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EDITOR: NARESH PRASAD SONI
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HAZARIBAGH: विष्णुगढ़ में दबंगई की इंतिहा, मनरेगा के तहत लगाए गए 25 फलदार आम के पेड़ों को काटा; पुलिस जांच में जुटी

HAZARIBAGH: विष्णुगढ़ में दबंगई की इंतिहा, मनरेगा के तहत लगाए गए 25 फलदार आम के पेड़ों को काटा; पुलिस जांच में जुटी

विष्णुगढ़ /हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के अंतर्गत आने वाले विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां आपसी रंजिश और बदले की भावना के चलते एक किसान की मेहनत पर पानी फेर दिया गया। ग्राम नावाटांड़ निवासी महेंद्र प्रसाद महतो के बगीचे में लगे लगभग 20 से 25 आम के पेड़ों को बीती रात अज्ञात और नामजद आरोपियों ने काटकर बर्बाद कर दिया। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत क्षति है, बल्कि सरकारी योजना 'बिरसा मुंडा आम बागवानी' के तहत किए गए पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी एक बड़ा प्रहार है।

बिरसा मुंडा आम बागवानी के काटे गये पेड़।

घटना का विस्तृत विवरण

महेंद्र प्रसाद महतो, जो कि नावाटांड़ के निवासी हैं, ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उन्होंने अपनी जमीन पर मनरेगा योजना के तहत 'बिरसा मुंडा आम बागवानी' विकसित की थी। 25 मार्च 2026 की सुबह जब वे अपने बगीचे में पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। रात के अंधेरे में करीब 20 से 25 हरे-भरे आम के पेड़ों को कुल्हाड़ी या धारदार हथियार से काट दिया गया था।।

पीड़ित द्वारा कार्रवाई के लिए दिया गया आवेदन 

पीड़ित के अनुसार, यह घटना केवल चोरी या साधारण तोड़फोड़ नहीं है, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा है। महेंद्र प्रसाद ने इस कृत्य के पीछे गांव के ही कुछ प्रभावशाली और नामजद लोगों पर शक जताया है।

विवाद की जड़: मुखिया की गाड़ी जलाने से जुड़ा है तार?

इस घटना के पीछे की पृष्ठभूमि काफी पेचीदा है। आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 23 मार्च 2026 को महेंद्र प्रसाद महतो के भाई और बनासो पंचायत के वर्तमान मुखिया, चन्द्रशेखर की चार पहिया वाहन (JH02BF6029) को असामाजिक तत्वों द्वारा आग के हवाले कर दिया गया था।

मुखिया चन्द्रशेखर ने इस आगजनी के संबंध में विष्णुगढ़ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें कुछ स्थानीय लोगों को अभियुक्त बनाया गया था। महेंद्र प्रसाद अपने भाई के साथ कानूनी प्रक्रिया में सहयोग कर रहे थे। पीड़ित का आरोप है कि इसी कानूनी कार्रवाई से बौखलाकर और बदले की भावना से ओतप्रोत होकर आरोपियों ने उनके बगीचे को निशाना बनाया।

नामजद आरोपियों की सूची

महेंद्र प्रसाद महतो ने अपने लिखित आवेदन में निम्नलिखित व्यक्तियों पर सीधे तौर पर संदेह व्यक्त किया है:

धनीराम मुर्मू -पिता चैता मांझी

संतोष मुर्मू - पिता जिबलाल मुर्मू

बैजू मुर्मू -पिता लोधिया मुर्मू

बंशी किस्कू -पिता रूपन मांझी

सुखदेव मुर्मू - पिता चैता मुर्मू

ये सभी आरोपी ग्राम नावाटांड़ (खोंगिया) के निवासी बताए जा रहे हैं। आवेदन में कहा गया है कि इन लोगों ने अपने कुछ अज्ञात करीबियों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया है।

सरकारी योजनाओं पर प्रहार और किसानों का दर्द

'बिरसा मुंडा आम बागवानी योजना' झारखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और किसानों की आय में वृद्धि करना है। एक पेड़ को फलदार बनाने में सालों की मेहनत और सरकारी संसाधन लगते हैं। इस तरह से पेड़ों की कटाई न केवल आर्थिक नुकसान है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति संवेदनहीनता को भी दर्शाता है।

महेंद्र प्रसाद कहते हैं, "हमने इन पेड़ों को बच्चों की तरह पाला था। यह केवल पेड़ नहीं, हमारे भविष्य की उम्मीदें थीं। अगर कानून का डर नहीं रहेगा, तो कोई भी किसान खेती करने से डरेगा।"

पुलिस की भूमिका और आगे की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए विष्णुगढ़ थाना प्रभारी को आवेदन सौंप दिया गया है। पीड़ित ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

स्थानीय ग्रामीणों में भी इस घटना को लेकर काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर जनप्रतिनिधियों (मुखिया) और उनके परिवार के साथ इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? फिलहाल पुलिस ने आवेदन स्वीकार कर लिया है और मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

निष्कर्ष

हजारीबाग के इस मामले ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में कानून व्यवस्था और आपसी रंजिश के खतरनाक स्तर को उजागर किया है। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इन आरोपियों को कब तक सलाखों के पीछे भेजता है और पीड़ित किसान को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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