की सफलता स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता पर निर्भर करती है। उन्होंने दवा वितरण के दौरान पारदर्शिता और शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने की बात कही। प्रशिक्षण में डीपीएम समरेश सिंह और महेंद्र पाल ने भी अपने विचार रखे और तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की।
अभियान का उद्देश्य और रणनीति
इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता का विकास करना है ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को दवा के महत्व के प्रति जागरूक कर सकें। कार्यशाला के अंत में सिविल सर्जन द्वारा सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में मिशन मोड में काम करने और अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि सामूहिक दवा सेवन के माध्यम से फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी की चेन को तोड़ा जा सके, जिससे आने वाली पीढ़ियों को इस शारीरिक अक्षमता से बचाया जा सके।

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