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Editor: Naresh Prasad Soni
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क्या सावित्रीबाई फुले को मिलेगा भारत रत्न? झारखंड में उठी पीएम मोदी से ऐतिहासिक न्याय की मांग

झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच ने पीएम मोदी से माता सावित्रीबाई फुले को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग की।
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क्या सावित्रीबाई फुले को मिलेगा भारत रत्न? झारखंड में उठी पीएम मोदी से ऐतिहासिक न्याय की मांग

स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र, महिला शिक्षा की जननी के लिए सर्वोच्च सम्मान की अपील।

नरेश सोनी प्रधान सम्पादक,न्यूज़ प्रहरी ।

हजारीबाग/रांची/झारखंड: आधुनिक भारत में स्त्री शिक्षा की नींव रखने वाली पहली महिला शिक्षिका, माता सावित्रीबाई फुले को 'भारत रत्न' देने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह पुरजोर मांग उठाई है कि राष्ट्र निर्माण में सावित्रीबाई फुले के अतुलनीय योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जाए।
Savitribai Phule Portrait and Bateshwar Prasad Mehta Letter to PM Modi Regarding Bharat Ratna

रूढ़ियों के खिलाफ जलाई थी शिक्षा की मशाल

बटेश्वर प्रसाद मेहता ने अपने मांग पत्र में उल्लेख किया है कि सावित्रीबाई फुले ने उस दौर में शिक्षा की अलख जगाई जब समाज गहरे अंधकार, कुरीतियों और रूढ़िवादिता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। उन्होंने न केवल देश का पहला बालिका विद्यालय खोलकर इतिहास रचा, बल्कि समाज के वंचित, पिछड़े और दलित वर्गों के अधिकारों के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

करोड़ों महिलाओं के संघर्ष का सम्मान

मेहता ने तर्क दिया कि आज भारत की बेटियां अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक जो कामयाबी हासिल कर रही हैं, उसकी असली सूत्रधार सावित्रीबाई फुले ही हैं। उन्हें 'भारत रत्न' देना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं और अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के संघर्षों का सम्मान होगा, जिन्होंने उनके पदचिन्हों पर चलकर अपनी पहचान बनाई है।

सरकार से ऐतिहासिक न्याय की उम्मीद

झारखंड के सामाजिक और राजनीतिक हलकों में इस मांग के बाद चर्चा तेज हो गई है। मंच के अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार करे ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सकें। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल अतीत के संघर्षों को मान्यता देगा, बल्कि भविष्य के समावेशी भारत के लिए एक सशक्त संदेश भी होगा।

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